- नगर पंचायत पटना : प्रथम सीएमओ के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का मामला,छुट्टी पर भेजे जाने के बाद उठे सवाल
- आर्थिक अनियमितता साबित होने उपरांत सीएमओ भेजे गए छुट्टी पर…क्या सीएमओ को बचाने छुट्टी को बनाया गया हथियार?
- नवगठित नगर पंचायत पटना के प्रथम सीएमओ का भ्रष्टाचार जांच में भी हुआ साबित,कार्यवाही की जगह तबादले का मिलेगा इनामःसूत्र
- नगर के स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं नागरिकों की प्रमुख मांगें…
- भ्रष्टाचार पर स्पष्ट एवं स्वतंत्र जांच की कार्यवाही
- दोष सिद्ध होने पर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई
- केवल स्थानांतरण नहीं,जवाबदेही तय हो
-रवि सिंह-
कोरिया/पटना,11 नवंबर 2025 (घटती-घटना)। नवगठित नगर पंचायत पटना में प्रथम बार पदस्थ किए गए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों ने नगर के प्रशासनिक माहौल को गर्म कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतों और विभागीय जांच के बाद कई आर्थिक गड़बडि़यों की पुष्टि होने पर संबंधित सीएमओ को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है। इसी निर्णय ने अब सरकार के सुशासन के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि ग्राम पंचायत से नगर पंचायत में शामिल होने का उद्देश्य विकास को बढ़ावा देना था, मगर आरोप हैं कि नगर पंचायत गठन के बाद से ही कई कार्यों में नियम प्रक्रिया और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। शिकायतों के आधार पर हुई जांच रिपोर्ट में भी आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई, जिसके बाद सीएमओ को छुट्टी पर भेजा गया।
बता दे की सुशासन छत्तीसगढ़ सरकार की पहचान मानी जाती है वहीं सरकार लगातार सुशासन की बात भी करती है वहीं यदि सुशासन को लेकर जमीनी हकीकत देखी जाए तो सुशासन नजर आता नहीं है,वर्तमान मामला कोरिया जिले के नवगठित नगर पंचायत पटना का है जहां नगर गठन से लेकर अब तक प्रथम सीएमओ बनकर काम कर रहे अधिकारी द्वारा नगर को अपने लिए भ्रष्टाचार का अड्डा बना लिया गया है और कई मामलों में शिकायत और जांच उपरांत जब भ्रष्टाचार साबित भी हो चुका है तब सीएमओ को लंबी छुट्टी पर भेजकर उसे बचाए जाने का प्रयास हो रहा है,नवगठित नगर पंचायत पटना के लोगों ने ग्राम पंचायत से नगर पंचायत में शामिल होने की सहमति इसलिए प्रदान की थी जिससे नगर के अनुसार ग्राम का विकास हो और नगर के लोगों को बेहतर सुविधा और बेहतर अवसर प्राप्त हो वहीं प्रथम सीएमओ ने अपने पदस्थ होने से लेकर अब तक जो कुछ नगर पंचायत में किया वह केवल अपनी जेब भरने का काम था जो साबित हुआ जब शिकायत पर जांच हुई,अब सीएमओ को लंबी छुट्टी दी गई है और सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या छुट्टी प्रदान करने के पीछे का कारण सीएमओ को बचाना है?वैसे सीएमओ अपने तबादले के लिए प्रयासरत है और बताया जा रहा है कि ऐसा संभव भी हो सकता है क्योंकि सीएमओ पहुंच और जुगाड में माहिर है, अब यदि तबादला होता है तो यह माना जाएगा कि यह इनाम है सीएमओ के लिए उसके भ्रष्टाचार का,वैसे सूत्रों का मानना है कि सीएमओ का तबादला ही किया जायेगा कार्यवाही भ्रष्टाचार साबित होने उपरांत भी नहीं होगी यह खुद सीएमओ लोगों से कहते सुने जाते हैं, वैसे नव गठित नगर पंचायत पटना के नागरिक एवं प्रथम नगर पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधि सीएमओ पर कड़ी कार्यवाही चाहते थे लेकिन भ्रष्टाचार साबित होने उपरांत भी सीएमओ पर लंबे समय तक कार्यवाही नहीं होने से अब वह कार्यवाही से बच निकलेंगे यह तय नजर आ रहा है,वैसे फिलहाल नवगठित नगर के नागरिकों को जनप्रतिनिधियों को वर्तमान सीएमओ की बजाए दूसरा सीएमओ चाहिए जो नगर विकास ज्यादा,स्व विकास कम करे।
क्या पटना से हटाने के बाद मामले पर होगी कार्रवाई?
प्रशासनिक संकेतों के अनुसार, सीएमओ का स्थानांतरण संभावित माना जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या स्थानांतरण के बाद जांच स्वतः समाप्त मानी जाएगी? यदि ऐसा हुआ तो यह जनमानस में गलत संदेश जाएगा कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में भी केवल कुर्सी बदली जाती है, जवाबदेही नहीं तय की जाती।
शासन के सुशासन मॉडल पर सवाल
राज्य सरकार स्वयं को सुशासन मॉडल पर कार्यरत बताती है, लेकिन यदि: वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई के बजाय प्रभावशाली नेटवर्क और जुगाड़ भारी पड़ जाता है तो यह व्यवस्था की गंभीर कमजोरी दर्शाता है, मामला अब जांच और निर्णय के बीच अटका है, यदि कार्रवाई होती है तो यह सुशासन की पुष्टि होगी, और यदि केवल स्थानांतरण होता है तो यह यह संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार पर रोक नहीं, संरक्षण प्राप्त होता है।
नागरिकों की अपेक्षा
नवगठित नगर पंचायत पटना के स्थानीय नागरिकों का अब स्पष्ट मत है कि उन्हें ऐसा सीएमओ चाहिए जो नगर विकास को प्राथमिकता दे, न कि व्यक्तिगत दायरे को।
क्या पटना से हटाने के बाद उनके भ्रष्टाचार की जांच नहीं होगी?
नगर पंचायत पटना के सीएमओ को लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया है,अब इसके बाद कयास यही लगाया जा रहा है कि उन्हें हटाने की कवायद की यह शुरुआत है,वैसे माना जाता है कि शासकीय विभागों में किसी को किसी जगह से हटाए जाने के दौरान यदि उसे लंबी छुट्टी में भेजा गया है तो ऐसा उसे कड़ी कार्यवाहियों से बचाने के लिए किया गया है क्योंकि ऐसा कुछ गंभीर मामलों में जिसमें,वित्तीय अनियमितता,भ्रष्टाचार या गबन जैसे मामलों में ही होता है,सीएमओ को हटाया जाना तय माना जा रहा है और यदि उन्हें हटाया जा रहा है तो क्या उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होगी भ्रष्टाचार मामले में यह सवाल खड़ा हो रहा है,सीएमओ की कारगुजारी वैसे क्षमा योग्य नहीं है फिर भी वह तबादले की कार्यवाही से बचने वाले हैं यह तय नजर आ रहा है।
सीएमओ के भ्रष्टाचार पर कार्यवाही से बचाने दी गई लंबी छुट्टी
सीएमओ को लंबी छुट्टी पर भेजने के पीछे की मंशा उन्हें लंबी कार्यवाही से बचाना है,सीएमओ का भ्रष्टाचार ऐसा भ्रष्टाचार है जो साबित हो चुका है जिसकी जांच विभाग ने ही की है,सीएमओ जांच उपरांत कार्यवाही से नहीं बच सकते इसलिए उन्हें लंबी छुट्टी पर भेजा गया है,वैसे जनता जनप्रतिनिधि कार्यवाही की मांग जरूर कर रहे हैं और जिसका कोई असर नजर नहीं आ रहा है,सीएमओ लंबी छुट्टी के दौरान ही अन्य जगह पदस्थ कर दिए जाएंगे ऐसा वह दावा करते सुने जाते हैं।
क्या भ्रष्टाचार के मामले में अधिकारियों को संरक्षण इस सरकार में भी मिलेगा?
सीएमओ को यदि केवल तबादला कर अन्य जगह भेज दिया जाता है और कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की जाती तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि उन्हें संरक्षण प्रदान किया जा रहा है,वैसे यदि ऐसा होता है,कार्यवाही नहीं होती है तो यह सवाल खड़ा जरूर होगा कि इस सरकार में भी क्या भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त होगा।
क्या छुट्टी को बनाया गया ‘ढाल’?
सूत्रों का दावा है कि सीएमओ को छुट्टी पर भेजे जाने के पीछे उन्हें विभागीय कार्रवाई या निलंबन से बचाना मुख्य कारण हो सकता है, इसके पीछे तर्क यह बताया जा रहा है कि छुट्टी दिए जाने के बाद कुछ समय बीतने पर सीएमओ का स्थानांतरण कर दिया जाएगा ऐसी स्थिति में भ्रष्टाचार के मामलों की फाइल आगे नहीं बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा, स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि स्थानांतरण ही अंतिम परिणाम रहा, तो यह भ्रष्टाचार के बदले इनाम देने जैसा होगा।
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