@ क्या अखबार में छप रही कमियों को रोकने केवल छत्तीसगढ़ सरकार ने खेला बड़ा दांव?
@ शासन के तुगलकी फरमान के विरोध में दैनिक घटती-घटना अखबार का कलम बंद अभियान के हुए 22 दिन पूरे…
@ क्या छापें माननीय मुख्यमंत्री जी…क्या छापें स्वास्थ्य मंत्री जी…क्यां छापें आयुक्त सहसंचालक आईपीएस मयंक श्रीवास्तव जी…?

-रवि सिंह-
अम्बिकापुर,21 जुलाई 2024 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय के आयुक्त सह संचालक मयंक श्रीवास्तव ने मौखिक आदेश देते हुए सरगुजा अंचल से प्रकाशित दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र के शासकीय विज्ञापनों पर पूरी तरह से रोक लगा दिया और ऐसा स्वास्थ्य मंत्री की अनुशंसा से मुख्यमंत्री के आदेश पर किया गया है ऐसा सूत्रों का दावा है।
बता दें कि दैनिक घटती-घटना लगातार सरकार की खासकर स्वास्थ्य विभाग की कमियों को उजागर कर रहा था जो कोरिया जिले सहित सूरजपुर जिले की स्वास्थ्य विभाग की कमियां थीं। वहीं स्वास्थ्य मंत्री के यहां संलग्न राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को लेकर थी जिनका दिव्यांग प्रमाण-पत्र ही फर्जी बताया जा रहा है जिसके आधार पर वह नौकरी प्राप्त कर सके हैं। कोरिया जिले के स्वास्थ्य विभाग के पूर्व डीपीएम जो वर्तमान में सूरजपुर जिले में प्रभारी डीपीएम बतौर सेवा दे रहे हैं उनकी ही कमियां और उनके भ्रष्टाचार को लेकर दैनिक घटती-घटना समाचार-पत्र ज्यादा हाशिए पर है । स्वास्थ्य मंत्री के और मुख्यमंत्री के क्योंकि प्रभारी डीपीएम खुद को स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा बताते हैं और वह इस आधार पर भ्रष्टाचार को अपना अधिकार समझते हैं। बता दें की कांग्रेस शासनकाल से आज तक के कार्यकाल की यदि सूरजपुर के प्रभारी डीपीएम की जांच की जाए तो इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होगा जिसे देखकर सुनकर सभी अचंभित हो जायेंगे क्योंकि कोरोना वैश्विक महामारी काल में भी कोरिया का प्रभारी डीपीएम रहते हुए तथाकथित स्वास्थ्य मंत्री के भतीजे आपदा को अवसर में बदलकर काफी भ्रष्टाचार किए थे जिसकी जांच की मांग भी हुई थी जो लंबित है। वहीं उनका अपना एक नर्सिंग कॉलेज भी है जो बिना अनिवार्य सुविधा व्यवस्था के संचालित है जिसकी भी शिकायत हुई है। उनकी खुद की डिग्री फर्जी है इसकी भी शिकायत हुई है लेकिन सभी जांच कार्यवाही इसलिए लंबित है क्योंकि वह खुद को वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री का भतीजा बताकर बच निकल रहा है और कहीं न कहीं उसे संरक्षण भी मिल रहा है । प्रशासन-शासन का वैसे समाचार पत्र घटती-घटना में स्वास्थ्य विभाग की कमियों से लेकर मंत्री के साथ चल रहे विवादित स्टॉफ, दलालों के बारे में लगातार खबरे आ रही थीं जिसके बाद मंत्री ने आवाज दबाने के लिए विभागीय विज्ञापनों पर जनसंपर्क से रोक लगवा दिया है जिसे तुगलकी फरमान ही समझा जा रहा है। इसके विरोध में पिछले 2२ दिन से पूरा अखबार कलम बंद छप रहा है और अखबार का कलम बंद अभियान जारी है और प्रतिदिन यही पूछा जा रहा है कि मुख्यमंत्री जी, स्वास्थ्य मंत्री जी और जनसंपर्क के संचालक मयंक श्रीवास्तव जी, आखिर क्या छापें अखबार में कि आप लोगों का दबाव न हो और आप खुश रहें।आप ही बता दीजिए पर पिछले 2२ दिन में इसका जवाब दे पाने में सभी नाकाम दिखे वहीं जहां इस अभियान की लोग सराहना कर रहे हैं और सरकार की छवि धूमिल हो रही है पर सरकार अपने रवैया पर चिंता करने को तैयार नहीं है। आखिर शासकीय अनुदान राशि का विज्ञापन क्यों रोका गया इसका जवाब आज तक जिम्मेदार नहीं दे पाए हैं?
कलम हमेशा स्वतंत्र रहे…
ज्ञात हो कि तुगलकी फरमान के विरूद्ध कलमबंद अभियान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के विभाग जनसंपर्क के द्वारा स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के विभाग के संबंधित समाचारों के प्रकाशन पर जनसंपर्क संचनालय के आयुक्त सह संचालक आईपीएस श्री मयंक श्रीवास्तव के मौखिक आदेश पर घटती-घटना के शासकीय विज्ञापन पर रोक लगाकर दबाव बनाने से लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के मूलभूत हक पर कुठाराघात के विरूद्ध कलमबंद अभियान सिर्फ इस वजह से चलाया जा रहा है ताकि कलम पर प्रतिबंध न लगे। कलम हमेशा स्वतंत्र रहे पर इसकी स्वतंत्रता पर ही नियंत्रण करने का प्रयास वर्तमान सरकार कर रही है जो कहीं ना कहीं कलम पर कुठाराघात माना जाएगा।
पत्रकारों की सुरक्षा
पत्रकारों को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से काम करने की सुरक्षा कब दी जाएगी ताकि वे बिना किसी डर के समाज के लिए सच्चाई उजागर कर सकें? छत्तीसगढ़ शासन से निवेदन है कि वे इस मुद्दे पर संज्ञान लें और उचित कार्रवाई करें, ताकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मजबूत और स्वतंत्र बना रहे।
जांच की मांग
क्या आप तत्काल एक निष्पक्ष जांच समिति बैठा सकते हैं जो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रिंस जायसवाल पर लगे आरोपों की जांच करे और सच्चाई सामने लाए?
स्वास्थ्य मंत्री से सवाल
आपके पास स्वास्थ्य विभाग के तहत भ्रष्टाचार के आरोपों के प्रमाण होने के बावजूद इस मामले पर कोई संज्ञान क्यों नहीं लिया गया है?
छत्तीसगढ़ शासन से सोशल मीडिया के माध्यम से निष्पक्ष सवाल पूछने लगे हैं लोग
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया निष्पक्ष और स्वतंत्र होना चाहिए,परंतु वर्तमान में न्याय के लिए पत्रकारों को कलम बंद आंदोलन करना पड़ रहा है। यह अत्यंत विडंबना की बात है कि जब एक पत्रकार भ्रष्टाचार के प्रमाण सहित खबर प्रस्तुत करता है, तो शासन और स्वास्थ्य मंत्री इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते। अब सरकार से लोग सोशल मीडिया पर स्वतंत्र सवाल पूछ रहे हैं और वह जानना चाह रहे हैं कि क्या सच लिखने पर सरकार की कमियां दिखाने पर या भ्रष्टाचार उजागर करने पर कलम बंद करने का ही दबाव सरकार डालेगी सभी पर।
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