अंबिकापुर,31 मई 2025 (घटती-घटना)। शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्ता पूर्ण बनाने के नाम पर युक्ति-युक्तकरण का खेल अनेक वर्षों से सतत् रुप से चल रहा है। यहां प्रश्न यह उठता है कि जब एक बार युक्ति-युक्त करण हो गया,तो फिर अगले वर्ष युक्ति-युक्तकरण की आवश्यकता क्यों पड़ती है। युक्ति-युक्तकरण पर विराम लगाना है तो इस बिन्दु पर विचार होना आवश्यक है,इस युक्ति-युक्त करण के बार-बार होने के कारण के, जनक कौन है। यदि छात्रों की संख्या घटने का तर्क इसलिये निराधार है कि,जब देश और राज्य की जनसंख्या दिन व दिन बढ़ रही है और शासकीय शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण बनाया जा रहा,तब फिर विद्यालयों में छात्रों की संख्या कम होने का प्रश्न ही नहीं उठता है । इस बिन्दु पर भी विचार किया जाना अत्यंत आवश्यक है कि जब पूर्व वर्षों में अनेकों बार युक्ति-युक्तकरण हो चुका है,तब फिर युक्ति-युक्त करण करने की स्थिति कैसे बनी और किसने बनाई,इसके लिये कौन उत्तरदायी है। क्या कोई शिक्षक स्वयं अपनी पदस्थदगी कर सकता है। उसकी पदस्थगी तो किसी अधिकारी के आदेश पर ही हुई होगी,उस अधिकारी ने शिक्षक की पदस्थगी आदेश उस विद्यालय के लिये क्यों जारी किया जहां नियमानुसार पूर्व संख्या में शिक्षक थे। अतिशेष शिक्षक की पदस्थगी करने वाले और अतिशेष की स्थिति बनाने वाले अधिकारी पर कार्यवाही क्यों नहीं होती है । यदि एक बार उन अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही हो जायेगी,तभी अतिशेष और युक्ति-युक्तकरण पर विराम लगेगा, नहीें तो हर वर्ष शिक्षक अतिशेष होते रहेंगे और हर वर्ष युक्ति-युक्तकरण की स्थिति बनती रहेगी। छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक एफ-2-24/2024/ 20-तीन नवा रायपुर दिनांक 28/04/2025 के अनुसार स्कूलों का और शिक्षकों का युक्ति-युक्तकरण होना है। शासन द्वारा जारी यह आदेश भी अजीबोगरीब है। इस आदेश की कण्डिका क्रमांक सात (1) में अंकित है कि दोनों विद्यालयों के छात्रों की संख्या को जोड़ कर शिक्षक की गणना छात्र अनुपात में की जायेगी। इस आदेश से स्पष्ट है कि शिक्षकों का युक्ति-युक्तकरण का चिन्हांकन की प्रक्रिया विद्यालयों के युक्ति-युक्तकरण के बाद ही होगी। लोक शिक्षक संचालनालय के पत्र क्रमांक/स्था. 02/ युक्ति/ 83/2025/ 290, नवा रायपुर दिनांक 25/04/2025 में अंकित है कि शासन द्वारा युक्ति-युक्तकृत शालाओं का आदेश दिनांक 25/05/2025 तक जारी होगा, और इसी आदेश में यह भी अंकित है कि शिक्षकों के युक्ति-युक्तकरण हेतु अतिशेष शिक्षकों का विकास खण्ड स्तरीय समिति द्वारा चिन्हांकन 15 मई 2025 तक होना है। युक्ति-युक्तकृत दोनों विद्यालयों के छात्रों की संख्या के अनुपात से शिक्षकों की संख्या निर्धारित होना है, विद्यालयों का युक्ति-युक्तकरण आदेश 25/05/2025 को जारी होगा, इस स्थिति में शिक्षकों का अनुपात अनुसार चिन्हांकन 15/05/2025 को कैसे हो सकता है, इतने महत्वपूर्ण विरोधाभाष पर शासन ने ध्यान ही नहीं दिया है। वर्तमान सरकार ने चुनाव के घोषणा पत्र के पृष्ठ क्रमांक 31 में शिक्षा के क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण घोषणायें की थी पहला सरकार बनने पर सन्तावन हजार शिक्षकों की भर्ती होगी, दूसरी बंद स्कूलों को खोला जायेगा, किन्तु वर्तमान में तो इसकी उलट स्थिति बन रही है। यहां अत्यंत महत्वपूर्ण बिन्दु यह भी है कि जब शासन शिक्षा की गुणवत्ता के सुधार पर कार्य कर रही है तो विद्यालयों की संख्या घटा क्यों रही है। शासन को स्कूल समायोजित करने के जगह छात्रों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिये। दूसरी तरफ नये शिक्षकों की नियुक्तियां करनी चाहिये। प्राथमिक विद्यालय में 1 से 5 वीं तक की कक्षायें होती है,वहां प्रधान पाठक और एक शिक्षक कुल दो लोग रहेंगे,छात्र की संख्या अधिक होने पर अनुपात के अनुसार ही शिक्षक रखे जायेंगे। 1 से 5 वीं कक्षाओं में, अलग-अलग विषय और युक्ति-युक्त करण के अनुसार केवल दो शिक्षक ही विद्यालय में रहेंगे, 1 से 5 वीं कक्षाओं के छात्रों को दो शिक्षक कैसे पढ़ा पायेंगे, क्या यही शिक्षा की गुणवत्ता का सुधार है। शिक्षक जगत की मांग है कि शासन द्वारा जारी 2008 का सेटअप ही लागू हो। इसमें प्राथमिक शाला में 12 तथा मिडिल स्कूल में 1 4 का शिक्षकों का प्रावधान था। अब उसे घटा कर 11 कर दिया गया है जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी। विद्यालय में 21 विषय होते हैं, दो शिक्षक 21 विषय कैसे पढ़ा पायेंगे,इस बिन्दु पर विचार किया जाना आवश्यक है। दो शिक्षकों वाली शालाओं में,यदि एक शिक्षक अवकाश में चला गया तो फिर तो शाला स्वयमेव एक शिक्षकीय हो जायेगी। कोई भी राष्ट्र या राज्य स्वास्थ्य और शिक्षा से समझौता नहीं करता, फिर छत्तीसगढ़ में शिक्षा से समझौता क्यों किया जा रहा है। एक और शराब की दुकानें बढ़ाई जा रही है,दूसरी ओर स्कूलों की संख्या कम की जा रही है, स्कूलों की इतनी सर्जरी की आवश्यकता नहीं थी,जितनी शासन द्वारा की जा रही है। शासन के मंत्रियों ने घोषणा की थी,कि बीस से तीस हजार शिक्षकों की भर्ती की जाना है,यदि इतने शिक्षकों की भर्तियां हो जायें और लम्बे समय से लम्बित पड़े प्राचार्य,व्याख्यता,उच्च श्रेणी शिक्षक, शिक्षक के प्रमोशन कर दिये जायें और इन नये भर्ती शिक्षकों को तथा पदोन्नत शिक्षकों को ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ किया जाये तो सभी नवनियुक्त शिक्षक और पदोन्नत शिक्षक खुशी-खुशी ग्रामीण क्षेत्र में चले जायेंगे और अतिशेष की समस्या का स्थायी निदान निकल जायेगा,लेकिन शासन व्यवस्था की और कम तथा बचत की ओर ज्यादा ध्यान दे रही है,इस कारण यह स्थिति बन रही है। किसी भी शासन का दायित्व है कि वह शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे,इस परिप्रेक्ष्य में शासन को शिक्षा विभाग का वजट बढ़ाना चाहिये तथा विद्यालयों में छात्रों की संख्या बढ़ाये जाने पर जोर देना चाहिये। शिक्षकों की नई नियुक्तियां कर शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक विद्यालयों में शिक्षक पदस्थ करना चाहिये। युक्ति-युक्तकरण की स्थिति निर्मित करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही भी किया जाना आवश्यक है,तभी शिक्षा की गुणवता में सुधार संभव होगा,वरना युक्ति-युक्तकरण का यह झुन-झुना,हर साल बजता रहेगा और शिक्षक परेशान होते रहेंगे। शिक्षक जगत युक्ति-युक्त करण को लेकर आन्दोलनरत् है,ट्रेड यूनियन कौंसिल शिक्षकों की मांगों का समर्थन करती है, तथा शासन से अनुरोध करती है कि वर्ष 2008 के सेटअप को लागू किया जाये तथा शिक्षकों की नियुक्तियां की जाये ताकि युक्ति-युक्तकरण की स्थिति ही ना बने। इतिहास साक्षी है कि जब-जब शिक्षकों ने वृहद् आन्दोलन किया है तब-तब सरकारें प्रभावित र्हुइं हैं।
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