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अंबिकापुर@रामगढ़ पर्वत को बचाने कांग्रेस ने उठाई आवाज 12 नंबर खदान को लेकर जताई गहरी आपत्ति

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अंबिकापुर,17 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। धार्मिक,सांस्कृतिक और पारिस्थितिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण रामगढ़ पर्वत एक बार फिर खतरे में है। सरगुजा की आस्था का प्रतीक यह पर्वत अब कॉरपोरेट खनन के विस्तार की चपेट में आ सकता है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में गठित जांच दल ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर नई प्रस्तावित केंते एक्सटेंशन कोल माइंस (12 नंबर खदान) को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। जांच दल ने रामगढ़ पर्वत की वर्तमान स्थिति और उस पर हो रहे कोल खनन के प्रभाव को लेकर प्रत्यक्ष निरीक्षण और स्थानीय लोगों से बातचीत के आधार पर स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया।प्रेसवार्ता में बताया गया कि परसा ईस्ट केंते बासेन कोल माइंस में ब्लास्टिंग के कारण रामगढ़ पर्वत में दरारें पड़ चुकी हैं। मंदिर तक जाने वाले सीढ़ी मार्ग, लाल माटी और सिंहद्वार के पास चट्टानों में चौड़ी दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे भविष्य में लैंडस्लाइड की आशंका बढ़ गई है। मंदिर के बैगा चंदन सिंह और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि हर दिन दोपहर में ब्लास्टिंग के समय पूरा पर्वत कांपता है, जिससे डर और अनिश्चितता का माहौल बनता जा रहा है। जांच दल ने यह भी स्पष्ट किया कि नई प्रस्तावित खदान (12 नंबर) रामगढ़ पर्वत से केवल 8.6 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि नियमों के अनुसार किसी भी धार्मिक स्थल से 10 किलोमीटर की परिधि में खदान की अनुमति नहीं दी जा सकती। बावजूद इसके, वन विभाग ने अपनी 26 जून 2025 की स्थल निरीक्षण रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण तथ्य को छुपाते हुए खदान को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
कांग्रेस शासनकाल में नहीं दी गई थी कोई अनुमति : प्रेसवार्ता में नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने भाजपा नेता अखिलेश सोनी के उस बयान को पूरी तरह खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 2020 में कांग्रेस सरकार के समय कलेक्टर ने खदान के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय केवल एक पत्र जारी हुआ था जिसमें सीताबेंगरा गुफा से खदान की दूरी का उल्लेख किया गया था,न कि खदान को अनुमति देने का। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव के प्रयासों से ही कांग्रेस शासनकाल में पूरे क्षेत्र में एक भी पेड़ नहीं काटा गया। यहां तक कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सभी खनन आवंटनों को रद्द करने की सिफारिश की गई थी, जिस पर भाजपा नेता शिवरतन शर्मा ने भी हस्ताक्षर किए थे।
वन विभाग पर तथ्यों को छिपाने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि वन विभाग ने जानबूझकर श्रीराम मंदिर की उपस्थिति का उल्लेख नहीं किया ताकि खदान के रास्ते में कोई विधिक अड़चन न आए। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जब यह रिपोर्ट सार्वजनिक की, तो उन्होंने बिना किसी राजनीतिक मंच से जुड़ते हुए इसे जनहित का मुद्दा बताया और स्वयं पर्वत पर जाकर स्थिति का मुआयना किया। उनके प्रयासों के बाद भाजपा ने भी जांच समिति गठित की, जिसमें पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा, विधायक रेणुका सिंह और प्रदेश महामंत्री अखिलेश सोनी शामिल थे। कांग्रेस का आरोप है कि इस समिति ने स्थल का भौतिक निरीक्षण किए बिना ही खदान को क्लीनचिट दे दी, जो कि गंभीर अनदेखी है।
राजनीति नहीं,आस्था और धरोहर की रक्षा की लड़ाई
कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा, यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं है, यह हमारी आस्था,संस्कृति और जैवविविधता से जुड़ा विषय है। रामगढ़ पर्वत पूरे सरगुजा की पहचान है। अगर खदान नंबर 12 खुल गई तो यह पर्वत हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों,सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर खदान खोलने की योजना का विरोध करें।
भाजपा नेताओं की बयानबाज़ी पर तीखी प्रतिक्रिया
अम्बिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल के उस बयान पर कि खदान रामगढ़ पर्वत से विपरीत दिशा में जा रही है,कांग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें वस्तुस्थिति की जानकारी नहीं है। राकेश गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में जिस खदान के कारण रामगढ़ पर्वत को नुकसान हो रहा है, वह भी पहले इसी तरह दूर बताई गई थी, लेकिन परिणाम सबके सामने हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी दिया गया था हलफनामा
पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता ने जानकारी दी कि 16 जुलाई 2023 को कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि मौजूदा खदान में इतना कोयला है कि आने वाले 20 वर्षों तक राजस्थान विद्युत निगम के पावर प्लांट को कोयले की आपूर्ति होती रहेगी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्तमान खदान ही पर्याप्त है तो फिर नया खदान किस उद्देश्य से खोला जा रहा है? क्या यह केवल कॉरपोरेट दबाव का परिणाम है?


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