@छत्तीसगढ रेट कंट्रोल ट्रब्यूनल ने खारिज की मांग
-रवि सिंह-
बैकुंठपुर 01 सितम्बर 2024(घटती-घटना)। तत्कालीन डीपीएम प्रिंस जायसवाल द्वारा न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी के पंजीयन पर नर्सिग कॉलेज का संचालन उनकी पत्नी को संचालक बना कर करवाया जा रहा है। जिस संकरे भवन में यह कॉलेज संचालित है उस पर विवाद हो रहा है, मामला छत्तीसगढ रेट कंट्रोल ट्रब्यूनल पहुंचा जहां न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी को अपना मामला वापस लेकर पीछे हटना पड़ा, अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी का रजिस्ट्रेशन रद्द हो सकता है।
दरअसल, बीते दो वर्ष तत्कालीन कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के राज में प्रिंस जायसवाल और तत्कालीन सीएमएचओ डॉ आरएस सेंगर ने खूब मौज काटी, एक तरह से दोनो जिले के सर्वे-सर्वा बने हुए थे। जिले के सभी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर इनका रौब देखते ही बनता था, वर्तमान में न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी के द्वारा जिस भवन में नर्सिग कॉलेज संचालित है वो भवन वरिष्ठ चिकित्सक और भाजपा नेता डॉ राकेश शर्मा का निजी भवन है। श्री शर्मा ने नर्सिग कॉलेज का भवन जो बैकुंठपुर के मुख्य मार्ग पर स्थित है, उन्होनें न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी को भवन को खाली करने का नोटिस दिया। उनके भवन का नर्सिग कॉलेज के साथ किसी भी प्रकार कोई एग्रीमेंट तक नहीं किया गया है। इस भवन को लेकर जब उन्होनें प्रिंस जायसवाल से उसे खाली करने का निवेदन किया तो वो तत्कालीन एसडीएम अंकिता सोम के पास पहुंच गया, यह सर्वविदित है कि उन दिनों तत्कालीन एसडीएम श्रीमती सोम का जलवा देखते ही बनता था, जिले के लोग उन्हें सुपर कलेक्टर तक कहा करते थे, बस इसी का फायदा उठाते हुए तत्कालीन डीपीएम ने एसडीएम बैकुंठपुर से डॉ राकेश शर्मा को एक नोटिस जारी करवा कर लोंक निर्माण विभाग को भेजा गया ताकि भवन ना खाली कर भाड़ा देकर कॉलेज को वहीं संचालित रहने दिया जाए। लोक निर्माण विभाग ने अपना कदम वापस खींच लिया कि वो किसी की निजी संपत्ति पर कुछ नहीं कर सकते, जिसके बाद एसडीएम को मामला खारिज करना पड़ा, एसडीएम बैकुठपुर के मामले को खारिज करने को लेकर प्रिंस जायसवाल 11 सितंबर 2023 को छत्तीसगढ़ रेट कंट्रोल ट्रब्यूनल पहुंच गया ताकि नर्सिग कॉलेज को खाली नहीं करवाया जा सके। वहीं हाल ही में 7 अगस्त 2024 को छत्तीसगढ़ रेट कंट्रोल ट्रब्यूनल ने मामला खारिज करते कहा कि धारा 13 छग भाड़ा नियंत्रण अधिनियम 2011 के तहत इस न्यायालय को सिर्फ भाड़ा नियंत्रण के आदेश के विरूद्ध अपील सुनने का अधिकार है। यह कहते हुए न्यू लाइफ नर्सिग हेल्थ एंड एज्यूकेशन सोसायटी का मामला निरस्त कर दिया गया। अब यह मामला बैकुंठपुर के माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।
नर्सिग कॉलेज पर तत्कालीन कलेक्टर की कृपा
आपको बता दे कि उक्त नर्सिग कॉलेज पर तत्कालीन कलेक्टर की विशेष कृपा बरसती रही, क्योंकि नर्सिग कॉलेज का अपना निजी अस्पताल बेहद जरूरी होता है, और ये नर्सिग कॉलेज सिर्फ सरकारी अस्पतालों पर ही निर्भर है, केवल नाम पर नर्सिग कालेज है जबकि पूरा प्रशिक्षण का जिम्मा सरकारी अस्पतालों में भेज कर खानापूर्ति की जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता व पार्षद संजय जायवाल द्वारा नर्सिग कॉलेज की शिकायत की गई और जिसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से जांच टीम भी आई, दर्जनों खामियां भी निकली, जांच समिति ने अपना अभिमत देते हुए जांच प्रतिवेदन मे साफ कहा था कि निरीक्षण के पश्चात न्यू लाइफ इंस्टीट्यूट आफ बैकुंठपुर आईएनसी अनुरूप अधोसंरचना शैक्षणिक स्टॉफ व उपकरणों की कमी पाई गई। यह भी लिखा कि शिकायत की बिन्दु 6 संबंधित जानकारी आईएनसी के नियमों में उल्लेखित नहीं है। यह सत्य है कि उक्त संस्था की समिति में वंदना जायसवाल सचिव के पद पर और प्रिंस जायसवाल सदस्य के रूप में मनोनीत है। परन्तु तत्कालीन कोरिया कलेक्टर श्रीमान लंगेह की कृपा से सब कुछ बेहतर बना रहा।
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