नई दिल्ली 13 जुलाई 2022। काग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने केद्र की भाजपा सरकार पर मुद्रास्फीति और महगाई की दर को लेकर हमला बोलते हुए कहा कि 7 अक प्रधानमत्री नरेद्र मोदी के साथ चिपका हुआ है । गौरव ने कहा कि मुद्रास्फीति और महगाई की दर जिसकी कल घोषणा हुई है वह 7.01 प्रतिशत है। गौरव ने कहा कि अगर हम बात करे बेरोजगारी की दर सीएमआईई ने निकाली है वह 7.8 प्रतिशत है। गौरव वल्लभ ने कहा कि अगर हम बात करे 1 जनवरी से लेकर अब तक रुपए मे कितने ह्राश हुआ है और कितना डेप्रिशियेट हुआ, तो वो 7 प्रतिशत। एक जमाना था हमारे साथ भी 7 का अक चिपका था 2004 से 2014, पर हमने उसको चिपकाया था जीडीपी की विकास दर मे। हमारी जो एवरेज ग्रोथ रेट है 2004 से 2014, वो 7 प्रतिशत से ज्यादा रही थी। हमने भी 7 को लिया था, पर वो लिया था हमने देश की जीडीपी विकास दर मे, महगाई की दर मे नही, रुपए के हाश मे नही, बेरोजगारी की दर मे नही।गौरव बल्लव ने कहा कि कल जो महगाई दर के आकड़े घोषित हुए, उसके बाद ये प्रतीत होता है कि जैसे-जैसे महगाई की दर इकॉनोमी मे बढ़ती जा रही है, वैसे के वैसे मोदी सरकार की योग्यता है। जबकि महगाई की दर से देश को निजात दिलाने की बात हो, बेरोजगारी की दर कम करने की बात हो, गिरते हुए रुपए को रोकने की बात हो, वहाँ पर वो मौन बैठी हुई नजर आ रही है। गौरव बल्लव ने कहा कि देश ने पिछले महीने जून, 2022 मे बेरोजगारी की दर देश मे 7.8 प्रतिशत थी और 25 लाख लोगो ने अपनी नौकरी सिर्फ जून, 2022 मे खोई है। ये मै नही कह रहा, ये सीएमआईई का आकड़ा है कि 25 लाख लोगो ने सिर्फ एक माह मे अपनी नौकरी खोई है। जब नौकरी खो रही है, लोगो की लगातार नौकरी जा रही है, उसमे आग मे घी का काम कर रहा है लगातार बढ़ती हुई महगाई की दर। महगाई की दर लगातार पिछले 33 महीनो से अगर मै बात करु तो रिजर्व बैक का जो मेन टारगेट है, 4 प्रतिशत उससे ज्यादा है और पिछले 6 महीने से महगाई की दर रिजर्व बैक की जो अपर लिमिट है 6 प्रतिशत उससे लगातार ज्यादा चल रही है।गौरव बल्लभ ने कहा कि जब रुपया डेप्रिशियेट करता है 7 प्रतिशत पिछले 6 महीने मे, रिटेल इन्फ्लेशन लगातार 7 प्रतिशत से ज्यादा बना हुआ है। अप्रैल मे, मई मे, जून मे लगातार 7 प्रतिशत से ज्यादा बना हुआ और बेरोजगारी की दर लगातार 7 प्रतिशत से ज्यादा और बढ़ती जा रही है महीने दर महीने और ये सारे जो डेटा प्वाइट है।एक और रोचक तथ्य आपको बताना चाहता हू। जब महगाई का आकड़ा आया कल, 7.01 प्रतिशत रिटेल महगाई का, मुझे उम्मीद थी कि देश की विा मत्री इसके बारे मे कोई टिप्पणी करेगी। पर उन्होने महगाई के आकड़ो को जारी होने के बाद 7 ट्वीट किए और सारे ट्वीट उन्होने नासा के फोटो बताए देश को कि नासा मे जो तारे है, सौरमडल है, हवाए है, वो कैसी चल रही है दूसरे ब्रह्माड के दूसरे तारो पर, दूसरे ग्रहो पर। विा मत्री जी अच्छी बात है आपको ब्रह्माड के दूसरे ग्रहो मे आपको इटरेस्ट है, अच्छा लगा ये सुनकर, पर हिदुस्तान मे आपका इटरेस्ट क्यो नही है? आपका और आपकी सरकार का क्या प्रपोजल है, क्या एक्शन प्वाइट है कि हम जो 7 प्रतिशत इन्फ्लेशन है, इससे बाहर आ सके? लगातार गिरते हुए रुपए को डॉलर के मुकाबले रोक सके, बेरोजगारी की दर जो 7.8 प्रतिशत पर है, उसको हम नीचे ला सके, इसके बारे मे क्या एक्शन प्वाइट है? गौरव वल्लभ ने कहा कि सीपीआई का डेटा रिलीज किया सरकार ने, उसमे रिटेल इन्फ्लेशन 7.01 प्रतिशत रहा और अगर हम अप्रैल, मई और जून इन तीन महीनो का एवरेज देखे, तो देश मे इन्फ्लेशन 7.3 प्रतिशत है। रुरल इन्फ्लेशन जो हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था है ग्रामीण क्षेत्रो मे जो इन्फ्लेशन है, वो देश के एवरेज से ज्यादा है। देश का एवरेज इन्फ्लेशन है 7.01 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रो मे इन्फ्लेशन है 7.09 प्रतिशत। मतलब गाव मे महगाई शहरो से ज्यादा है। ध्यान रखे महात्मा गाधी जी ने कहा था कि भारत गावो का देश है। हमारे देश की 70 प्रतिशत आबादी आज भी गावो मे निवास करती है।
जिनके लिए महगाई दर 7.01 प्रतिशत नही है, 7.09 प्रतिशत है। रुरल अनएम्प्लोयमेट रेट, ग्रामीण बेरोजगारी दर वो भी देश की एवरेज बेरोजगारी दर से ज्यादा है। देश मे एवरेज बेरोजगारी दर 7.8 प्रतिशत है और ग्रामीण क्षेत्रो मे 8.03 प्रतिशत है। मतलब शहरो से ज्यादा बेरोजगारी गावो मे, शहरो से ज्यादा महगाई गावो मे। ये मोदी सरकार का विकास का और आर्थिक अर्थनीति का मॉडल है।गौरव बल्लव ने कहा कि फिर आगे चलते है लगातार पिछले 33 महीनो से रिजर्व बैक का जो मेन टारगेट है महगाई दर का 4 प्रतिशत, उससे हमारी महगाई दर पिछले 33 महीनो से ज्यादा है। पिछले 6 महीनो से हमारी महगाई दर जो अपर बैड है रिजर्व बैक का 6 प्रतिशत उससे भी ज्यादा है। और तो और साथियो, मै नही कह रहा रिजर्व बैक का टारगेट है कि जुलाई, अगस्त, सितबर मे महगाई की दर 7.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, मतलब अभी से भी ज्यादा। ये मै नही कह रहा, ये रिजर्व बैक का टारगेट है और फूड इन्फ्लेशन, खाने-पीने की महगाई 7.75 प्रतिशत है और सçजयो मे महगाई दर है 17.37 प्रतिशत अर्थात् पहले हमारी थाली मे से रोटी छीनी मोदी सरकार ने, आटे पर जीएसटी लगाकर। अब उन्होने सोचा रोटी तो छीन ली, पर फिर भी सजी तो है अभी, तो सजी पर महगाई दर देश मे 17.37 प्रतिशत। क्या आपमे से किसी का भी वेतन, आय पिछले एक साल मे 17 प्रतिशत से बढ़ी है, पर सçजयो की महगाई दर 17 प्रतिशत से बढ़ी है। ये मै नही भारत सरकार के आकड़े कह रहे है। 25 लाख लोग पिछले महीने जून, 2022 मे अपनी नौकरी खोते है। 11 हजार लोगो को स्टार्टअप से फायर किया जाता है। ये सारे आकड़े पçलक डोमेन मे है। रुपए आज 79.66 रुपए पर डॉलर पर खड़ा है, 80 कभी भी पार कर सकता है। जीडीपी ग्रोथ रेट अपने निम्नतम लेवल पर रखी गई है और उसके बाद इस सारे इशू मे हमारी जो मोदी सरकार है, हमारी विा मत्री है, वो इन इशू पर बात नही करती है, वो नासा की फोटो मे दूसरे ब्रह्माणो के रग पर उनका फोकस है, और तो और इस सारे आकड़ो के दौरान एक और चीज निकल कर सामने आई कि भारत सरकार ने 47 वी जीएसटी काउसिल की मीटिग मे 5 प्रतिशत जीएसटी आटे पर, दही पर, पनीर पर, छाछ पर, मूली पर लगाने का काम मोदी सरकार ने किया।गौरव बल्लव ने कहा कि प्रधानमत्री नरेद्र मोदी को मै कहना चाहता हू कि आपका लोगो को इस महगाई से राहत देने का क्या फार्मूला है, जो लगातार पिछले 6 महीनो से महगाई की दर, रिटेल इन्फ्लेशन 7 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है, उससे लोगो को राहत देने का आपका क्या फार्मूला है? क्या आपका महगाई से लोगो को राहत देने का एक ही फार्मूला है कि आटे पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगा दो।हमारा दूसरा सवाल है कि जब रुपए अपने निम्नतम लेवल पर आ चुका है डॉलर के मुकाबले, जब बेरोजगारी की दर गावो मे 8 प्रतिशत से ऊपर पहुच चुकी है, जब रिटेल इन्फ्लेशन 7 प्रतिशत पर है, मोदी जी और विा मत्री जी आप कोई इस पर अपना लू प्रिट, इन समस्याओ से देश की अर्थनीति कैसे बाहर निकलेगी, इसका लू प्रिट देश के सामने क्यो नही रखते है? क्यो आप दोनो ने मौन व्रत लिया हुआ है, क्यो इन चीजो पर बात करने से कतराते है। तीसरा और महत्वपूर्ण बिदु, जब रिजर्व बैक कह रहा है कि अगले तीन महीने अर्थात्, जुलाई, अगस्त, सितबर, पिछले 6 महीने से भी ज्यादा भयानक होने वाले है, क्योकि पिछले 6 महीने मे एवरेज महगाई दर थी 7.3 प्रतिशत और आगे के तीन महीने का फोरकास्ट रिजर्व बैक का 7.4 प्रतिशत का है, तो गवर्मेट के माइड मे क्या उपाय है, वो देश के सामने क्यो नही रखते। गौरव वल्लभ ने कहा कि अब मुझे ये नही समझ मे आ रहा, उनकी प्राथमिकताए क्या है? क्या दूसरे ग्रहो के रग उनकी प्राथमिकता है? आम हिदुस्तानी, आप जैसे, मेरे जैसे, मिडिल क्लास परिवार, लोवर इकम ग्रुप परिवार, उनके जीवन के रग, उनकी प्राथमिकता नही है। उन्होने कहा कि कितना रगीन दृश्य है, दूसरे ग्रहो के तारो का। हमारा रग तो खत्म हो रहा है, विामत्री जी। हम तो जूझ रहे है, लगातार बढ़ती बेरोजगारी से। 25 लाख लोगो ने, आकड़े आपको सोर्स सहित दे रहा हूँ, 25 लाख लोगो ने एक महीना, जून 2022 मे अपनी नौकरी खोई है। ये मै नही कह रहा, ये सीएमआईई का आकड़ा है। आर्थिक स्थितियाँ बैड से वर्स होती जा रही है, खऱाब से निम्नतम होती जा रही है, पर कोई जवाब देने वाला ही नही है। प्रधानमत्री जी से बार-बार हमने पूछा कि प्रधानमत्री जी, गिरता रुपया आप ही ने कहा था, आप ही की पार्टी के लोगो ने कहा था कि गिरता रुपया सरकार की गिरती साख को दर्शाता है, अब तो सरकार की जो साख है, वो निम्नतम लेवल पर आ गई, प्रधानमत्री जी, आपके अनुसार, कुछ तो बोलिए, कुछ तो बताइए कि इसको कैसे वापस उठाएगे।किस तरह ग्रामीण अर्थव्यवस्था जो शहरो से बद से बदतर हो चुकी है, ग्रामीण क्षेत्रो मे बेरोजगारी की दर 8.03 प्रतिशत है। जो शहरो से ज्यादा है, देश के एवरेज से ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रो मे महगाई की दर जो रिटेल इफ्लेशन 7.01 प्रतिशत है, ओवर ऑल ग्रामीण क्षेत्रो मे वो रिटेल इफ्लेशन है, 7.09 प्रतिशत और न प्रधानमत्री जी कोई बात इस पर बोलते है, न विामत्री जी इस पर बोलते है। इसी बाबत हमने उनको नीद से जगाने के लिए आज की प्रेस वार्ता की है और तीन सवाल पूछे है कि आप लोगो के जीवन मे किस तरह राहत दोगे, बढ़ती महगाई से, बढ़ती बेरोजगारी से, डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए से।हमने ये पूछा है कि जो आने वाले समय मे रिजर्व बैक कह रहा है कि महगाई दर आज से भी ज्यादा होगी, तो आप उस समय को टोलरेट करने के लिए लोगो के जीवन मे इसका विपरीत प्रभाव न पड़े, उसके लिए क्या आपके उपाय है, दिमाग मे। हमने ये भी पूछा है कि आप मौन होकर ये सारा तमाशा क्यो देख रहे हो? क्या आपका कर्तव्य नही है कि लोगो के जीवन मे बढ़ती महगाई से जो दुष्प्रभाव पड़ा है, उससे कुछ निज़ात दिलाया जा सके।एक तरफ तो महगाई दर और साथियो एक और प्वाइट मै आपको बताना चाहता हूँ। एक नया टर्म इकॉनमी मे आया है, श्रिकफ्लेशन। एक तो हो गया इफ्लेशन, एक नया टर्म चल रहा है- श्रिकफ्लेशन। उसमे चीज का दाम है, उसको बढ़ाया नही जाता, दाम वही रखा जाता है, पर जो वस्तु की जो मात्रा है, उसको कम कर दिया जाता है।गौरव बल्लव ने कहा कि प्रधानमत्री नरेद्र मोदी पूरे देश के भ्रमण पर गए, उन्होने कही भी इन चीजो का उल्लेख नही किया। उन्होने पता नही, करट, शॉर्ट, सर्किट पता नही, फिजिक्स की बात और बात करनी थी, इकॉनमी की।
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