बीमारी से पीडि़त एक और पंडो युवक की मौत, 22 दिन के अंदर परिवार के तीन सदस्यों की गई जान

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पिछले डेढ़ महीने के अंदर बलरामपुर क्षेत्र के पंडों जनजाति की 15 से ज्यादा लोगों की हो चुकी है मौत

अम्बिकापुर 28 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। पंडो जनजाति युवक की मौत मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हो गई। वहीं माने 22 दिन के अंदर इसके परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि बलरामपुर जिले में पंडो जनजाति क्षेत्र में लगातार मौत के मामले सामने आ रहे हैं। डेढ़ महीने के अंदर 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
गौरतलब है कि नकुल पण्डो पिता स्व रामप्यारे पण्डो उम्र 25 वर्ष वीरेंद्र नगर का रहने वाला है। वाह काफी दिनों से बीमार चल रहा था। समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण वह घर में ही झाड़-फूंक और जड़ी बूटी से इलाज करा रहा था। कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन की टीम गांव में पहुंची थी तो पता चलने पर उसे सहारा देकर अस्पताल पहुंचाया गया था। मुरकौल स्वास्थ्य केंद्र मैं भर्ती कराया गया था। यहां पर स्वस्थ नहीं होने के बावजूद भी उसे घर भेज दिया गया था। उसे चिकित्सकों द्वारा बेहतर इलाज के लिए बलरामपुर जिला अस्पताल या अंबिकापुर मेडिकल अस्पताल रेफर नहीं किया गया था। घर में उसकी तबीयत और बिगड़ गई। 26 सितंबर को समाज के पदाधिकारियों द्वारा गांव में जन जागरूकता शिविर लगाया गया था। इसी बीच लोगों को जानकारी मिली की नकुल पंडो की स्थिति ठीक नहीं है और वो खून की उल्टी कर रहा है। उसे इलाज के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था यहां इलाज के दौरान 28 सितंबर की सुबह उसकी मौत हो गई।

22 दिन के अंदर परिवार के तीन सदस्यों की मौत

बताया जा रहा है कि मृतक नकुल पण्डो के पिता रामप्यारे पंडो की मौत बीमारी से ही 5 सितंबर को हो गई थी। वही इसके कुछ दिन बाद मृतक नकुल पंडित की दादी की भी मौत 16 सितंबर को बीमारी के कारण घर में ही हो गई थी। इसके बाद नकुल पंडो बीमारी से जूझ रहा था। समय पर इलाज उसे ना मिल पाने के कारण अंततः उसकी भी मौत हो गई।

परिवार के बीच आर्थिक संकट

22 दिन के अंदर एक ही घर से तीन लोगों की मौत हो जाने से पूरा परिवार टूट चुका है। मृतक नकुल पंडो की दो बेटियां हैं। वहीं इसकी पत्नी वह विधवा मां की भी जिम्मेदारी इसी पर था। बीमारी से इसकी भी मौत हो जाने के कारण यह पूरा परिवार अनाथ हो चुका है। इनके बीच अब आर्थिक समस्या खड़ी हो गई है।

सही इलाज नहीं होने से हो गई मौत

परिजन हो समाज के लोगों का आरोप है कि मृतक नकुल पंडो को मुरकौल स्वास्थ्य केंद्र में जांच किया गया था। इसके बाद घर भेज दिया गया था। इसके बाद नकुल पण्डो को घर जाकर कभी स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई जांच नहीं किया गया और न जानकारी भी ली गई। अगर स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ था तो उसे बेहतर इलाज के लिए बलरामपुर जिला अस्पताल या अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करना चाहिए था। जबकि मुरकौल स्वास्थ्य केंद्र द्वारा उसे घर भेज दिया गया था।


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