

सोनहत के अंतिम छोर तक पहुँची स्वास्थ्य सेवा,2 माह के मासूम को मिला नया जीवन
आधी रात को रेस्क्यू और रायपुर में सफल इलाज :
कोरिया स्वास्थ्य विभाग की त्वरित पहल ने पेश की मिसाल
गोयनी के 2 माह के बच्चे के लिए ‘वरदान’ बना प्रशासन
राजन पाण्डेय
सोनहत,15 अप्रैल 2026 (घटती-घटना)। सोनहत जनपद के सुदूर वनांचल और राज्य की सीमा पर स्थित अंतिम छोर के ग्राम गोयनी में एक 2 माह के मासूम के लिए ‘चिरायु योजना’ और स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता नया जीवन लेकर आई, जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चे अंश की हालत जब अत्यंत गंभीर हुई, तो जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ‘त्वरित कार्रवाई ने उसे मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया।
आधी रात को चला रेस्क्यू ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोनहत बीएमओ डॉक्टर बलवंत सिंह ने तत्काल इसकी सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरिया,डॉक्टर प्रशांत सिंह को दी,सूचना मिलते ही सीएमएचओ ने तत्परता दिखाते हुए बिना समय गंवाए देर रात ही एम्बुलेंस को दुर्गम क्षेत्र गोयनी के लिए रवाना करने के निर्देश दिए। जिसके बाद डॉ बलवंत सिंह के निर्देशन में पथरीले रास्तों और रात के अंधेरे को चीरते हुए एम्बुलेंस मासूम को लेने ग्राम आनंदपुर पँचायत पहुची और देर रात लगभग 2 से 3 बजे मरीज को लेकर सोनहत पहुँची, जहां डॉक्टर बलवंत सिंह ने प्राथमिक उपचार कर चिरायु टीम के डॉ अरविंद यादव की निगरानी में उसे बैकुंठपुर भेजा।
सीएमएचओ के निर्देश पर रायपुर में हुआ निःशुल्क सफल इलाज
प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को बैकुण्ठपुर भेजा गया, यहाँ सीएमएचओ डॉक्टर प्रशांत सिंह के विशेष मार्गदर्शन और संवेदनापूर्ण पहल के कारण बच्चे को तत्काल चिरायु स्टाफ की देखरेख में रायपुर के निजी बालाजी अस्पताल रेफर किया गया, अस्पताल में बच्चे का बेहतर ढंग से इलाज किया गया और चिरायु टीम लगातार फॉलोअप लेती रही।
स्वस्थ होकर घर लौटा मासूम
इलाज के बाद बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हुआ और 14 तारीख को उसे शासकीय वाहन से ससम्मान उसके गृह ग्राम गोयनी पहुँचाया गया, जब बच्चा मुस्कुराते हुए अपने माता-पिता की गोद में घर पहुँचा,तो परिजनों की आँखों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति कृतज्ञता के आँसू थे।
क्षेत्र में हो रही है स्वास्थ्य विभाग की सराहना
कोरिया जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सीएमएचओ डॉक्टर प्रशांत सिंह की कार्यशैली और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की अब हर जगह प्रशंसा हो रही है,इस सफल जीवन रक्षा अभियान में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बलवंत सिंह,चिरायु के चिकित्सक डॉक्टर अरविंद यादव एवं समस्त चिरायु स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही।
समानता और संवेदनशीलता की नई मिसाल
आमतौर पर यह देखा जाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अक्सर रसूखदार या जागरूक शहरी वर्ग तक ही सीमित रह जाता है, जबकि सुदूर ग्रामीण अंचलों के जरूरतमंदों को सहायता के लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ती है,लेकिन,गोयनी के इस मामले ने एक नई और सकारात्मक मिसाल पेश की है,चिरायु योजना के माध्यम से पहले भी कई बच्चों का उपचार हुआ है, परंतु वनांचल के अंतिम छोर पर रहने वाले एक निर्धन परिवार के लिए प्रशासन की ऐसी ‘त्वरित सक्रियता’ पहली बार देखी गई, बिना किसी सिफारिश या आर्थिक प्रभाव के, केवल मानवीय आधार पर आधी रात को चलाया गया यह रेस्क्यू ऑपरेशन यह साबित करता है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो स्वास्थ्य सेवाएँ वास्तव में कतार के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सकती हैं, यह पहल न केवल एक मासूम की जान बचाने वाली रही, बल्कि इसने व्यवस्था के प्रति आम जनमानस के विश्वास को भी पुनर्जीवित किया है।
इनका कहना है…
‘वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधा पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है। मासूम की जान बचना हमारी पूरी टीम की सजगता का परिणाम है। ‘
— डॉ. प्रशांत सिंह, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी,कोरिया
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