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नई दिल्ली@हरदीप पुरी बोले…राहुल ने खुद को मूर्ख साबित किया

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एपस्टीन से दो मुलाकातों पर दोषी नहीं ठहरा सकते
नई दिल्ली,12 फरवरी 2026। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने आप को मूर्ख साबित कर लिया है। पुरी ने इंटरव्यू में एपस्टीन फाइल्स में अपना नाम आने और विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। हरदीप पुरी ने दावा किया कि जब वे काम से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी फाइनेंसर और बाल यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से मिले थे तो उन्हें असहजता महसूस हुई थी। उन्होंने कहा- मैंने एपस्टीन से मिलने की इच्छा नहीं जताई थी। ये मुलाकातें अरेंज की गई थीं। उन्होंने आगे कहा- दो मुलाकातों से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मैं इस मामले में बेदाग हूं। उस समय तो मैं सरकार का हिस्सा भी नहीं था। इसलिए राहुल गांधी का यह कहना कि एपस्टीन फाइल्स की वजह से प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सरेंडर कर दिया, बिल्कुल गलत है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को संसद में दावा किया था कि अमेरिका में जारी किए गए एपस्टीन फाइल्स में हरदीप पुरी का नाम है। राहुल के आरोपों पर पुरी ने बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पहली बार माना था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे।
पुरी ने कहा….मुलाकात के
समय एपस्टीन को नहीं जानता था…

पुरी से इंटरव्यू में जब पूछा गया कि क्या आपको आपराधिक आचरण की जानकारी थी तो पुरी ने कहा- ‘मैं नहीं जानता था कि वह कौन था। मैं पहली बार एपस्टीन से एक मीटिंग में मिला था। मुझे उसके बैकग्राउंड के बारे में पता नहीं था। पुरी ने बताया- मैं इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूशन से जुड़े एक डेलिगेशन के रूप में गया था। उसी दौरान एपस्टीन से मिला। मैं सार्वजनिक जीवन में कई तरह के लोगों से मिलता हूं, जिनमें से कुछ का आपराधिक रिकॉर्ड भी हो सकता है। पुरी ने कहा- पहली बार मुलाकात के दौरान मुझे नहीं पता था कि एपस्टीन कौन हैं। हमने उनके बारे में गूगल पर सर्च किया। फिर हमने आपस में भी चर्चा की कि हमें उनसे मिलना चाहिए या नहीं? पुरी ने एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया।
पुरी बोले…एपस्टीन को
मीटिंग का इनविटेशन नहीं था…

पुरी ने कहा- राजनीति में या सार्वजनिक जीवन में, अगर मैं सरकारी अधिकारी होता,तो मैं किसी को मैसेज भेजकर पूछता, ‘क्या मुझे इस व्यक्ति से मिलना चाहिए?’ लेकिन उस समय मैं आईपीआई के साथ काम कर रहा था। पुरी ने कहा…हम दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे थे। हमने एपस्टीन को वहां इनवाइट नहीं किया था। आईपीआई के डेलिगेशन के हिस्से के रूप में एपस्टीन से तीन या चार बार मुलाकात की थी। पुरी ने बताया कि एपस्टीन आईपीआई के सदस्य भी नहीं थे।


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