खड़गवां@लम्बे समय से जमे अधिकारियों पर कब खत्म होगी मेहरबानी

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मामला पीएमजीएसवाई विभाग का,सालों से जमे अधिकारी की देखरेख में खुलेआम हो रहा है भ्रष्टाचार

सड़कों का निर्माण कार्य मापदंड व मानकों के विपरित,नतीजा बनते ही खराब हो रही सड़के,जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की सडको की हो नियम से जाँच तो सामने आ सकता है बड़ा घोटाला

राजेन्द्र शर्मा-

खड़गवां 20 नवम्बर 2021 (घटती-घटना)। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कोरिया जिले के खड़गवां विकासखंड के गांवों में बनाई जा रही सड़कों के मापदंडों व नियम कायदों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी ठेकेदारों से मिलीभगत करके बेतहाशा मुनाफा कमाने के चकर में कर दी गई लिपापोती। यही वजह है की लम्बे समय तक ख़राब ना होने वाली सड़के बनते ही ख़राब हो रही है।
ज्ञात हो की शहरी क्षेत्र की सडकों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की परिधि से बाहर रखा गया है और केवल गावं की ही सड़के इस परिधि में आती है जिसका फायदा अधिकारी उठा रहे है। सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही और निर्माण के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत ग्रामीणों ने की है साथ ही विधायक भी इस सम्बन्ध में बोल चुके हैं कि सड़क बनाने में घटिया मटेरियल का उपयोग हुआ है जो सड़क की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ है। ठेकेदारों ने अधिकारियो से मिली भगत करके सड़क के निर्माण में मापदंडो को ठेंगा दिखते हुए कार्य किय है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कमीशन की चाह ने अधिकारियो के आंख-कान बंद कर दिया है और ठेकेदार घटिया निर्माण कर निर्माण लागत का बड़ा हिस्सा डकार रहे हैं। निर्माण एजेंसी की शर्तो के मुताबिक ठेकेदार पर कम से कम पांच वर्षो तक बनाई गई सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी भी होती है लेकिन एक बार ठेकेदार सड़क बनाकर हटा फिर दोबारा उस सड़क की ओर देखता तक नहीं है।

कोरिया जिले की निर्माणाधीन सड़कों में बड़ी अनियमितता

कोरिया जिले के खड़गवां, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, सोनहत, भरतपुर क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में काफी अनियमितता होने की शिकायत आ रही है। गांववालों ने शिकायत भी की है लेकिन उनकी शिकायत पर अधिकारी ध्यान क्यों दे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का मुख्य अधिकारी जो विगत कई सालों से कोरिया में पदस्थ होने की जानकारी है। सरकार आयी गयी लेकिन अधिकारी अपने जगह से टस से मस नहीं हुए यही जमे होने की सुचना मिली है। प्रतिनिधि को सूत्रों से जानकारी मिली है कि उक्त अधिकारी की ठेकेदारों से तगड़ी सेटिंग है।

जीएसबी और डब्ल्यू एमएम के मापदंडो की सारे आम अवहेलना

पोडीडीह से सकडा, जरौधा से परसामुडा‌ और चोपन से भरदा पैनारी से महादेव पाली खदौरा से डूभा पानी कौडीमार से पैनारी की सड़कों की ही तरह अमका से छिदिंआ और अन्य सड़क जिनका बरसात से पहले डामरीकरण हुआ है इन सड़कों के रखरखाव-मरम्मत के अभाव में निर्माण के चंद महीनों बाद ही खराब हो गई हैं और धंसकने लगी है। जगह-जगह डामर की परत भी उखड़ गई है। इन सड़कों में जीएसबी और डब्ल्यूएमएम में हजारों घन मीटर क्रेशर गिट्टी का उपयोग होना था लेकिन उसका उपयोग नहीं किया गया बल्कि हजारों घन मीटर क्रेशर गिट्टी के उपयोग के नाम पर चोरी की गई और करोड़ों रुपयों का सीधा-सीधा घोटाला किया गया। मलिटी कंट्रोल को जांचने वाले अधिकारी ने भी बिना देखे मलिटी कंट्रोल का मानक प्रमाण पत्र दे दिए जो घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार को प्रमाणित करता है। गांव वाले आम जनता ठेकेदार की दबंगई से डर कर विभाग से शिकायत करने से भी डरते हैं क्योंकि विभाग के अधिकारी मनमाने ढंग से शिकायतों का निपटारा बिना कार्रवाई किए स्थानीय स्तर पर ही कर देते हैं।

अधिकारी व ठेकेदार मालामाल पर सड़के बेहाल

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई गई सड़को की गुणवत्ता नियंत्रण के लिए व्यवस्था भी है। जिसके अनुसार सड़क बनाने वाले अधिकारी जो जिला स्तर का होता है उसकी जिम्मेदारी होती है साथ ही उनके सहायता के लिए विभाग के ही सेवानिवृत अधिकारियो को शामिल किया जाता है लेकिन देखने में आता है कि ये अधिकारी भी ठेकेदारों से मिलकर लाखो रूपये वारा न्यारा कर देते है। प्राय: प्रत्येक सड़क का राज्य गुणवत्ता समीक्षक एवं राष्ट्रीय गुणवत्ता समीक्षक द्वारा कम से कम तीन बार निरीक्षण करना अनिवार्य है। सिर्फ ऐसी सड़के जिनकी गुणवत्ता उच्च स्तर की हो उसेही मान्य किया जाता है। लेकिन देखने में आ रहा है कि ठेकेदारों पर अधिकारियो का लगाम नहीं है। हमारे संवाददाता ने मौके पर जाकर इस जानकारी के बारे में ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों से इस संबंध में जानना चाहा। सबने कहा कि सड़के जो बनी है वह उच्च गुणवत्ता युक्त नहीं है।


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