बीजेपी विधायकों में ‘गुटबाजी’ खत्म कर हिमंत सरमा बनेंगे संकटमोचक
अगरतला,05 मार्च 2023 (ए)। त्रिपुरा में नए सीएम ने नाम को लेकर पेंच फंसता दिख रहा है। सीएम को लेकर विधायकों में कोई आम सहमति बनती नहीं दिख रही है। इसी के चलते पूर्वोत्तर में भाजपा के संकटमोचक कहे जाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा को पार्टी की स्थानीय इकाई के भीतर ‘‘गुटबाजी’’ खत्म करने के लिए त्रिपुरा भेजा गया है। सरमा मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मत उम्मीदवार की राह तय कर सकते हैं।
विधायकों की होगी बैठक
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, माना जा रहा है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री माणिक साहा को एक वर्ग पसंद कर रहा है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब के समर्थक भी शामिल हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधायक दल के नेता का चयन करने के लिए नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की एक बैठक होगी, लेकिन तारीख अभी तय नहीं हुई है।
केंद्रीय नेतृत्व की पसंद हैं साहा
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि साहा संभवतः केंद्रीय नेतृत्व की पसंद हैं क्योंकि वह गैर-विवादास्पद साबित हुए हैं और उनसे उम्मीद है कि वे आदिवासी क्षेत्रों को शांत रखने के लिए आवश्यक उपचार प्रदान करेंगे, जिन्होंने अपनी ग्रेटर तिप्रालैंड राज्य की मांग पर टिपरा मोथा के लिए बड़े पैमाने पर मतदान किया है।
देब की जगह पिछले साल 14 मार्च को जब साहा को मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब मंत्री राम प्रसाद पॉल के नेतृत्व में भाजपा विधायकों के एक समूह ने पार्टी विधायकों की एक बैठक के दौरान नाराजगी व्यक्त की थी।
भौमिक बन सकते हैं उप मुख्यमंत्री
राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार शेखर दत्ता ने कहा कि समझौते के तहत भौमिक को उप मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, यह समझना होगा कि भाजपा ने साहा के नेतृत्व में कठिन परिस्थितियों में चुनाव लड़ा और जीता। यहां तक कि केंद्रीय गृह मंत्री ने भी अपने प्रचार अभियान के दौरान साहा को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किया था।
भाजपा ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 32 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि उसकी सहयोगी आईपीएफटी को एक सीट मिली है। मतदान 16 फरवरी को हुआ था और परिणाम 2 मार्च को घोषित किए गए थे।
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