मथुरा,24 मार्च 2026। संघ प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार सुबह 10 बजे मथुरा के वृंदावन पहुंचे। यहां एक आश्रम के लोकार्पण समारोह में हिस्सा लिया। संतों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। संघ प्रमुख ने धर्मांतरण पर कहा…जो लोग पहले हिंदू थे,अब दूसरे संप्रदायों में चले गए हैं,उन्हें वापस लाने की कोशिशें जारी हैं। अगर वो खुद ही वापस आना चाहते हैं तो हमें दरवाजे खुले रखने चाहिए। भागवत ने घुसपैठ के मुद्दे पर कहा- समाज का दायित्व है कि जैसे ही किसी घुसपैठिए का पता चले,अधिकारियों को बताएं। वैसे तो हमें भेदभाव नहीं करना है, लेकिन जो देश में चोरी-छिपे आए हैं, कभी-कभी बड़ी गड़बडि़यों का कारण बनते हैं, ऐसे लोगों के लिए हमें स्पष्ट रहना होगा कि हम उन्हें रोजगार नहीं देंगे। समाज और प्रशासन को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए कि धर्मांतरण और घुसपैठ को रोका जाए। संघ प्रमुख ने हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने की अपनी सलाह फिर से दोहराई। उन्होंने कहा…डॉक्टर मानते हैं कि अगर किसी परिवार में तीन संतान होती हैं तो माता-पिता और बच्चों के सेहतमंद होने की संभावना बढ़ जाती है। जैसा कि मानस शास्त्र कहता है कि घर में तीन बच्चे होने पर वे बड़े होकर बेहतर और संतुलित व्यक्तित्व के बनते हैं। आपसी झगड़े-टकराव भी कम होते हैं। यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। फरसा वाले बाबा की मौत के सवाल पर कहा- स्ढ्ढभ् जांच चल रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रयागराज में कोल्ड स्टोरेज हादसे पर कहा कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री ने सहायता की घोषणा की है। घायलों का बेहतर इलाज कराया जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। दरअसल, रुक्मिणी विहार में रुड़की के संत महामंडलेश्वर यतींद्रानंद के ‘जीवनदीप’ आश्रम का लोकार्पण किया गया। 24 कमरे के आश्रम में आध्यात्मिक और वैदिक शिक्षा दी जाएगी। इसका शिलान्यास संघ के सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने किया था। समारोह में एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव और जूना अखाड़ा के अवधेशानंद गिरी ने भी हिस्सा लिया।
मोहन भावगत बोले- मनुष्यों की 3 संतान होनी चाहिए : मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या शास्त्र में कहते हैं कि अगर 3 से नीचे आ गए तो खतरा है। ढाई से नीचे गए तो ब्रेक लगाओ जल्दी और 2 के नीचे गए तो फिर कठिन है। दुनियाभर के देशों में जहां जन्म दर कम थी। उन्होंने प्रयास करके अपने लोगों का जन्म दर 3 के ऊपर लाया है। उन्होंने कहा- अपने देश के जनसंख्या नीति है- हम कहते हैं, उस पर एक बार विचार करो। 50 साल के बाद खाने वाले कितने रहेंगे, खिलाने वाले कितने चाहिए। इतने लोग रहेंगे तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण ये सारी बातें कैसे रख सकेंगे हम। भागवत ने कहा…जन्मदात्री माता होती है, उसका प्रबोधन, सशक्तिकरण कितनी मात्रा में और करना पड़ेगा। सारा सोच कर 50 साल के बाद जनसंख्या उपयोगी हो, ऐसा कुछ तय कीजिए। जो भी आप तय करोगे,पहले सबको समझाइए, एकदम कानून मत लाइए,सबके हित की बात है। फिर वह सब पर समान रूप से लागू कीजिए। जहां गड़बड़ होती है, वहां जल्दी लागू कीजिए।
उन्होंने बताया कि पॉपुलेशन पॉलिसी आज भी क्या कहती है वो कहती है 2.1, इतनी संतान होनी चाहिए। गणित की नीति है- .5 के नीचे हैं तो 2 कर देंगे, .5 के ऊपर है तो 3 कर देंगे। लेकिन, ये मनुष्यों में नहीं हो सकता। 2 के बाद .1 बच्चा तो होगा नहीं। होगा तो तीसरा होगा। यानी हमारी पॉपुलेशन पॉलिसी कहती है कि 2 से ज्यादा बच्चे होने चाहिए।
सनातन धर्म संस्कृति का समय आया : भागवत
मोहन भागवत ने कहा- सनातन धर्म संस्कृति का समय आया है, लेकिन भारत का समाज उसके अनुरूप अपना जीवन ढाले। तब वो ज्ञान दूसरों को देने में समर्थ होगा। इसके तैयारी में आश्रमों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है।
कलह से किसी का फायदा नहीं,दुनिया ये जानती है : भागवत
मोहन भागवत ने कहा कि कलह में किसी का फायदा नहीं है। दुनिया ये जानती है। आपस में लड़ने वाले लोग भी ये जानते हैं। इससे केवल नुकसान ही नुकसान है, लेकिन अहंकार को पूरा करने, बदले की भावना, स्वार्थ की भावना से हारकर खुली आंखों से अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने का काम दुनिया कर रही है।
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