41प्रतिशत फिल्मों ने बजट से 10 गुना ज्यादा कमाया
भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय फिल्मों का दबदबा बढ़ रहा है,जहां 41 प्रतिशत फिल्मों ने अपने बजट से 10 गुना या उससे अधिक कमाई की है। ये फिल्में अब मेनस्ट्रीम सिनेमा को कड़ी टक्कर दे रही हैं। सिनेमा का दौर धीरे-धीरे बदल रहा है। पहले यहां कॉमर्शियल फिल्मों को ही दर्शक मिलते थे या फिर यूं कह लें कि सफलता के रेट्स यहां हाई माने जाते थे। फिर धीरे-धीरे पैन इंडिया फिल्मों ने अपनी जगह बनाना शुरू किया। बाहुबली, आरआरआर, केजीएफ और पुष्पा जैसी फिल्में इसी का उदाहरण हैं।अब इन लिस्ट में रीजनल सिनेमा का नाम भी शामिल हो गया है। इस दौरान मल्टी सिनेमा का अचानक से उदय हुआ है। पहले जहां रीजनल सिनेमा को मेनस्ट्रीम इंडियन सिनेमा के सामने उतनी पहचान नहीं मिलती थी वहीं हालिया रिलीज कुछ फिल्मों ने इसे एकदम पलटकर रख दिया है।
रीजनल सिनेमा बन रहा अपनी जगह
41 प्रतिशत सफल क्षेत्रीय फिल्मों ने अपनी लागत से 10 गुना या ज्यादा कमाई की है। उदाहरण के लिए गुजराती फिल्म ‘लालोः कृष्ण सदा सहायते को ही ले लीजिए। 50 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने 112 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की थी। वहीं, मलयालम फिल्म लोका चैप्टर 1: चंद्रा ने 30 करोड़ रुपए के बजट पर लगभग 300 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।
रीजनल फिल्मों ने दिया बड़ा मुनाफा
वहीं दशावतार ने 12 करोड़ रुपये के बजट पर 28.47 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। निवेश के मुकाबले इसने 220 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया। यह फिल्म ऑस्कर 2026 के लिए एकेडमी अवॉर्ड्स की कंटेंशन लिस्ट में जगह बनाने वाली पहली मराठी फिल्म भी बनी थी।सैकनिक ने अपनी एक रिपोर्ट में 17 सफल क्षेत्रीय फिल्मों का विश्लेषण किया है। इनमें 7 फिल्में ऐसी थीं, जिन्होंने 10 गुना या उससे ज्यादा रिटर्न दिया यानी लगभग 41त्न फिल्मों ने अपनी लागत का 10 गुना या उससे अधिक कमाया।
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