
अंबिकापुर,05 अगस्त 2025 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में अल्पसंख्यक समुदाय और आदिवासियों के विरुद्ध हो रहे अत्याचारों, धार्मिक भेदभाव और मानवाधिकारों के उल्लंघन के विरोध में ऑल चर्चेस यूनाइटेड फ्रंट, अंबिकापुर द्वारा आज शहर में मौन जुलूस निकाला गया। यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन राज्य में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और शासन-प्रशासन की उदासीनता के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास है। फ्रंट द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने और धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक लगाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पुलिस की मौजूदगी में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा की गई बर्बरता इसका ताजा उदाहरण है। फ्रंट ने धर्मांतरण को लेकर राज्य में फैलाए जा रहे फोबिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अब तक किसी भी मामले में धर्मांतरण के लिए प्रलोभन, दबाव या भय का प्रमाण नहीं मिला है, फिर भी इसे लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है और राज्य सरकार और अधिक सख्त कानून लाने की बात कर रही है। बयान में भारतीय संविधान की धारा 25 और संयुक्त राष्ट्रसंघ के आदिवासी अधिकार घोषणापत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि आदिवासी भी अन्य नागरिकों की तरह किसी भी धर्म को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं। लेकिन जब वे ईसाई या इस्लाम अपनाते हैं तो उन्हें संदेह की नजरों से देखा जाता है, जबकि हिंदू धर्म अपनाना सामाजिक रूप से स्वीकार्य माना जाता है। यह दृष्टिकोण न केवल संविधान के मूल भावना के खिलाफ है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के भी विरुद्ध है। ईसाई आदिवासियों की डीलिस्टिंग की मांग को लेकर भी फ्रंट ने सख्त आपत्ति जताई है और इसे एक संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडा करार दिया है।
उनका कहना है कि देश की आजादी और राष्ट्र निर्माण में ईसाई समुदाय का योगदान अविस्मरणीय है, और डीलिस्टिंग की मांग करने वालों का इस योगदान से कोई मुकाबला नहीं। ऑल चर्चेस यूनाइटेड फ्रंट ने साफ किया है कि वह इस तरह की नीतियों और दुष्प्रचार के खिलाफ न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी आवाज उठाएगा।
दुर्ग नन प्रकरण : जिला कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के दबाव में दो ननों पर की गई कार्यवाही के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी सरगुजा ने मंगलवार को राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के निर्देश पर जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक के नेतृत्व में सौंपा गया। पाठक ने आरोप लगाया कि बजरंग दल जैसे संगठन धार्मिक पुलिसिंग कर अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं और प्रदेश सरकार की मशीनरी उनके दबाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता का सीधा उल्लंघन है,जिसे कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।
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