अंबिकापुर,19 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। सरगुजा संभाग के हजारों बेरोजगार युवाओं को उस वक्त गहरा झटका लगा, जब राजमाता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर में वर्षों से लंबित तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की भर्ती प्रक्रिया को आधिकारिक रूप से निरस्त कर दिया गया। मेडिकल कॉलेज के डीन ने 18 सितंबर 2025 को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अब सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया छत्तीसगढ़ व्यापम (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के माध्यम से की जाएगी। यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2022 में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी, जिसके अंतर्गत कॉलेज में स्टेनोग्राफर, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय, आया, स्वीपर समेत अन्य तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए गए थे। उस समय सरगुजा सहित पूरे संभाग से हजारों की संख्या में बेरोजगार युवाओं ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। सामान्य और ओबीसी वर्ग के लिए 300 एवं अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए 200 प्रति आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया था। अधिकांश आवेदकों ने दो से तीन पदों के लिए आवेदन किया था, जिससे मेडिकल कॉलेज को करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक की फीस प्राप्त हुई थी। हालांकि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी। प्रशासनिक कारणों और कुछ तकनीकी विवादों के चलते मामला लंबित होता चला गया। 2023 में प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा सरकार के गठन के बाद से इस प्रक्रिया पर पूरी तरह विराम लग गया। इसके बाद लंबे समय तक कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई, जिससे युवाओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति बनी रही। आखिरकार, 23 अप्रैल 2025 को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित स्वशासी समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया को पूर्णतः निरस्त किया जाएगा। इस निर्णय पर अमल करते हुए मेडिकल कॉलेज डीन ने 18 सितंबर को आदेश जारी कर प्रक्रिया रद्द करने की पुष्टि की। आदेश में यह भी कहा गया है कि अब सभी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर व्यापम के माध्यम से पारदर्शी व निष्पक्ष परीक्षा लेकर नियुक्तियां की जाएंगी। हालांकि, आवेदनकर्ताओं द्वारा जमा की गई फीस की वापसी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है। युवाओं का कहना है कि बिना किसी गलती के उनकी तीन साल की मेहनत और इंतजार व्यर्थ चला गया है, और अब फीस वापसी को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।कई आवेदकों ने इस निर्णय पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि भर्ती रद्द करनी ही थी, तो यह पहले ही किया जाना चाहिए था। वर्तमान में बेरोजगारी की मार झेल रहे इन युवाओं ने शासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि उन्हें आवेदन शुल्क लौटाया जाए या नए भर्ती प्रक्रिया में पूर्व आवेदन को मान्यता दी जाए।
अब सभी की निगाहें व्यापम द्वारा शुरू की जाने वाली नई भर्ती प्रक्रिया पर टिकी हैं। हालांकि प्रशासन पारदर्शिता की बात कर रहा है, लेकिन पूर्व प्रक्रिया में लगे हजारों युवाओं की नाराजगी और असमंजस को दूर करना भी सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बनती है।
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