- आखिर कौन है भंवरलाल जिसके वाहनों को वन विभाग दे रहा था संरक्षण,जिनसे होता है विभाग का काम?
- भंवरलाल की यदि हो पड़ताल,खुल सकते हैं बैकुंठपुर वन विभाग के कई राज।
- भंवरलाल वन विभाग बैकुंठपुर के अधिकारी पर और अधिकारी भंवरलाल पर क्यों हैं मेहरबान।

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 09 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के वन विभाग में भंवरलाल नाम काफी प्रचलित हो चुका है और इसी पर और भंवरलाल के मशीनों और वाहनों को लेकर जो वन विभाग में उपयोग होती हैं और कुछ चार पहिया वाहनों में वन विभाग के एक अधिकारी व उनके रिश्तेदार सवारी करते हैं और वह वन विभाग परिसर में ही खड़ी रहती हैं और उनकी देखभाल वन विभाग ही करता है को लेकर घटती घटना में समाचार प्रकाशन के बाद वन विभाग परिसर से मशीनों व वाहनों को हटा दिया गया है। भंवरलाल कौन है और उसका वन विभाग कोरिया में किस प्रकार नाम प्रयोग होता है उसके वाहनों मशीनों का किस प्रकार एक अधिकारी उपयोग करते हैं यह बात सामने आते ही मशीनों को हटाया गया जो अब वन विभाग परिसर में नहीं है देखा जा सकता है।
अब सवाल उठता है आखिर कौन है भंवरलाल जिसके मशीनों का वन विभाग में उपयोग होता है और जिसकी कई चार पहिया वाहनों में वन विभाग के एक अधिकारी व उनके रिश्तेदार सवारी करते हैं। सूत्रों की माने तो यह सभी वाहन और मशीन वन विभाग के एक अधिकारी की ही हैं और वह केवल नाममात्र के लिए ही भंवरलाल की हैं बाकी उसका पूरा देखरेख व उपयोग उक्त अधिकारी ही करते हैं। वन विभाग के जिस अधिकारी की यह मशीनें और वाहन हैं वह कोरिया जिले के नामी अधिकारी हैं और वह भंवरलाल के नाम पर पूरे जिले सहित संभाग के भी कई जिलों में इन वाहनों व मशीनों का विभाग के ही कामो में उपयोग करते हैं कुल मिलाकर किराया लेते हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि भंवरलाल से यदि पूछताछ हो तो कई चौकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, भंवरलाल कौन है यह भले ही कोई न जाने लेकिन भंवरलाल वन विभाग बैकुंठपुर का जाना माना नाम है। भंवरलाल से पूछताछ में पता चल सकता है कि उक्त मशीनें और कई चार पहिया वाहन किसकी हैं और यदि उसकी हैं तो देखरेख वन विभाग के अधिकारी क्यों करते हैं। सूत्रों ने यह भी बताया कि उक्त अधिकारी आय से अधिक संपत्ति मामले से खुद को बचाने के लिए भंवरलाल के नाम का उपयोग करते हैं और पूरे विभागीय कार्यो में भंवरलाल सहित कई अन्य का नाम उपयोग कर ठेकेदारी करते हैं। उक्त अधिकारी ने बहोत ही कम समय मे या यह कहें विगत 10 वर्षों में ही कई करोडों की जमीन खरीदी है और यह केवल वेतन के भरोसे संभव नहीं है। पटना सहित चम्पाझर डकईपारा बैकुंठपुर अम्बिकापुर रायपुर सहित कई जगहों पर उक्त वन विभाग के अधिकारी ने जमीनें और घर खरीदे हैं और अभी भी लगातार वह जमीन खरद ही रहें हैं। उक्त अधिकारी को लेकर जिले के आला अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी मौन रहते हैं बताया जाता है वह सभी को संतुष्ट करने में माहिर बजी हैं। उक्त अधिकारी की राजधानी तक ऐसी पहुंच है कि उनसे जिले के आला अधिकारी व जनप्रतिनिधि भी खौफ खाते हैं। सतर्कता विभाग आयकर विभाग भी इनके आगे नतमस्तक है क्योंकि लगातार सुर्खियों में रहने के बाद भी इनकी संम्पतियों को लेकर कोई जांच या कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई है। यह एक ही जिले में लगातार सेवा दे रहें हैं और इनका तबादला कर पाने में भी विभाग नाकाम रहा है क्योंकि बताया जाता है सभी को संतुष्ट रखने के कारण इनकी तरफ कोई आंख टेढ़ा नहीं करता।
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