- हाईकोर्ट ने जुआ फर्जीवाड़े के मामले में दीप की याचिका की खारिज…
- कार्यवाही के 1 साल बाद पता चला कि सटोरिया दीप और पहलू फर्जी दस्तावेज व्यवस्था करके खुलवाते थे बैंक खाता और उसी से करते थे लेनदेन
- खाताधारक नहीं खुलवाता था खाता फिर भी बैंकों में कैसे खुल जाते हैं खाते…अब आरोपी के पकड़े जाने के बाद नया सवाल हुआ उत्पन्न?
- खाता खोलने वाला आरोपी एक साल बाद हुआ गिरफ्तार…बताया की दीप और पहलू ही दस्तावेज देते थे और खाता खोलने के लिए मुझे बैंक भेजते थे…
- आईपीएल जैसे ही चालू होता है सट्टा का व्यापार काफी तेज हो जाता है नाल से ही करोड़ हो
- जाती है वसूली…
- क्या दीप व पहलू की सेटिंग है पुलिस में तगड़ी…जिस वजह से उन्हें पहले मिली थी जानकारी हुए थे फरार?

-अंजनी सिंह-
अम्बिकापुर,04 जुलाई 2025 (घटती-घटना)। ऑनलाइन सट्टा के कारोबारी दीप उर्फ आयुष सिंह के विरुद्ध कई अपराध दर्ज है, एक अपराध में वह चेकलिस्ट पर बाहर थे तो वहीं दो अन्य मामले में अभी भी वह फरार चल रहे हैं यह इतने शातिर रहे कि अपने बचने के लिए पुलिस कर्मियों पर भी झूठा आरोप लगाया था और एफआईआर निरस्त करने की याचिका भी कोर्ट में दायर की थी पर यह याचिका भी इनकी खारिज हो गई। सबसे बड़ा सवाल तो यह है की आदतन अपराधी की श्रेणी में शामिल होने वाला दीप कैसे पुलिसकर्मियों पर भी इतने गंभीर आरोप लगा सकता है जो कि इसका कारोबार ही पूरा अवैध है आज इस कारोबार की वजह से पिछले दो सालों से फरार चल रहा है ऐसा सूत्रों का कहना है। मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से एक अहम आदेश आया है। ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टा कारोबार के मामले में फंसे दीप उर्फ आयुष सिन्हा की याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता दीप उर्फ आयुष सिन्हा पर 25 मई 2023 को पुलिस थाना अंबिकापुर देहात (गांधीनगर) में अपराध क्रमांक 0182/2023 के तहत केस दर्ज हुआ था। इसमें आरोप है कि वह और अन्य आरोपी मिलकर आईपीएल मैच के दौरान सट्टा कारोबार कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार,टुन्ना उर्फ मृत्युंजय सिंह नामक व्यक्ति की अगुवाई में सट्टा संचालन हो रहा था,जिसमें याचिकाकर्ता सहित अन्य आरोपियों में सौरभ मिश्रा,रवि पटेल,नीरज टिग्गा,हजारी उर्फ संदीप,आकाश अग्रवाल उर्फ आशु आदि शामिल थे। पुलिस के अनुसार,आरोपियों ने स्काई एक्सचेंज ऑनलाइन कंपनी के माध्यम से सट्टा कारोबार को बढ़ावा दिया। पुलिस छापे के दौरान आरोपी आकाश अग्रवाल,आशु व अर्जुन यादव से सट्टा पर्ची,मोबाइल और नगद राशि बरामद की गई।
याचिका का पक्ष
याचिकाकर्ता का दावा है कि वह निर्दोष है। उसने एफआईआर दर्ज होने से पहले ही पुलिस के बड़े अधिकारियों से शिकायत की थी कि कुछ पुलिसकर्मी उस पर सट्टा कारोबार करने का दबाव बना रहे हैं। उसने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने सट्टा कारोबार करने से इनकार कर दिया, तो पुलिस ने झूठा केस दर्ज कर दिया। याचिका में एफआईआर रद्द करने,एसआईटी से जांच कराने, पुलिस से सुरक्षा देने और कार्रवाई करने की मांग की गई थी।
राज्य का पक्ष
राज्य सरकार के वकील ने कहा कि एफआईआर दर्ज हो चुकी है, इसकी जांच जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच जरूरी है, इसे कोर्ट की शुरुआती जांच में रद्द नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बन रहा है। एफआईआर के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि जांच की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर केस के आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
मुख्य बिंदु
– कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
– एफआईआर की वैधता को सही माना।
– जांच जारी रखने का है आदेश।
– याचिकाकर्ता को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।
छत्तीसगढ़ में सट्टेबाजी का बड़ा नेटवर्क सरगुजा से संचालित
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इन आरोपियों ने सट्टेबाजी से अरबों रुपये की संपत्ति अर्जित की है। इनका कनेक्शन महादेव सट्टा ऐप से भी जुड़ा है। वर्तमान में ये आरोपी अंबिकापुर छोड़कर अन्य राज्यों से क्रिकेट सट्टा का कारोबार संचालित रहे हैं। ऐसे में ये सभी स्टोरी पुलिस के चंगुल से बाहर है। गौरतलब है कि मुख्य आरोपी अमित मिश्रा उर्फ पहलू पहले भी सट्टेबाजी के मामले में शामिल रहा लेकिन पैसे के दम पर वह पुलिस से बचता रहा है।
बेनामी संपत्ति की जांच कब?
सरगुजा में सक्रिय इन साटोरियों का नेटवर्क अब दुबई तक फैल गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन साटोरियों के द्वारा क्रिकेट सट्टा के काले कारोबार से बेहिसाब दौलत अर्जित की गई है। जिसका हिसाब करने में पुलिस के भी पसीने छूट जायेंगे। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की का कहना है कि इन सटोरियों के कमर तोड़ने की तैयारी की जा रही है। काली कमाई से अर्जीत की गई संपत्ति का यौरा पुलिस जुटा रही है। इसके बाद इन साटोरियों को पुलिस जड़ से साफ करेगी। हालांकि अब देखने वाली बात है कि इन साटोरियों के संपत्ति की जांच कबतक शुरू होती है।
ये है पूरा मामला
सरगुजा संभाग का अंबिकापुर सटोरियों का गढ़ बनते जा रहा है यहां पर दीप व पहलू नाम के दो सटोरिया काफी चर्चित है और चर्चा भी क्यों ना हो क्योंकि बड़े पैमाने पर यह सट्टा खिलाने का काम करते हैं,जैसे ही आईपीएल सीजन शुरू होता है इनकी तो लॉटरी लग जाती है,बड़े पैमाने पर सट्टा का व्यापार यह संचालित करते हैं और करोड़ों कमाते हैं,कमाई में एक हिस्सा यह पुलिसकर्मियों के लिए भी निकालते हैं,ताकि वह कार्यवाही से बच सकें जिसके लिए मोटी रकम पुलिस तक पहुंचते है,जिस वजह से इन दोनों के विरुद्ध पुलिस समय-समय पर कार्यवाही करती है बाकी समय यह खुलकर सट्टे का काम करते हैं और कई बार तो पुलिस कार्यवाही करती है पर उससे पहले ही यह पुलिस के चंगुल से भाग निकलते हैं,यह इतने बड़े सटोरिए हैं कि उनके पास राजनीतिक संरक्षण से लेकर कानूनी संरक्षण देने वाले अधिवक्ता भी उपलध हैं,यही वजह है कि बड़े पैमाने पर पूरे संभाग का सट्टा का केंद्र बना हुआ है अंबिकापुर,और यहां से यह दो सटोरिए प्रदेश स्तर के लिए सट्टा का काम करते हैं,आईपीएल 2024 सीजन में सरगुजा के तत्कालीन आईजी के कार्यकाल में सट्टे के विरुद्ध बड़ी कार्यवाही की गई थी,जिसमें दीप और पहलू को पुलिस ने गिरफ्तार किया था और बड़ी कार्यवाही की थी,उस समय इन्होंने कार्यवाही करने वाले पुलिसकर्मियों की ही शिकायत की थी,उस मामले में उन्हें जमानत मिल गया था, पर इस मामले में पुलिस को एक और कामयाबी मिली है एक व्यक्ति के नाम से फर्जी खाता खुलवाकर इन्होंने एक और अपराध को उसमें जोड़ लिया है, 2024 में हुई कार्यवाही में ही पुलिस ने एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो चोरी से लोगों के दस्तावेज व्यवस्था करके बिना खाताधारक की जानकारी के खाता बैंक वालों को सेटिंग से खुलवा लेता था और इस खाते से यह लोग लेनदेन करते थे,ताकि कभी पकड़े गए तो यह बच सके पर एक व्यक्ति को जैसे ही पता चला कि उसके नाम पर फर्जी खाता खुला है उसने पुलिस को शिकायत की और पुलिस ने जांच के दौरान एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसने बताया कि पहलू और दीप यह दोनों ही दस्तावेज जुगाड़ करके देते थे और मुझे बैंक भेज कर खाते खुलवाते थे इसके बाद पुलिस ने उस मामले में कुछ धाराएं और बढ़ाई है और फिर से पहलू और दीप को गिरफ्तारी के लिए खोज रही है पर यह दोनों फरार हो गए हैं ऐसा सूत्रों का कहना है।
अभियान के तहत मिली सफलता पर सफलता का श्रेय पुलिस को ना मिले आरोपियों की थी तैयारी
सरगुजा पुलिस द्वारा जारी अभियान ऑपरेशन विश्वास के तहत आपराधिक गतिविधियों मे संलिप्त संदेहियो/आरोपियों की लगातार धरपकड़ की जा रही हैं,इसी क्रम मे मामले का संक्षिप्त विवरण में बताया गया कि दिनांक 13/05/24 कों थाना कोतवाली पुलिस, पेट्रोलिंग टीम कों मुखबीर से सूचना प्राप्त हुई कि तीन सटोरी आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा,अमित मिश्रा उम्र पहलू,शुभम केशरी मिलकर अपने सम्पर्क एवं जानपहचान के लोगो कों स्काई एक्सचेज लिंक भेजकर आईपीएल मैच गुजरात टाइटन्स व कोलकता किंग राइडर्स के बीच चल रहे टी-20 मैच में ऑनलाईन सट्टा खेलने व खेलाने का काम कर रहे है। पुलिस टीम द्वारा सूचना पर त्वरित कार्यवाही करते हुए रेड कार्यवाही करने पर तीन संदिग्ध व्यक्ति मोबाइल ऑपरेट करते हुए मिले, पुलिस टीम द्वारा तीनो संदिग्ध से पूछताछ करने पर अपना नाम (01) आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा उम्र 30 साल (02) अमित मिश्रा उफऱ् पहलू उम्र 30 साल (03) शुभम केसरी उम्र 28 साल सभी साकिन शक्तिपरा शिव मंदिर के पास अम्बिकापुर का होना बताये, आरोपी अमित मिश्रा ऊर्फ पहलू से जप्त एप्पल मोबाइल फ़ोन आईफोन-15 से वाट्सअप ऐप मे किये गए चैट,फोन पे ऐप में लेन देन संबंधि सट्टा खेलने व खेलाने का साक्ष्य प्राप्त हुआ,आयुष सिन्हा उर्फ दीप सिन्हा से सट्टा खेलने व खेलाने वाले लोगों द्वारा दिया गया एटीएम कार्ड तथा शुभम केशरी से हार-जीत का लेखा-जोखा रखने से संबंधित सट्टा खेलने व खेलाने वाले लोगों का पासबुक व चेक बुक तथा मोबाइल जिसमें सट्टा खेलने वाले लोगों का फोन पे एप्लीकेशन डाउनलोड कर पैसे की लेन-देन रखने हेतु साक्ष्य पाये जाने पर तीनों आरोपियों के कजे से घटना मे प्रयुक्त 19 नग मोबाइल,03 नग पासबुक,02 नग चेकबुक,21 नग एटीएम कार्ड एवं 20100 रुपये नगद व अन्य दस्तावेज बरामद किया गया हैं,पर आरोपी इतने शातिर हैं की पुलिस की सफलता पर पानी फेरने के लिए अपनी कहानी पहले से ही तैयार कर रखी है आरोपी पकड़े नहीं जाते हैं कि उनकी शिकायत उससे पहले से तैयार रहता है और पुलिस गुनहगार रहती है और आरोपी पाक-साफ होता है।
क्या पुलिस दीप और पहलू को गिरफ्तार कर छत्तीसगढ़ के सटोरिया गैंग तक पहुंच पाएगी?
वैसे दीप और पहलू फरार हैं और यह फरारी तब हुई है जब उनकी गिरफ्तारी की तैयारी थी ऐसे में यह सवाल उठता है कि कौन उन्हें सूचनाएं दे रहा है जो कार्यवाही से पहले वह फरार हो जा रहे हैं। वैसे देखना है कि सरगुजा पुलिस दीप और पहलू को कब गिरफ्तार कर पाती है या गिरफ्तार कर पाती है भी की नहीं। छत्तीसगढ़ फिलहाल सट्टा कारोबार में काफी आगे बढ़ा हुआ है और यह देखने को मिला है कि सट्टा मामले में महादेव सट्टा का राज्य से गाढ़ा रिश्ता रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी इसकी चर्चा रही है।
दीप के विरुद्ध अब तक 8 अपराध दर्ज जिसमें से 5 सट्टा के
दीप के विरुद्ध अब तक कुल 8 मामले दर्ज हैं वहीं इनमें से पांच केवल सट्टे से जुड़े अपराध हैं आदतन सटोरियों में इसकी गिनती आती है क्योंकि पांच मामले सिर्फ सट्टा के इसके ऊपर दर्ज है और यह मामले पिछले 4 सालों में दर्ज हुआ है इससे आप अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह सत्ता के कितने बड़े किंग है।
बमफोड़ की गिरफ्तारी से सट्टा किंग दीप और पहलू की कारोबार का भी फूटा था बम
सरगुजा के नए पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल के सख्त निर्देश के बाद क्रिकेट सटोरियों के रसूख और पैसे के आगे पस्त पड़ी कोतवाली पुलिस ने सटोरियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के नामी क्रिकेट सटोरी अंबिकापुर निवासी दीप सिन्हा और अमित मिश्रा उर्फ पहलू का जड़ खोदने की तैयारी सरगुजा पुलिस ने शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दीप सिन्हा और अमित मिश्रा के खिलाफ आर्थिक रूप से स्ट्राइक करने की भी तैयारी है। बताया जा रहा है कि इन दोनों साटोरियों का नाम महादेव सट्टा से भी जुड़ा है। बीते कुछ वर्षो में ऑनलाइन सट्टा किंग दीप सिंन्हा और अमित मिश्रा ने मिलकर सट्टा के जरिये अरबों रुपये की बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है। ऐसे में इंटेलिजेंस विभाग की नजर भी इन दोनों सटोरियों और इनसे जुड़े लोगों पर बनी हुई है। इसी कड़ी में ऑनलाइन सट्टेबाजी में रकम लेन-देन के लिए फर्जी बैंक खाता खोलने वाला एक और सटोरिया पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपी रितिक मंदिलवार उर्फ बमफोड़ (24 वर्ष,निवासी जोड़ा लाब, सत्तीपारा, अंबिकापुर) को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी ने कई लोगों के आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और इसका इस्तेमाल सट्टेबाजी में किया। पुलिस ने इसके कब्जे से केनरा बैंक का खाता ओपनिंग फॉर्म भी जप्त किया है।
क्या गद्दारों की वजह से ही अवैध कारोबार पनप रहे वैसे ही देश में आतंकवाद पनप रहे हैं?
हर जगह पर गद्दार मिल जाता है,चाहे वह देश की सुरक्षा को लेकर हो या फिर किसी समाज की सुरक्षा को लेकर अक्सर गद्दारों का भंडाफोड़ भी एक समय हो ही जाता है,पुलिस विभाग में भी कुछ ऐसे गद्दार हैं जो सामाजिक बुराई को बढ़ावा दे रहा है,और चंद पैसों के लिए अवैध कारोबार करने वालों का वह मुखबिर बने हुए,पुलिस चाहे तो कार्यवाही कर ले पर कुछ गद्दारों की वजह से सटोरिया व अन्य अपराधी बच निकलते हैं,अभी जिस सटोरिया का बात हो रहा है उसका भी कुछ ऐसा ही हाल है,पुलिस विभाग में कुछ ऐसे भी गद्दार हैं जो इसके लिए काम करते हैं और उस गद्दार से यह तो करोड़ों के खेल खेल रहे हैं, पर समाज का नुकसान कितना हो रहा है इसकी शायद किसी को कल्पना नहीं है और कल्पना करें भी तो करें कौन? जिसके घर परिवार में तकलीफ है परेशानी उसकी है ना की इन सटोरियों की और ना ही उसे गद्दार पुलिस वाले जो उनके साथ मिलकर इस कारोबार को बड़े पैमाने पर घोड़े की तरह दौड़ा रहे हैं।
बमफोड़ नाम के व्यक्ति ने सटोरियों का भंडाफोड़ कर दिया
सटोरिया पुलिस को चकमा देने के लिए फर्जी खाता खुलवाकर लेनदेन करते थे ताकि सट्टा का रकम उनसे ज्यादा बरामद न हो सके,इस खाते से उसे खाते से ट्रांजैक्शन होता रहे और उसे पैसे का वह उपभोग कर सके, जिस के लिए उन्होंने एक व्यक्ति को रखा था जिन्हें वह आधार कार्ड व पैन कार्ड चोरी से व्यवस्था करके देता था और उसके माध्यम से जाकर बैंकों में खाता खुलवाया जाता था और उसे खाते के बाद फोन-पे और बाकी माध्यमों से पैसा ट्रांसफर होता रहता था, इससे उनके खाते में लेनदेन कम दिखता था और बाकी खातों में लेन-देन होता रहता था इन्होंने बचने का एक नया तरीका निकाल रखा था, एक साल पहले गिरफ्तारी तो हुई पर इस बात का खुलासा नहीं हुआ,खुलासा तो अचानक अब हुआ जब एक व्यक्ति को पता चला कि उसके नाम से खाता बैंक में है जिस बैंक में उसका खाता खुलवाया ही नहीं तब यह बात का पता चल पाया कि दस्तावेज चोरी से जुगाड़ करके लोगों का खाता खुलवा लेते थे,और उसे खाते का लेनदेन यह खुद करते थे और इस खाते का लेनदेन सिर्फ सट्टे के पैसे के लिए वह होता था। अब इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब आरोपी बम फोड़ पकड़ा गया है।
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