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अंबिकापुर@फतेहपुर,हरिहरपुर और घाटबर्रा में हाथियों का आतंक,वन विभाग सतर्क,ग्रामीणों में दहशत

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अंबिकापुर,03 सितम्बर 2025 (घटती-घटना)। अंबिकापुर के समीपवर्ती गांवों फतेहपुर, हरिहरपुर और घाटबर्रा में हाथियों का आतंक लगातार गहराता जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों से हाथियों के झुंड गांवों और खेतों में बेरोकटोक घुसकर भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं। खेतों में खड़ी धान और मक्का की फसलें रौंदी जा रही हैं, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। 2 सितंबर को हाथियों का एक दल नेशनल हाईवे 130 पर साल्ही और तारा के बीच सडक पार कर रहा था, जिससे लगभग 30 मिनट तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा। इस दौरान राहगीरों और वाहन चालकों को हाथियों के गुजरने का इंतजार करना पड़ा। यह दृश्य भयावह जरूर था, लेकिन क्षेत्र में वन्यजीवों के बढ़ते हस्तक्षेप की गंभीर चेतावनी भी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे दिन-रात खेतों की रखवाली कर रहे हैं, बावजूद इसके फसलें सुरक्षित नहीं हैं। कई किसानों की पूरी फसल नष्ट हो चुकी है। वन विभाग द्वारा हाथियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों में वन परिक्षेत्राधिकारी कमलेश राय, वनरक्षक अमरनाथ राजवाड़े, विष्णु सिंह, समर्पण लकड़ा, वाहन चालक नरेंद्र राजवाड़े सहित ‘हाथी मित्र दल’ के सदस्य शामिल हैं। विभाग की टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं और हाथियों की गतिविधियों की निगरानी हेतु लोकेशन ट्रैकिंग कर रही हैं।
हाथी-मानव संघर्ष से जानमाल की हानि
उदयपुर वन क्षेत्र में हाथी-मानव द्वंद्व कोई नई बात नहीं है। बीते कुछ वर्षों में अब तक आधा दर्जन से अधिक ग्रामीण हाथियों के हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। वन विभाग बार-बार चेतावनी जारी करता है, लेकिन कई बार ग्रामीण विभागीय सलाहों को नजरअंदाज कर देते हैं,जिससे हादसे और जनहानि की आशंका बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के रिहायशी इलाकों की ओर बढऩे का एक बड़ा कारण परसा कोल खदान है।
जहां अब हाथियों का आवागमन अधिक देखा जा रहा है,वह क्षेत्र खदान के प्रभाव क्षेत्र में आता है। साल्ही, हरिहरपुर और फतेहपुर के ग्रामीण वर्ष 2018 से इस खदान का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि फर्जी ग्राम सभा प्रस्तावों के जरिए खनन की स्वीकृति दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि खदान के चलते न केवल पर्यावरणीय संकट बढ़ा है,बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुआ है। इससे हाथी जैसे जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। वन विभाग जहां अपनी ओर से पूरी मुस्तैदी दिखा रहा है,वहीं ग्रामीणों को भी सतर्कता और सहयोग से इस संकट से निपटने की जरूरत है।


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