–संवाददाता-
अम्बिकापुर,14 नवम्बर 2025
(घटती-घटना)।
सरगुजा संभाग में इस साल नवंबर के पहले पखवाड़े में कड़ाके की ठंड का कहर जारी है। 57 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि नवंबर महीने के पहले सप्ताह से ही लोग ठिठुरने को मजबूर हो गए हैं। वर्तमान में अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है,जो कि औसत से 6.4 डिग्री नीचे है। वहीं, बलरामपुर जिले के सामरीपाट और मैनपाट का तापमान 5 डिग्री तक पहुंच चुका है, जहां ठंड का असर और भी ज्यादा है। इन क्षेत्रों में लोग ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा ले रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिक ए.एम. भट्ट के अनुसार, उत्तर भारत और मध्य भारत में शुष्क हवाओं के लगातार प्रवाह के कारण शीतलहरी जैसी स्थिति बनी हुई है। मेन्था चक्रवाती तूफान के प्रभाव से पहले तापमान में वृद्धि देखी गई थी, लेकिन अब तूफान के खत्म होते ही तापमान में गिरावट आई है। इस समय अंबिकापुर और उत्तर छत्तीसगढ़ का पूरा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में है। अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान पिछले दो दिनों से रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले 57 वर्षों में नवंबर 20 तारीख तक सबसे कम तापमान है। इस प्रकार,नवंबर के माह में अब तक तापमान में गिरावट के नए रिकॉर्ड बन गए हैं। सर्दी के इस प्रकोप ने गर्म कपड़ों की बिक्री में भी तेजी ला दी है। दुकानों और फुटपाथ पर कंबल, स्वेटर, जैकेट, मोजे, स्कार्फ जैसी चीजों की बिक्री बढ़ गई है। लोग ठंड से बचने के लिए इन कपड़ों की खरीदारी कर रहे हैं, और अंबिकापुर के अलावा दूसरे प्रदेशों से भी लोग गर्म कपड़ों का कारोबार करने के लिए आ रहे हैं। हालांकि, दिन में तेज धूप निकलने के बावजूद ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमोत्तरी शुष्क हवाओं का असर अब भी जारी रहेगा, जिससे तापमान में और गिरावट हो सकती है। ऐसे में ठंड से राहत मिलने की संभावना फिलहाल दूर-दूर तक नहीं है।
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