बेंगलुरु, 27 मार्च 2023 (ए)। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक पंचायत के पूर्व कार्यकारी अधिकारी के खिलाफ 24 आपराधिक मामलों में एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द कर दिया है क्योंकि इनमें से किसी भी मामले में सक्षम प्राधिकार द्वारा मंजूरी नहीं ली गई थी।
इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने प्राधिकारों को निर्देश दिया कि सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के लिए किए गए अनुरोधों पर वे छह महीने के अंदर फैसला करें। उच्च न्यायालय ने कहा, संबंधित सक्षम प्राधिकारियों द्वारा निर्णय नहीं लेने पर उत्पन्न होने वाली इस तरह की मुकदमेबाजी के मद्देनजरज् मुझे यह उचित लगता है कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी जांच एजेंसी के अनुरोध पर छह महीने की अधिकतम सीमा के साथ फैसला करेंगे, क्योंकि केवल मंजूरी के अभाव में, भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामले में भी कार्यवाही रद्द कर दी जाती है।
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