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कोरिया/सोनहत@क्या वन विभाग के अधिकारियों ने तस्करों को दे रखी है खुली छूट?

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  • कोरिया के देवगढ़ वन परिक्षेत्र एवं मनेन्द्रगढ़ वन मंडल में अंधाधुंध अवैध कोल तस्करी
  • वन विभाग गहरी नींद में या फिर जानबूझ कर अनजान बन दी मौन स्वीकृति
  • सोनहत विकासखंड के वन क्षेत्रों में दर्जनों अवैध खदानें संचालित


-राजन पाण्डेय-
कोरिया/सोनहत, 29 अप्रैल 2025 (घटती-घटना)। कोरिया वन मंडल एवं सोनहत विकासखंड सोनहत अंतर्गत वन क्षेत्रों में जंगलों के अंदर कोयले की अवैध रूप से कई खदानें संचालित है जहां सुरंग बना कर कोयला उत्खनन का कार्य जारी है। सूत्रों की माने तो सोनहत विकासखंड के देवगढ़ वन परिक्षेत्र अंतर्गत सिंहपानी, रावतसरई, दमुज, सुंदरपुर तर्रा,बसेर अकलासरई क्षेत्र शामिल है इसमें से तर्रा बसेर के जंगलों में कुछ ऐसे स्थान भी है जो मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल अंतर्गत आते हैं । वही सूत्र बताते है कि अकलासरई के आगे के कुछ स्थान भी मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल अंतर्गत ही आते हैं। मनेन्द्रगढ़ वनमण्डल अंतर्गत बनिया नदी का इलाका भी अवैध कोल तस्करी से अछूता नही है यहां भी कोल तस्करी की खबरें सूत्रों के हवाले से आ रही हैं ।
भाजपा जिलाध्यक्ष के अभियान के बाद कुछ स्थानों पर हुआ बन्द
भाजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र तिवारी के द्वारा जंगलों एवं अन्य जगह की अवैध खदानों से कोल तस्करी एवं परिवहन बन्द कराने का अभियान क्षेड़ने के बाद सोनहत के पथरगवा रावतसरई, बेलार्ड,जबकि बैकुंठपुर लॉक के अंगा और आसपास के क्षेत्र से अवैध कोल तस्करी लगभग बन्द है लेकिन तर्रा बसेर बनिया नदी और आसपास के क्षेत्र में कोयला तस्करी अभी भी चालू है, जिलाध्यक्ष के अभियान के बाद कोल तस्कर परेशान तो हैं लेकिन उनके द्वारा अब अपना जगह बदल कर कार्य करने की तैयारी की जा रही है जिससे जिलाध्यक्ष को उसकी भनक न लगे।
क्या कोयला तस्करी बन्द कराने की जिम्मेदारी सिर्फ जिलाध्यक्ष की?
कोयला तस्करी का काम लंबे समय से जारी है,ऐसे में वन विभाग के ऊपर भी कई प्रकार के गम्भीर सवाल खड़े होने लगे हैं आखिर इतने दिनों से वन विभाग कर क्या रहा था? क्या देवगढ़ वन परिक्षेत्र और कोरिया वन मण्डल कुंभकर्णी नींद सो रहा है?,क्या वन विभाग देवगढ़ के अधिकारियों को इसकी जानकारी पहले से थी, यदि थी तो विभाग मौन क्यों था,और यदि जानकारी नही थी तो सम्बंधित क्षेत्र के फारेस्ट गार्ड अभी तक क्या कर थे कि उन्हें पता तक नही चल पाया। बहरहाल जो भी हो पर वन विभाग देवगढ़ वन परिक्षेत्र के ऊपर कई प्रकार के गम्भीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वर्तमान में जिलाध्यक्ष के अभियान के बाद भी विभाग अभी तक इन अवैध खदानों और सुरंगों की सुध लेने की फुर्सत नही है
मनेन्द्रगढ़ वनमंडल में भी अवैध सुरंगे
मनेन्द्रगढ़ मण्डल के बनिया नदी आस पास के क्षेत्रों में भी अवैध रूप से कॉल तस्करी की जानकारी सूत्रों से मिली है, यहां भी यही सवाल खड़े होते हैं कि क्या कोरिया की तरह मनेन्द्रगढ़ वनमंडल भी कुंभकर्णी नींद सो रहा है या फिर यहां भी कोई बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है।
वन मण्डलाधिकारी से मिल कर बन्द कराएंगे अवैध खदानें: देवेंद्र
भजपा जिलाध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने बताया कि वन क्षेत्र की जिन जिन जगहों पर अवैध सुरंग/खदानों की जानकारी मिली थी वहां पर अवैध सुरंगों व खदानों को बन्द करा दिया गया है और जिन जगहों की जानकारी मिलेगी सभी जगहों को बन्द कराया जाएगा वनमण्डलाधिकारी से मुलाकात कर वन क्षेत्रों में इसके लिए विषेश अभियान चला कर कार्य किया जाएगा । और जिन लोगो के इन कार्यो में संलिप्तता पाई जाएगी उन्हें बक्शा नही जाएगा फिर चाहे वो रसूखदार हो या कोई सिंडिकेट हो सभी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाएगी
कोयला के साथ साथ ये मौत की भी सुरेंगे हैं पूर्व में हो चुकी है मौतें
जिला अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने कहा कि ये सिर्फ कोयला नही मौत की भी सुरंगे हैं जिनका इस्तेमाल अवैध कोयले के अंतरराज्जीय गिरोह के लोग अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और गरीब मजदूरों को मौत के मुंह मे डालने का प्रयास कर रहे हैं। तिवारी ने बताया कि इससे पहले भी इन अवैध खदानों/सुरंगों में लोगो की मौत हो चुकी है, इस लिए इन सुरंगों के मुहानों को ही पूरी तरह बन्द कराने की कोशिस की जा रही है।


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