डंगौरा जमीन के दो मालिक दोनों का नाम धन सिंह,कौन है सही धन सिंह?

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मिलते-जुलते नामों से जमीन हड़पने की साजिश का है आरोप,प्रशासन की जांच कछुए की चाल में…आखिर कब होगा फैसला ?


राजस्व विभाग के अधिकारियों पर ही लग रहा षड्यंत्र कर भू-माफियो का साथ देने का आरोप।

एक धन सिंह मनेंद्रगढ़ के कछौड़ का तो दूसरा धन सिंह अंबिकापुर के छिंदकालों का आखिर किसका है डंगौरा का जमीन ?

धन सिंह ने मरने से पहले भतीजे के नाम कर दी थी वसीयत,जमीन पर भतीजे का कब्जा।

अचानक जीवित धन सिंह उस जमीन का मालिक होने का जता रहा है अधिकार।

रवि सिंह-

बैकु΄ठपुर 27 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। डंगौरा जमीन के दो मालिक दोनों का नाम धन सिंह, आखिर कौन है असली धन सिंह? एक धन सिंह मनेंद्रगढ़ के कछौड़ का और एक धन सिंह अंबिकापुर के छिंदकालों का आखिर किसकी है डंगौरा की जमीन? धन सिंह मरने से पहले भतीजे के नाम कर दी थी वसीयत, जमीन पर भतीजे का कब्जा। अचानक जीवित धन सिंह उस जमीन का मालिक होने का जता रहा अधिकार। प्रशासन की जांच कछुए की चाल में आखिर कब होगा फैसला कौन है असली धन सिंह। नौ साल पहले मरे हुए धन सिंह के जगह जीवित धन सिंह को खड़ा कर जमीन की हो गई बिक्री। जमीन का कब्जा दिलाने पहुंचा पूरा राजस्व विभाग दूसरे जगह की तहसीलदार का नही था कोई काम। पीçड़त ने कहा बैकुण्ठपुर की पूर्व तहसीलदार ने सोनहत में पदस्थ रहते हुए मनेन्द्रगढ़ में जाकर किया था सीमांकन, धन सिंह नाम के व्यक्ति के मरने के बाद उससे मिलते-जुलते नाम का व्यक्ति खोज मुख्तारनामा के आधार पर भूमि की हुई बिक्री मामला मनेन्द्रगढ़ का। नौ साल पहले मरे हुए व्यक्ति के जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर जमीन की हो गई बिक्री।
मनेन्द्रगढ़ तहसील का एक ऐसा मामला जहां नौ साल पहले मृत हुए व्यक्ति के जगह उसी नाम का व्यक्ति खड़ा करके बना दिया गया मुख्तारनामा और उसके आाधार पर ही जमीन की हो गई रजिस्ट्री उक्त भूमि के वारीशदार के कब्जे की जमीन पर राजस्व विभाग के अधिकारी कब्जा दिलाने के लिए इतने उत्साहित थे कि उन्होने बगैर मामले को समझे कब्जा दिलाने पूरा जोर लगा दिया। कब्जा लेने वाले की ऐसी पहुच कि एक तहसीलदार के साथ नही दो-दो तहसीलदार को लेकर पहुच गए कब्जा लेने जिसमे सोनहत की तत्कालीन तहसीलदार ऋचा सिंह व मनेन्द्रगढ़ के तात्कालीन तहसीलदार दल बल के साथ सीमांकन करने पहुच गए। सबसे आश्चर्य कि बात तो यह थी की सोनहत की तत्कालीन तहसीलदार जिनका कार्यक्षेत्र उक्त भूमि में नही आता फिर भी वह न जाने क्यों कब्जा दिलाने पहुच गई। जिसकी शिकायत बसंत सिंह ने कोरिया कलेक्टर से करते हुए तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया और कहा कि उनके चाचा कि जमीन फर्जी तरीके से उनके चाचा के नाम के मिलते जुलते व्यक्ति को खड़ा करके राजस्व विभाग के ही अधिकारियों की मदद लेकर जमीन बिकवा दी गई, जिसकी निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही की मांग की गई है।

यह है पूरा मामला

बसंत सिेह आत्मज स्वर्गीय विक्रम सिंह के भतीजे अजीत प्रताप सिंह निवासी ग्राम डंगौरा थाना व तहसील मनेन्द्रगढ़ ने बताया कि स्व. धनसिंह मेरे चाचा थे जिनकी मृत्यु करीब 09 वर्ष पहले हो चुकी है तथा मेरे चाचा धन सिंह ने जगरनाथ सिंह, बसंत सिंह एवं नवल साय के पक्ष में एक पंजीकृत वसीयत नामा 28 फरवरी 2007 को निष्पादित किया था। मेरे चाचा स्व धनसिंह की ग्राम डंगौरा पटवारी हल्का न. 10 तहसील मनेन्द्रगढ़ जिला कोरिया में खसरा न. 436 एवं 496 रकवा 1.130 एवं 0.100 भूमि थी उक्त भूमि को वर्ष 2007 में पंजीकृत वसीयतनामा द्वारा अपने भाई के पुत्र जगननाथ, बसंत सिंह एवं नवल साय के नाम कर दिया था। उनकी मृत्यु के पश्चात से अपने तीनो भतीजे का कब्जा है और उक्त जमीन पर खेती कर रहे है। धन सिंह कभी भी ग्राम छिंदकाली पोस्ट व थाना दरिमा, तहसील- अबिकापुर- सरगुजा में निवासरत नहीं थे तथा उन्होंने जो मुख्तारनामा आम सुशील कुमार मिंज के नाम पर जारी करना बताया है उस मुख्तारनामा में जो फोटो लगी है वह स्व धन सिंह की नहीं है तथा कोई अन्य व्यक्ति धन सिंह बनकर सुशील कुमार के पक्ष में मुख्तारनामा निष्पादित किया है एवं सुशील कुमार ने संगलराम के पक्ष में पंजीकृत विक्रयनामा निष्पादित किया है। इस तरह बनावटी व्यक्ति द्वारा धन सिंह बनकर मुख्तारनामा निष्पादित किया गया है और सुशील कुमार ने पंजीकृत मुख्तारनामा उक्त मुख्तारनामा के आधार पर निष्पादित किया है जो पुर्णतः गलत है।
साथ ही बसंत ने बताया कि वसीयतकर्ता की जो फोटो वसीयत में लगी हुई है जिससे यह प्रमाणित होता है कि हमारे चाचा धन सिंह की फोटो एवं पंजीकृत मुख्तारनामा में लगी फोटो दोनों अलग-अलग है। क्योंकि धन सिंह ग्राम कछौड़ एवं शिवपुर में निवास करने लगे थे तथा डगौरा भी आते जाते थे इस कारण छिगकालो में रहने का प्रश्न नहीं उत्पन्न होता है इस तरह बनावटी व्यक्ति द्वारा धन सिंह बनकर मुख्तारनामा निष्पादित किया है और उस गलत बनावटी मुख्तारनामा के आधार पर सुशील कुमार मिंज आ. जोफन मिंज ने विकयनामा मे निष्पादित किया है।

रजिस्ट्री में सोनहत की तत्कालीन तहसीलदार के भाई हैं गवाह

इस तरह बनावटी व्यक्ति द्वारा धन सिंह बनकर मुख्तारनामा निष्पादित किया है और उस गलत बनावटी मुख्तारनामा के आधार पर सुशील कुमार मिंज आ. जोफन मिंज ने विक्रयनामा मे निष्पादित किया है। उसमें जो गवाह अभिलाष सिंह एवं संतोष सिंह दोनो केदारपुर निवासी बताये गये है तथा दोनों ने मुख्तारनामा आम को पहचानना बताये है यह भी उस जालसाजी में सम्मिलित है वहीं गलत आदमी को भू स्वामी बनाकर मुख्तारनामा बनाने में ये भी उतने ही दोषी है। इस तरह हमारे भूमि स्वामी हक के भूमि को बनावटी धन सिंह बनकर भूमि का पंजीयन करा दिया गया है और यह पंजीयन वर्ष 2018 में किया गया है जबकि मेरे चाचा धन सिंह की मृत्यु करीब 09 वर्ष पूर्व हो चुकी है।

तत्कालीन तहसीलदार पर आरोप

पीड़ीत बसंत ने आरोप लगाते हुए बताया कि 18 मई 2019 को तहसीलदार मनेन्द्रगढ़ एवं सोनहत तहसीलदार ऋचा सिंह तथा दो पटवारी एवं दो आरआई एवं पुलिस दल बल के साथ पहुचकर मेरे कब्जे वाली भूमि का सीमांकन किये उसमें मेरा मकान भी सीमाकंन के अन्तर्गत उक्त भूमि पर आया है। जबकि वह मकान करीब 50 वर्ष पूर्व का बना हुआ है। इस तरह जानबूझकर, तहसीलदार मनेन्द्रगढ़ एवं तात्कालीन तहसीलदार सोनहत दल बल के साथ पुलिस लेकर डराते हुये तथा अपने पद का दुरूपयोग करते हुये मेरे कब्जे की भूमि में खुटा गाड़ दिया तथा मना करने पर जेल मे बन्दकर देने की धमकी दी गई इस तरह पूरी भूमि का नाप करने के बहाने खुटा गाड़ दिया गया है और फर्जी भूस्वामी बनाकर उसे कब्जा दिलाने की बात कही। वह खुटा किस आधार पर गाड़ा गया है यह नहीं बताया गया है जबकि बनावटी व्यक्ति द्वारा उक्त भूमि का विक्रय किया गया है जब की अभी तक धन सिंह एसडीएम न्यायालय में एक भी बार उपस्थित नहीं हुए है तथा मुख्तारनामा आम देकर दूसरे व्यक्ति को खड़ाकर रहा है जबकि यह धन सिंह कॅवर जाति का है और उसने गोड़ बनकर भूमि की बिक्री की है।


-एक नजर इन तथ्यों पर-

तथ्य न.1- जिसकी जमीन है वह धन सिंह गोड़ जाति का पर जिस धन सिंह ने मुख्तारनामा दिया है वह कंवर जाति का है।
तथ्य न.2- जिस धन सिंह की जमीन है उसके पिता का नाम नाहर सिंह, पर जिस धन सिंह ने मुक्तानामा देखकर जमीन बेची है उनके पिता का नाम नरहर साय सिंह है।
तथ्य न.3- जिस धन सिंह की जमीन है उन्होंने कभी भी अंबिकापुर में नहीं रहे और जो धन सिंह ने जमीन बची है वह कभी भी डंगौरा में नहीं रहे।
तथ्य न.4- धन सिंह के नतीजों के पास ओरिजिनल वसीयतनामा मौजूद है पर अंबिकापुर निवासी बताए जाने वाले धन सिंह के पास ऐसा कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं।
तथ्य न.5- पिछले 2 साल से धन सिंह के वारिस दार अपनी ही जमीन के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं।
तथ्य न.6- आखिर कब तक प्रशासन जांच करके यह फैसला देगा कि कौन सा धन सिंह सही है तेरी अंबिकापुर का धन सिंह सही है तो वह क्यों नहीं आ रहा सामने।
तथ्य न.7- इस पूरे मामले में पीçड़त ने निष्पक्ष जांचकर कार्यवाही की मांग की है।
तथ्य न.8- पूरा मामला मनेंद्रगढ़ का है वहीं इसमें तात्कालिन तहसीलदार सोनहत ऋचा सिंह की भूमिका बेहद संदिग्ध है वहीं उनके ही भाइयों का इस पूरे मामले में गवाह बनकर पहचानकर्ता बनना भी मामले में उनकी भूमिका को लेकर सवाल खड़ा करता है।


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