‘स्वच्छता अभियान’ और ओडीएफ का तमगा बन गया मज़ाक

प्रतापपुर,11 मई 2025 (घटती-घटना)। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भारत को स्वच्छ और खुले में शौच मुक्त (ह्रष्ठस्न) बनाने की मुहिम को जहां सरकार हर मंच से बढ़ावा दे रही है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। प्रतापपुर नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 4,जो नगर का सबसे प्रमुख और व्यस्ततम क्षेत्र बस स्टैंड में आता है, वहां की हालत इन दावों की पोल खोल रही है।
इस क्षेत्र की मुख्य नाली वर्षों से साफ नहीं हुई है। अब नाली का पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर बहने लगा है, जिससे हर समय कीचड़, गंदगी और बदबू बनी रहती है। स्थानीय दुकानदारों, व्यवसायियों और आवासीय लोगों को दिन-रात इस गंदगी से जूझना पड़ रहा है। नगर पंचायत प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते अब यह क्षेत्र संक्रमण और बीमारियों की चपेट में आने के कगार पर है। वार्डवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायतें कीं, परंतु कोई भी अधिकारी या सफाई कर्मचारी मौके पर नहीं आया।
स्थानीय निवासी बताते हैं, सिर्फ त्यौहारों या ङ्कढ्ढक्क विजि़ट के समय झाड़ू लगती है, लेकिन असली समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं होती। हमारी गली और नाली की दशा देखकर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि ह्रष्ठस्न का दर्जा केवल दिखावे के लिए मिला है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर को ह्रष्ठस्न घोषित कर दिया गया है। ह्रष्ठस्न टीम नियमित रूप से निरीक्षण के नाम पर आती है,कुछ तस्वीरें खींचती है, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करवाती है और बिना वास्तविक निरीक्षण के चली जाती है।
वार्ड क्रमांक 4 की गलियों में नालियों की सफाई पूरी तरह ठप है, कई स्थानों पर नालियां टूटी पड़ी हैं या कचरे से अटी हुई हैं। इस गंदगी से न केवल आमजन त्रस्त हैं, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मच्छरों और दुर्गंध की वजह से बुखार, डेंगू व त्वचा संबंधी रोग फैलने की आशंका बनी हुई है।
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