बैकुण्ठपुर @24 साल वाले कोरिया जिले के 17 वें कलेक्टर होंगे कुलदीप शर्मा

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भाजपा ने लगातार बदलते कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों को लेकर कसा तंज,भाजपा का आरोप प्रदेश सरकार को प्रशासनिक अमले पर भरोसा ही नहीं

हार की कार्यवाही पार्टी के भितरघातियों की बजाए कलेक्टर पर हुई,बना हुआ है चर्चा का विषय,चुनाव में हार का खामियाजा भुगतना पड़ा कलेक्टर को,यह भी सूत्रों से खबर

रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 15 जनवरी 2022 (घटती-घटना)। कलेक्टरों के लिए ठहराव का जिला साबित क्यों नहीं हो पा रहा कोरिया। नई सरकार ने तीन सालों में बदल दिए चार कलेक्टर, अब जिले में पहुंचे पांचवे कलेक्टर। क्या पांचवे कलेक्टर जिले में कुछ समय तक ठहर पाएंगे या यह भी बदल दिए जाएंगे? भाजपा ने लगातार बदलते कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों को लेकर कसा तंज। भाजपा का आरोप प्रदेश सरकार को प्रशासनिक अमले पर भरोसा ही नहीं। प्रदेश सरकार का प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण भी नहीं, भाजपा। नगरपालिका चुनाव में हार का खामियाजा कलेक्टर को भुगतना पड़ा, यह भी सूत्रों से खबर। नगरपालिका चुनावों में चित पट को लेकर कलेक्टर की निष्पक्षता को लेकर हुई कार्यवाही, सूत्र। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर हार की कार्यवाही पार्टी के भितरघातियों की बजाए कलेक्टर पर हुई,यह भी है चर्चा।
कोरिया जिले में तीन वर्षों के भीतर चार कलेक्टरों का तबादला कर दिया गया है अब पांचवे कलेक्टर के रूप में कोरबा नगर निगम के वर्तमान आयुक्त कुलदीप शर्मा आईएएस को जिले की जिम्मेदारी दी गई है जो जिले के पांचवे कलेक्टर के रूप में अपना पदभार जिले में ग्रहण करेंगे। प्रदेश में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से अब तक सरकार के तीन सालों के कार्यकाल के दौरान कोरिया जिले में पांचवीं बार कलेक्टर बदले जाने को लेकर तरह तरह की चर्चाएं जारी हैं वहीं पुलिस विभाग में भी पुलिस अधीक्षकों को लेकर जारी लगातार तबादले को लेकर भी यह चर्चा है कि आखिर क्या वजह है कि जिले में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक टिक नहीं पा रहें हैं और लगातार उनका तबादला कर दिया जा रहा है जबकि उन्हें कुछ समय जिले की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए जिससे किसी कलेक्टर द्वारा की जा रही स्व प्रयासों व स्व विवेक से जारी किसी जनकल्याणकारी योजना को मूर्त रूप मिल सके और यह जिलेवासी भी महसूस कर सकें कि किसी जिलाधीश का कोई प्रयास धरातल पर आया और वह बेहतर रहा या उसकी समीक्षा अनुसार उसमें सुधार की भी गुंजाइश है यह चर्चा हो सके। जिले में कलेक्टरों के नहीं टिकने की वजहों को लेकर भाजपा का भी अपना बयान है भाजपा के लोगों का कहना है सरकार प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है और उनपर अविश्वास कर रही है जिसकी वजह से ही कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों का तबादला उनके कार्यकाल पूर्ण होने के पहले ही कर दिया जा रहा है और कोई भी कलेक्टर या पुलिस अधीक्षक एक वर्ष भी जिले में नहीं टिक रहा है।

कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक के तबादलों की आखिर क्या है वजह,लोगों में चर्चा जारी

जिलेवासियों के आपसी चर्चा में यह विषय बड़ी गम्भीरता से विचार किया जा रहा है कि आखिर किन वजहों से जिले में कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों का ठहराव नहीं हो पा रहा है। नई सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में पांचवे कलेक्टर की पदस्थापना से अब जिलेवासी भी यह कहते सुने जा सकते हैं की आखिर यदि इसी तरह प्रतिवर्ष कलेक्टरों का तबादला होता रहा तो किसी भी शासकीय योजना का क्रियान्वयन कितना मूर्त रूप ले सकेगा इसपर संशय है क्योंकि एक जारी कार्य किसी के नेतृत्व व किसी की निगरानी में उसकी मंशानुरूप व उसकी तैयार कार्ययोजनाओं पर जारी है तो ऐसे में उस कार्ययोजना बनाकर कार्य कर रहे अधिकारी जो किसी योजना को मूर्त रूप देने पूरे मनोयोग से जुटा है के तबादला कर दिए जाने के बाद निश्चित रूप से जारी कार्य प्रभावित होगा और वह अपने मूर्त रूप में नहीं पहुंच सकेगा यह लोगों के विचारों में जारी समीक्षा है जो कलेक्टरों के तबादले के बाद से ही जारी है।

पुलिस अधीक्षकों के तबादले पर जिलेवासियों के अपने हैं विचार

जिले में जिस तरह कलेक्टरों का ठहराव तीन वर्षों से नहीं हो पा रहा उसी तरह पुलिस अधीक्षकों का भी कार्यकाल अल्प रह रहा है जिसको लेकर भी जिलेवासियों के बीच चर्चा जारी है,वर्तमान में स्थानांतरित किये गए पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी निजात मेडिकल नशा विरोधी अभियान पर पुलिस अधीक्षक के तबादले का असर पड़ेगा और निश्चित रूप से अभियान की गति धीमी पड़ेगी यह जिलेवासीयो का मानना है। जिलेवासियों का कहना है कोई अभियान जब कोई अधिकारी जारी करता है तो वह उसमें अपना अधिकतम समर्पण प्रदान करता है जबकि उसके जाने के बाद नया आने वाला अधिकारी ऐसा करे यह संशय का विषय रहता है।

कोरिया नीर योजना को लेकर जिलेवासियों द्वारा दिया जा रहा उदाहरण

जिले के पूर्व कलेक्टर एस प्रकाश जिनके द्वारा जिले में कोरिया नीर योजना की शुरुआत की गई और उनके जाते ही वह योजना आज बंद सी हो गई ऐसे उदाहरण देकर भी जिलेवासी कलेक्टरों के जल्द तबादले को गलत बताते हुए चर्चा करते सुने जा सकते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकार का नहीं है नियंत्रण, सरकार को अधिकारियों पर भरोसा भी नहीं,भाजपा:- कलेक्टर व पुलिस अधीक्षकों के समय पूर्व तबादलों को लेकर भाजपा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि सरकार का प्रशासनिक अधिकारियों पर नियंत्रण व उनपर विश्वास का अभाव ही इसकी वजह है और कोई दूसरी वजह नहीं है स्थानांतरण लगातार करने की।

नगरपालिका चुनाव में हार भी तबादलों की वजह,कह रहे लोग

जिले के तीन वर्षों में चौथे कलेक्टर को जिले की नगरपालिका चुनावों में हार का खामियाजा भुगतना पड़ा यह भी चर्चा जारी है। लोगों को यह कहते भी सुना जा रहा है कि सरकार ने नगरपालिका चुनावों में हार का ठीकरा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पर फोड़ दिया जबकि कार्यवाही पार्टी के भितरघातियों और उन जिम्मेदार लोगों पर की जानी चाहिए थी जो हार की असल वजह थे।

कलेक्टर श्याम धावड़े का कार्यकाल रहेगा अविस्मरणीय

कलेक्टर श्याम धावड़े का जिले में अल्प समय का कार्यकाल अविस्मरणीय रहेगा यह जिलेवासियों का कहना है। जिलेवासियों का मानना है कि श्याम धावड़े प्रशासनिक कसावट और जिले में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बड़े सजग प्रहरी थे और अपना पूरा समय वह जिलेवासियों के हितों के संवर्धन को लेकर दिया करते थे जो उनके कार्यकाल को लेकर याद रखने वाला विषय रहेगा।

नए कलेक्टर से रहेगीं उम्मीद जिलेवासियों की

कोरिया जिले में नए कलेक्टर के रूप में कुलदीप शर्मा की पदस्थापना हुई है और जिलेवासियों को उम्मीद है कि जारी कार्यों की प्रगति और जनकल्याणकारी कार्यों की प्रगति पूर्व की तरह जारी रहे और जिलेवासियों के कार्य जो उनके हितों से जुड़े जारी हैं वह सतत रूप से जारी रहें।

24 साल वाले जिले के 17 वें कलेक्टर होंगे कुलदीप शर्मा

छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तर-पश्चिम जिलो में से एक है कोरिया जिला। यह जिला मध्य प्रदेश राज्य में 25 मई 1998 को अस्तित्व में आया इसका मूल जिला सरगुजा था। जिला कोरिया का नाम यहाँ के पूर्व रियासत कोरिया से लिया गया है। कोरिया जिले के गठन के लगभग 24 सालों के दौरान के 17 वें कलेक्टर होंगे कुलदीप शर्मा जबकि विगत 3 सालों में बदले गए कलेक्टरों के हिसाब से उनका नम्बर पांचवा होगा। इस हिसाब से भी देखा जाए तो 15 सालों में जिले के कलेक्टरों ने अपना कार्यकाल लगभग पूर्ण किया है जबकि 3 सालों से कलेक्टरों का तबादला ही जारी है।


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