नई दिल्ली,10 फरवरी 2026। केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के एक कार्यक्रम में कहा कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ चुका है। देश के डेटा को हर हाल में सुरक्षित करना होगा। सीबीआई ने आयोजित साइबर सक्षम धोखाधड़ी से निपटने और उसके पूरे तंत्र को ध्वस्त करने के विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन यहां 10 और 11 फरवरी तक चलेगा। इस अवसर पर गृह मंत्री ने सीबीआई के नए साइबर अपराध प्रकोष्ठ का उद्घाटन किया। साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के अंतर्गत स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (एस4सी) डैशबोर्ड की भी शुरुआत की। इस मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि यह दोनों ऐसी इकाइयां हैं,जिसमें अलग-अलग विभाग और एजेंसियां एक ही प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराध से निपटने के लिए काम कर रही हैं। जब सभी प्रयास एक दिशा में होते हैं,तभी अपेक्षित परिणाम मिलते हैं। पिछले 11 वर्षों की भारत की डिजिटल यात्रा में साइबर सुरक्षा सबसे अहम विषय बनकर उभरी है। अमित शाह ने कहा कि पहले देश में डिजिटल सेवाओं के करीब 25 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जो अब 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुके हैं। एक जीबी डेटा की कीमत में करीब 97 प्रतिशत की कमी आई है। दुनिया के हर दूसरे डिजिटल लेन-देन भारत में हो रहे हैं। 97 करोड़ से अधिक जनधन खातों और देश के संगठनों के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा अब बड़ी चुनौती है। गृह मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सीबीआई ने 20 हजार करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामलों की जांच की है, जिनमें से 8 हजार करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज किया गया है।
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