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सूरजपुर@ आखिर पटवारी किसके लिए रिश्वत लेते हैं अपने अधिकारी के लिए या फिर अपने घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए?

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@ पटवारी पर राजस्व अधिकारियों का नियंत्रण न होना ही उनके रिश्वत मामले में पकडे जाने का परिणाम है?
@ एक बार फिर पटवारी का रिश्वत लेते पकड़े जाना राजस्व विभाग की पोल खोलता है
@ सूरजपुर में पटवारी 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार,राजस्व विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल
-शमरोज खान-
सूरजपुर,04 मई 2025(घटती-घटना)।
क्या राजस्व विभाग का नाम बदलकर रिश्वतखोरी विभाग रख देना चाहिए? क्योंकि यहां पर बिना रिश्वतखोरी के कोई काम होना मुश्किल ही नहीं नमुमकिन है ऐसी शिकायतें एक नहीं हजारों होगी,रिश्वत लेते पकड़ने जाने वाले पटवारीयों की संख्या एक नहीं अब दर्जनों हो चले है,एक बार फिर एक पटवारी 20 हजार का रिश्वत लेते पकड़ा गया अब सवाल यह उठता है कि क्या पटवारी का रिश्वत लेते पकड़ा जाना उनके उच्च अधिकारियों का इनके ऊपर नियंत्रण न होने का परिणाम है? क्योंकि उनके उच्च अधिकारी ही ईमानदारी से इसे काम नहीं करना चाहते या फिर खुद वह इसे रिश्वत की अवैधूली करवाते हैं? यदि उच्च अधिकारी पटवारी पर नियंत्रण बनाए रखने और लोगों का काम बिना रिश्वत करने को कहते तो शायद राजस्व विभाग इतना बदनाम ना होता आज पटवारी रिश्वत लेते पकड़े नहीं जाते? भले ही पटवारी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं पर इस रिश्वत का खेल तो राजस्व के अधिकारियों से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि कर्मचारी ही रिश्वत लेकर उगाही करके अपने अधिकारी को पैसे पहुंचते हैं आखिर क्या एसडीएम और क्या तहसील क्या सभी जगह की स्थिति ऐसी हो चली है?
जिले में सुशासन तिहार के तहत जहां एक ओर प्रशासन जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार की जड़ें इस अभियान की साख को गहरा धक्का पहुंचा रही हैं। गुरुवार को एंटी करप्शन यूरो एसीबी ने डूमरिया में पटवारी भानु प्रताप सोनी को जमीन के नामांतरण और सीमांकन के एवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। यह मामला उजागर होते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। लोगों के बीच आक्रोश है कि जब एक आम नागरिक को अपने वैध कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी पड़े, तो शासन-प्रशासन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो जाते हैं। बहरहाल एसीबी की यह कार्रवाई निश्चित रूप से साहसिक है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस कार्रवाई को मिसाल बनाकर आगे की व्यवस्था में सुधार लाता है या फिर सब कुछ जस का तस चलता रहेगा।
क्या अब भी सुधरेगा सिस्टम?
इस कार्रवाई के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिला प्रशासन इस घटना को एक उदाहरण बनाकर आगे भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाएगा या फिर यह महज एक चार दिन की चांदनी बनकर रह जाएगी। इस घटना ने न सिर्फ सुशासन तिहार की वास्तविकता को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि आम जनता की आवाज़ कितनी बार भ्रष्ट तंत्र में दबा दी जाती है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अब भी कोई ठोस बदलाव आएगा या फिर यह कार्रवाई भी कागजों तक सीमित रह जाएगी।
क्या एसीबी की टीम पटवारी से यह नहीं पूछ सकती कि आखिर इस वक्त किसके लिए ले रहे हो?
इस समय इसी वीक की टीम अच्छा काम कर रही है रिश्वत लेने के कई मामलों में उन्हें सफलता मिली है और रंगे हाथ कई लोग पकड़े गए हैं अभी हाल ही में पटवारी को भी रंगे हाथ पकड़ा गया है पर क्या एसीबी की टीम इन पटवारी से यह नहीं पूछ सकती कि आखिर क्या रिश्वत लेने के लिए आपके अधिकारी आपको को प्रेरित करते हैं या फिर आप खुद अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए प्रेरित हो गए हैं और आम जनों को आप परेशान करने के लिए रिश्वत की मांग करते हैं क्योंकि रिश्वत के तार तो पटवारी के उनके अधिकारियों से भी जुड़े हुए हैं इसलिए एसीबी के टीम को यह भी पता करना चाहिए कि यह पटवारी रिश्वत आखिर किसके लिए लेते हैं क्या उनके अधिकारी ही तो इन्हें रिश्वत लेने के लिए मजबूर नहीं कर रहे? वैसे सूत्रों का कहना है कि जब से सूरजपुर एसडीम बदले हैं तब से पटवारी का रिश्वत लेने के रेट में भी वृद्धि हुई है साथ ही प्रताडि़त करके अब पैसा हुआ वसूल रहे हैं।
यह है पूरा मामला
एक स्थानीय रहवासी अपनी जमीन के नामांतरण और सीमांकन को लेकर कई दिनों से पटवारी के चक्कर काट रहा था। बार-बार टालमटोल करने के बाद पटवारी ने आखिरकार उससे 20 हजार रुपए की मांग की। परेशान व्यवसायी ने यह बात सीधे एसीबी को बताई। शिकायत मिलते ही एसीबी ने योजना के तहत जाल बिछाया। जैसे ही पीडि़त ने तय राशि पटवारी को उसके कार्यालय में सौंपी, टीम ने मौके पर दबिश देकर उसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। उसके पास से रिश्वत की रकम भी बरामद हुई। गिरफ्तारी के बाद पटवारी कार्यालय से लेकर जिला मुख्यालय तक हड़कंप मच गया।
सूरजपुर एसडीम के बदलते ही कामों के रेट हुए तय:सूत्र
यदि अधिकारी ईमानदार हो तो कर्मचारी भी झक मार के ईमानदारी से काम करेगा पर अधिकारी ही ईमानदार नहीं हो पा रहे जिस वजह से कर्मचारी सबसे बड़े बेईमान होते जा रहे हैं, रिश्वतखोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं हराम की कमाई करना अब इनकी आदत होती जा रही है वेतन उनके लिए अब न छूने जैसी हो गई है, हराम की कमाई ही पूरी ज़रूरतें पूरा कर रही है, सूरजपुर एसडीम को बदले 6 महीने लगभग होने को है पर नए एसडीम के आते ही पूरा सिस्टम ध्वस्त हो गया है, रिश्वतखोरी के मामले बढ़ गए हैं एसडीएम कार्यालय में यदि किसी को कम पड़ रहा है तो बिना रिश्वत के होना मुश्किल है कार्यालय से लेकर पटवारी तक रिश्वत की मांग हो रही है पर अधिकारी इससे अनजान कैसे हैं? यह तो अनपच बात है। यदि अधिकारी भी ईमानदार होते तो शायद रिश्वत लेने की हिम्मत कर्मचारियों में नहीं होती पर कर्मचारियों का रिश्वत लेना ही अधिकारी के बेईमान होने की पहचान है।
क्या सूरजपुर एसडीम ऑफिस बना उगाही का अड्डा?
अब आप सोच रहे होंगे कि यह सवाल क्यों हो रहा है तो यह सवाल इसलिए हो रहा है क्योंकि इस समय एसडीएम कार्यालय आने वाले लोगों की जुबान पर उगाही व रिश्वत की बात सुनाई देती है, एसडीएम कार्यालय में आए एक व्यक्ति ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि डायवर्सन करवाने के लिए देना पड़ता है मोटी रकम बिना पैसा का नहीं होता है कोई काम? नव पदस्थ एसडीएम शिवानी जयसवाल के प्रभार संभालने के बाद ऑफिस का सारा सिस्टम हुआ फेल,बिना लेनदेन के नहीं होता है कोई काम,पहले होती है रेट तय, भू-माफिया सहित सााधारी नेताओ का होता है तुरंत काम,गरीब तपके के लोग न्याय पाने रोजाना लगते हैं चक्कर कार्यालय का?


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