बैकुंठपुर/चिरमिरी@सीआईएल के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर को आरटीआई एक्टिविस्ट सत्यपूजन ने लिखा पत्र

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कोल भवन कोलकाता भेजा गया शिकायत पत्र, कार्यवाही की है मांग।

ट्रांसपोर्ट कंपनी के प्रोपराइटर सहित एसईसीएल के अधिकारियों पर कूटरचना कर कंपनी को नुकसान पहुंचाने का लगाया है आरोप।

रवि सिंह-
बैकुंठपुर/चिरमिरी ,23 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। चिरमिरी निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट सत्यपूजन मिश्रा ने एसईसीएल कोल भवन कोलकाता के चेयर मैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर को शिकायत पत्र लिखकर शिकायत की है साथ ही कार्यवाही की मांग करते हुए शिकायत पत्र में अवगत कराया है कि मेसर्स महाशक्ति ट्रांसपोर्ट के प्रोपराइटर मनीष कुमार मिश्रा पिता आर एन मिश्रा, आरएन मिश्रा पिता स्वर्गीय केएन मिश्रा जो एसईसीएल चिरिमिरी क्षेत्र के कुरासिया कालरी, कोरिया कालरी, पोड़ी कालरी, एनसीसी कालरी, डोमनहिल कालरी समूह के उप क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश दास एवम कुछ अन्य संबंधित अधिकारी, मेसर्स महाशक्ति ट्रांसपोर्ट के प्रोपराइटर सभी एकराय होकर एसईसीएल कंपनी के साथ कूटरचना, धोखाधड़ी कर फर्जी तरीके से बिल तैयार कर रुपये 3894471 का गबन किया जाकर अपना जेब भरा गया है और जिससे एसईसीएल कंपनी को क्षति पहुंची है और जिसके जांच कर कार्यवाही की जरूरत है और यह वसूली योग्य विषय भी है।
शोसल एक्टिवीस्ट व आरटीआई एक्टिबीस्ट कोरिया कालरी (चिरमिरी) निवासी सत्यपूजन मिश्रा ने पत्र में लिखा की एसईसीएल चिरमिरी क्षेत्र में मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट के प्रोपाईटर मनीश कुमार मिश्रा आ0 आर.एन. मिश्रा, आर.एन. मिश्रा आ0 स्व0 के. एन. मिश्रा जो एस.ई.सी.एल. कोरिया कालरी (ट्रिप मैन के पद पर कार्यरत थे) इसके उपरान्त अधिकारीयों के द्वारा कम्पनी के गाडीयों की आरटीओ संबंधित दस्तावेज दुरुस्त करने का कार्य दिया गया था। अधिकारीयों के इसके साथ सांठ गांठ थे और उस समय भी फर्जी बिल बनाकर अधिकरी और आर0एन0 मिश्रा मिलजुल कर कम्पनी का रूपया गमन किया करता था, जो जांच का विषय है। मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट के प्रोपाईटर और अधिकारीयों के मिली भगत से पुर्व में भी बस परिचालन के नाम से फर्जी दस्तावेज व बिल बनाकर, एसईसीएल कम्पनी को क्षति पहुचाई गई है। इस कृत्य में पुर्व में रहे सभी छोटे बडे अधिकारी संलिप्त रहकर कम्पनी को दीमक की तरह खोखला कर अपनी जेब भरते थे। जबसे मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट की गाडीया (बस) कम्पनी में लगाई गई, उस समय से प्रथम टेण्डर से ही जांच हो तो कई घोटाले एवं फर्जी दस्तावेज सामने आएगं। सम्पुर्ण रिकार्ड व विल पेमेंट की जांच की जावे। विगत दस वर्षो के पुरे रिकार्ड जांच में लिया जावे। जिसमें फर्जी लागबुक भरा गया है, डिजल बिल की कापी फर्जी है एवं कुछ गाडीयों के फर्जी दस्तावेज भी लगें है, जो गाडी कम्पनी में परिचालन में नही थी एवं जो गाडी नही भी चली, उस नम्बर की गाडी का भी पेमेंट किया गया है। जितने बसों को एसईसीएल कम्पनी में लगाने का ठेका का वर्क आर्डर हुआ था, कभी भी पुरी बस परिचालन कम्पनी में नही थी, उसका भी पेमेंट किया गया है। यह भ्रष्टाचार लम्बे समय से अधिकारीयों के सांठ गांठ से चल रहा था और कम्पनी को सभी अधिकारीयों और मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट के प्रोपाईटर से मिली भगत कर लाखों रूपये का फर्जी बिल के माध्यम से कम्पनी को क्षति पहुचाकर अपनी जेब भरा गया है। फर्जी कागज और बिल बनाने में माहिर अधिकारीयों एवं मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट के प्रोपाईटर मनीश कुमार मिश्रा एवं आर.एन. मिश्रा के उपर कोई जांच आज तक नही हुई। एस.ई.सी.एल. कम्पनी के इस कार्य में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारी बिना पुंजी के मालिक हो गए है और कम्पनी को क्षति पहुचा रहें है एवं उक्त कम्पनी से जो 38 लाख रूपये मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोट को फर्जी बिल के माध्यम से अधिकारीयों द्वारा भुगतान किया गया है, उस हेड का बैंक खाता सिज किया जावे एवं उक्त राशी मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोट के प्रोपाईटर के द्वारा उक्त राशी को कहां कहां खपत किया गया उसकी भी जांच की जावे एवं मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोट के प्रोपाईटर और जो जो अधिकारी इस भ्रष्टाचार के कृत्य में संलिप्त है, उन सभी पर दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए उनसे रिकवरी की जावे एवं दोषी अधिकारीयों को नौकरी से बर्खास्त की जावे। आज दिवस तक एसईसीएल के प्रबंधन द्वारा मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट को ब्लैक लिष्ट क्यों नही किया गया, जो गहन जांच का विषय है। इतने बडे राशी का गमन होने पर सी.बी.आई. मे एफ.आई.आर. एस.ई.सी.एल प्रबंधन द्वारा दर्ज क्यों नही कराई गई? क्यो कि सेन्ट्रल गवरमेंट के कम्पनी में इतना बडा भ्रष्टाचार हुआ है एवं यह भ्रष्टाचार होने के बाद पुनः मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट के प्रोपाईटर मनीश कुमार मिश्रा एवं आर.एन. मिश्रा के द्वारा 7,93,910.00 रूपये का दोबारा फर्जी विल लगाकर कम्पनी से भुगतान के लिए जमा किया था। उक्त फर्जी विल का एफ.आई.आर. भी प्रबंधन द्वारा दर्ज नही कराई गई। उक्त फर्जी विल के संदर्भ में एफ.आई.आर दर्ज की जावे। प्रबंधन द्वारा एफ.आई.आर. आज दिवस तक क्यो नही कराया गया यह भी एक जांच का विषय है। भीजीलेन्स के द्वारा जालसाज भ्रष्ट अधिकारीयों को बचाने के लिए समय समय पर आते है और लिपा पोती कर चले जाते है, भीजीलेन्स केवल वसुली का कार्य करती है। कम्पनी के छोटे से लेकर उपर तक के बडे अधिकारी मिल कर कम्पनी को गर्त में डाल दिए है एवं कभी अपराधी अधिकारी भ्रष्टाचार में फसते है तो एसईसीएल कम्पनी के खर्च पर ही वकील नियुक्त कर कम्पनी को आर्थीक क्षति पहुचाया जाता है। विगत दस वर्षो में वकीलों की नियुक्ति एवं भ्रष्ट अधिकारी को बचाने का प्रयास एवं कम्पनी द्वारा वकीलों को दी गई फिस की जांच हो, तो सभी कृत्यों का कुटरचना का खुलासा हो जाएगा एवं अधिकारी के किन कृत्यों के कारण वकीलों की नियुक्ति की गई इसकी भी जांच किए जाने पर काफी भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है, जैसे कि कुछ चुनिन्दा ठेकेदार(श्री सुदीप तिवारी कोरिया कालरी एवं अन्य), सर्पलायर से अधिकारीयों के सांठ गांठ है, इन लोगों का भी बिना कार्य किए फर्जी विल बनाकर लाखो रूपये का कम्पनी का गमन कर बन्दर बांट, अधिकारी और ठेकेदार मिलजुल कर करते आए है (जैसे – डिसेंट हाउसींग(ऐग्रीको कम्पनी विश्रामपुर के साथ अनूबंध), रिपेयर एवं मेन्टेनेंस, गारवेज क्लिनिंग इत्यादी के कार्य) एवं हायर किए गए गाडीयों के माध्यम से भी भ्रष्टाचार फर्जी विल के माध्यम से हो रहें है। दिनांक 21/12/2020 एवं 25/03/2021 को आर.टी.आई. के माध्यम से दस्तावेज मेसर्स महाशक्ति ट्रान्स्पोर्ट से सम्बंधित दस्तावेज मांगे गए थे जो प्रबंधन द्वारा आज दिवस तक अपिल के बाद भी नही दी गई है, इससे साफ होता है कि इस भ्रष्टाचार में सभी एस.ई.सी.एल. कम्पनी के अधिकारी संलिप्त है और दस्तावेजों को छुपाया एवं साक्ष्य मिटाया जा रहा है।

पूर्व पुलिस अधीक्षक पर भी आरोप

शिकायतकर्ता ने पूर्व पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन सिंह पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि एक बड़ी रकम लेकर उन्होंने मुंह देखा देखी कारवाही की है इस मामले में जहां कई अधिकारी सहित इस प्रक्रिया में शामिल लोग पर कार्यवाही होनी थी पर हुई नहीं सिर्फ कुछ लोगों पर कार्यवाही कर खानापूर्ति की गई, जबकि इस मामले से जुड़े कई लोग पर कार्यवाही होनी थी पर पुलिस अधीक्षक के द्वारा निष्पक्ष जांच ना करके पैसा ले काफी लोगों को इस मामले से बचाया गया।


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