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खड़गवां@मां महामाया मंदिर स्ट्रीट लाइट कार्य पर सवाल,गुणवत्ता पर उठे गंभीर संदेह, लाखों की लागत,लेकिन काम पर उठ रही उंगलियां

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-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,15 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले के खड़गवां ग्राम पंचायत स्थित मां महामाया मंदिर परिसर में इन दिनों लाखों रुपये की लागत से स्ट्रीट लाइट लगाने का कार्य कराया जा रहा है, इस परियोजना का उद्देश्य मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बेहतर रोशनी की व्यवस्था करना है, ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को सुविधा मिल सके, हालांकि, कार्य की मौजूदा स्थिति ने इस पहल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत से नाराज ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में भले ही यह योजना विकास कार्य के रूप में दिखाई दे रही हो,लेकिन मौके पर स्थिति इसके उलट नजर आ रही है, कार्य की गुणवत्ता को लेकर असंतोष लगातार बढ़ रहा है और लोग खुलकर विरोध जता रहे हैं।
गुणवत्ता पर उठे तकनीकी सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्ट्रीट लाइट कार्य में कई स्तरों पर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है,उनके अनुसार उपयोग किए जा रहे उपकरण निम्न गुणवत्ता के प्रतीत हो रहे हैं, जबकि खंभों की मजबूती और फिटिंग कार्य में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, वायरिंग और इंस्टॉलेशन का काम भी जल्दबाजी में किया जा रहा है, जिससे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों की स्पष्ट मांग—पहले जांच,फिर भुगतान-ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए,उनका कहना है कि गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद ही संबंधित ठेकेदार को भुगतान किया जाए,साथ ही यदि जांच में कोई अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
धार्मिक स्थल पर पारदर्शिता की अपेक्षा- ग्रामीणों का मानना है कि धार्मिक स्थलों पर होने वाले विकास कार्यों में विशेष पारदर्शिता और गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए, ऐसे स्थानों से जनता की आस्था जुड़ी होती है,इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे विश्वास को प्रभावित करती है।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी नजरें
अब यह मामला प्रशासन की कार्यप्रणाली की परीक्षा बनता जा रहा है, देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने लाई जाती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
हादसे की आशंका और संसाधनों की बर्बादी का डर
ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल सही तरीके से स्थापित नहीं किए गए हैं, इससे भविष्य में दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है, इसके साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि कम गुणवत्ता की सामग्री के कारण स्ट्रीट लाइटें जल्द ही खराब हो सकती हैं, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग होगा।


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