बैकुण्ठपुर@शैलेष को नपा में दो बार मिली हार

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क्या अब विधानसभा में उनकी दावेदारी को लेकर जारी संभावनाओं को भी लग चुका ग्रहण

बैकुण्ठपुर 24 दिसम्बर 2021 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर नगरपालिका चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली कांग्रेस ने निर्णायक बहुमत प्राप्त करते हुए नगरीय सरकार के लिए अपना दावा भी पुख्ता कर लिया लेकिन कई वार्डों में कांग्रेस की हार भी कांग्रेस के लिए कुछ मंथन छोड़ गई जिसमें जुनापारा, महलपारा सहित हर्रापारा वार्ड की हार कांग्रेस के लिए चिंतन का विषय रहेगी समीक्षा का विषय रहेगी क्योंकि इन वार्डों में संगठन को किनारे रखकर विधायक ने अपनी ताकत झोंकी थी और पराजय हांथ लगी। वैसे बैकुंठपुर नगरपालिका चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन भाजपा के संगठनात्मक ढांचे की भी सच्चाई बता गया और यह साबित हो गया कि भाजपा की पूरी रणनीति हवा हवाई ही थी और जो पार्षद जीत सके अपने बलबूते जीत सके अन्यथा संगठन की न तो कोई सफलता नजर आई और न ही संगठन का प्रयास ही दिखाई दिया।
बैकुंठपुर नगरपालिका चुनाव में सबसे आश्चर्जनक परिणाम वार्ड क्रमांक 06 से सामने आया जहां पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष बैकुंठपुर शहर के लिए दिन रात एक करते हुए शहर की चिंता में लगे रहने वाले शैलेश शिवहरे की हार हुई और वह भी हार बड़ी अंतर से हुई जिसकी अब चर्चा ज्यादा है। शैलेश शिवहरे की यह हार इसलिए ज्यादा चर्चित है क्योंकि यह हार वार्ड पार्षद पद की चुनाव में हुई है और जो एक मायने में व्यक्तिगत छवि का चुनाव होता है और अपने ही घर और गलियों से जुड़ा हुआ चुनाव होता है। अपनी गलियों घर के आसपास का समर्थन मिलना ही किसी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी उसकी समाजसेवा या उसके जन हितैसी कार्यों का परिणाम माना जाता है और उसकी लोकप्रियता भी उसके घर के आसपास निश्चित रूप से कायम है इसको भी साबित करता है,और इन सभी परीक्षाओं में शैलेश शिवहरे अनुत्तीर्ण रहे और अब वह अपनी हार की कितनी भी समीक्षा करें उन्हें अपने गृह क्षेत्र के वार्ड से हार की बड़ी कीमत राजनीतिक चुकानी होगी जो उनके भविष्य की राजनीति को प्रभावित भी करेगी यह तय है। शैलेश शिवहरे राजनीति के वह चमकते सितारे बन चुके थे एक समय बैकुंठपुर में जब वह नौकरी छोड़कर नगरपालिका चुनाव लड़ने का मन बनाकर निर्दलीय चुनाव में कूद पड़े और उन्होंने राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले तीरथ गुप्ता को चुनाव में पराजित कर दिया जिस दौरान यह भी देखने को मिला कि पूरे बैकुंठपुर शहर का उनको समर्थन प्राप्त हुआ। जिस समय नौकरी छोड़कर शैलेश शिवहरे ने राजनीति में प्रवेश किया और नगरपालिका चुनाव लड़ा उस समय शैलेश शिवहरे को जिस हिसाब से शहरवासियों का समर्थन मिला उसे उस समय देखने वाले भी बताते हैं कि एक आंधी की तरह शैलेश शिवहरे के नाम की हवा चली और उस आंधी में बाकी समस्त प्रत्याशियों को जमानत तक जब्त होने की नौबत आ गई थी केवल उस समय भाजपा ही जमानत बचा पाने में सफल हो सकी थी। शैलेश शिवहरे का पांच साल का कार्यकाल पूर्ण हुआ और दोबारा शैलेश शिवहरे को भाजपा से नगरपालिका अध्यक्ष का प्रत्यासी बनाया गया इसबार शैलेश शिवहरे कांग्रेस के अशोक जायसवाल से पराजित हो गए और फिर भी शैलेश शिवहरे ने शहर में अपना जनसेवक एक पूर्व जनप्रतिनिधि होने का फर्ज कायम निभाना कायम रखा और सतत रूप से शहर की समस्याओं में अपनी भूमिका का निर्वहन करते भी रहे।

विधायक पद के भी दावेदार माने जाते हैं शैलेश शिवहरे

बैकुंठपुर नगरपालिका अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान ही शैलेश शिवहरे के समर्थकों ने उन्हें भाजपा से बैकुंठपुर विधानसभा का प्रत्यासी मानना जारी किया और समर्थकों ने लगातार समय समय पर इस बात को हवा भी देना जारी रखा और शैलेश शिवहरे की बैकुंठपुर विधानसभा से दावेदारी को पुख्ता करने का प्रयास भी जारी रखा। शैलेश शिवहरे की मेहनत से जनता भी एक समय शैलेश शिवहरे के नाम पर विचार करना शुरू कर चुकी थी और उन्हें भी लगने लगा था कि यह एक विकल्प बेहतर हो सकता है।

वार्ड पार्षद चुनाव में पराजय के मायने हैं बडे

शैलेश शिवहरे भले ही इस बार नगरपालिका चुनाव में अपनी धर्मपत्नी को जीता ले जाने में सफल रहे लेकिन खुद वार्ड पार्षद का चुनाव हार जाना उनके राजनीतिक भविष्य को अंधकारमय कर गया। वार्ड पार्षद के चुनाव में पराजय को बड़ी पराजय माना जाता है भले ही इस चुनाव का महत्व उतना बड़ा न हो, अब यदि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो उनका कहना है वार्ड पार्षद चुनाव में हार से विधानसभा में दावेदारी कमजोर हुई है और यह सर्वमान्य सच है और यदि दावेदारी पुख्ता रखना है तो शुरुआत फिर से करनी होगी यह भी जानकारों का कहना है, कुल मिलाकर शैलेश शिवहरे की राजनीति भविष्य में कठिनाइयों वाली संघर्ष वाली होगी यह तय है।


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