नई दिल्ली, 07 जुलाई 2022। मेडिकल की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने की चाह मे भारत से यूक्रेन गए छात्र-छात्राओ के सपने टूटते नजर आ रहे है और वे अपने भविष्य को लेकर चितित है। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जग के कारण यूक्रेन मे पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रो को स्वदेश लौटे तीन महीने से अधिक समय हो गया है, लेकिन अभी भी उनका भविष्य अधर मे लटका है। मेडिकल छात्रो और परिजनो को हर बार नई तारीखे दी जा रही है, लेकिन छात्रो को लेकर कोई निर्णय नही हो पर रहा है, जिससे वे परेशान है। यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र आए दिन अब सरकार पर दबाब बनाने का प्रयास कर रहे है, अब तक कई ज्ञापन भी सौपे जा चुके है, लेकिन अभी तक इनके भविष्य को लेकर फैसला नही हो सका है।
यूक्रेन रिटर्न एमबीबीएस स्टूडेट्स’ के बैनर तले विभिन्न राज्यो के मेडिकल छात्रो और उनके परिजनो ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के बाहर बीते 5 जुलाई को भी प्रदर्शन किया था, जिसमे गुजरात, यूपी, बिहार, असम एमपी, हिमाचल पजाब महाराष्ट्र कर्नाटक से बच्चे अपनी मागे रखी। इन मागो मे सबसे महत्वपूर्ण माग थी कि यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्रो को भारत मे एडजस्ट किया जाए। इन छात्रो और परिजनो का यह दूसरा प्रदर्शन रहा, लेकिन इस बार भी कोई जवाब नही मिला।
मेडिकल छात्रो के मुताबिक, एनएमसी ने पहले 8 जुलाई का समय दिया और अब 15 जुलाई का समय दे दिया है। साथ ही यह भी कहा गया कि वह खुद सरकार की तरफ से जवाब आने का इतजार कर रहे है। इसलिए हमे नही पता कि कौन हमारी मदद करेगा।
यूक्रेन मे छह सालो मे मेडिकल की पढ़ाई पूरी होती है। इसके बाद स्टूडेट्स को एक साल अनिवार्य इटर्नशिप करनी पड़ती है। फिर भारत मे प्रैक्टिस करने और लाइसेस प्राप्त करने के लिए एफएमजीई यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम के लिए पात्रता के लिए एक साल की सुपरवाइज्ड इटर्नशिप भी करनी पड़ती है। इनके बाद एफएमजी एग्जाम मलीफाई करना पड़ता है।
देश के अलग अलग राज्यो मे छात्रो की सख्या अलग है, दिल्ली मे 150 मेडिकल के छात्र है जो यूक्रेन युद्ध के कारण स्वदेश लौटे, हरयाणा 1400, हिमाचल प्रदेश के 482, ओडि़सा 570, केरला 3697, महाराष्ट्र 1200, कर्नाटक 760, यूपी 2400, उाराखड 280, बिहार 1050, गुजरात 1300, पजाब 549, झारखड 184 और पश्चिम बगाल 392 छात्र है।
देशभर मे करीब 16 हजार विद्यार्थी है, जिनमे अधिकतर छात्र अवसाद मे है। ऑपरेशन गगा के तहत भारत स्वदेश लौटे छात्र व उनके अभिवावक प्रदेश के मेडिकल कॉलेज मे ही आगामी मेडिकल शिक्षा ग्रहण किए जाने की व्यवस्था की माग कर रहे है।
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