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बिलासपुर@पत्नी की हत्या के दोषी पति को उम्रकैद…ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था,हाईकोर्ट ने पलटा फैसला,सास-ससुर समेत 4 को राहत

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बिलासपुर,04 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए आरोपी पति दीपनारायण रजक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उसे एक महीने के भीतर अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में पति समेत ससुराल पक्ष के आरोपियों को बरी कर दिया था। हालांकि,हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में महिला की सास, ससुर, चाचा ससुर और चाची सास को मिली राहत बरकरार रखी। मामला बिलासपुर के महमंद निवासी मनहरणलाल निर्मलकर की बेटी ममता से जुड़ा है। दरअसल,ममता की शादी चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम परसदा निवासी दीप नारायण रजक से हुई थी। शादी के दो साल के भीतर ही ममता की ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच के दौरान पुलिस और तहसीलदार को कमरा अंदर से बंद मिला था। शव छत के पंखे से साड़ी के सहारे लटका हुआ था। पहली नजर में मामला आत्महत्या का लगा,लेकिन घटना के समय घर में केवल पति-पत्नी मौजूद थे,जिससे पति पर संदेह बना रहा। तत्कालीन तहसीलदार एमआर गायकवाड़ ने मौके की गहन जांच की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि : इससे स्पष्ट हुआ कि कोई भी व्यक्ति बाहर से दरवाजा इस तरह बंद कर सकता था कि कमरा अंदर से बंद होने का आभास हो। पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. एआर बंजारे ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि ममता की मौत फांसी से नहीं हुई थी। मौत का कारण दम घुटना और गला घोंटना पाया गया। ममता के चेहरे,आंख,भौंह और दोनों हाथों पर चोट के निशान मिले थे। ये संकेत दे रहे थे कि मौत से पहले उसके साथ मारपीट हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार ऐसी चोटें नहीं लग सकती थीं।
पति की चुप्पी बनी अहम सबूत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घटना के समय घर में केवल पति और पत्नी मौजूद थे। ऐसे में पत्नी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका संतोषजनक जवाब आरोपी पति नहीं दे सका। केवल इस आधार पर कि पहले कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई थी, पति की क्रूरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दरवाजे की हकीकत ने खोली साजिश की परत
जांच में सामने आया कि ममता की गला दबाकर हत्या की गई थी। बाद में शव को आत्महत्या का रूप देने के लिए पंखे से लटका दिया गया। जांच के दौरान तहसीलदार ने यह भी परखा कि कमरे का दरवाजा वास्तव में अंदर से बंद था या नहीं। उन्होंने बाहर से धक्का देकर दरवाजा खोला,जो आसानी से खुल गया।


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