मूर्ति विसर्जन में नगर पालिका व प्रशासन ने नहीं की उचित व्यवस्था,याद आई पुरानी सीएमओ

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शांति समिति की बैठक में मूर्ति विसर्जन को लेकर बताई गई थी समस्या

बैकु΄ठपुर 21 सितम्बर 2021 (घटती-घटना)। धर्मिक आयोजन की शुरुआत गणेश प्रतिमा स्थापना से शुरू होती है इस बार भी गणेश उत्सव को लेकर उत्सव से पहले प्रशासन ने शांति समिति की बैठक रखी और बैठक में लोगों ने मूर्ति विसर्जन की व्यवस्थाओं की बात रखी थी, गणेश प्रतिमा की स्थापना से लेकर अनंत चतुर्दशी में विसर्जन तक का समय होने के बावजूद प्रशासन ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कोई भी तैयारी नहीं की जिस वजह से यह देखा गया कि लोग प्रतिमा का विसर्जन मजबूर बस ऊपर से फेक कर करते नजर आए जो दृश्य हिंदू धर्म को ठेस पहुंचाने जैसा देखा गया जिसे लेकर शहर में लोग काफी आक्रोशित दिखे वहीं प्रशासन की व्यवस्थाओं सवाल भी खड़े हुए।
गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान पूजा समितियों को सहयोग नहीं किये जाने को लेकर बैकुंठपुर शहर के सभी पूजा समिति पदाधिकारी व सदस्य नाराज नजर आ रहें हैं वहीं अब उनका यह भी कहना है कि पूर्व नगर पालिका अधिकारी मूर्ति विसर्जन को लेकर सजग रहा करतीं थीं वहीं वह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया करती थीं। वर्तमान में बैकुंठपुर की नगरपालिका सीएमओ जो कार्यरत हैं उनके द्वारा गणेश पूजन उपरांत मूर्तियों के विसर्जन को लेकर कोई ध्यान नहीं दिया वहीं अब इसी बात को लेकर लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। पूर्व पदस्थ नगरपालिका अधिकारी मूर्तियों के विसर्जन के लिए विसर्जन किये जाने वाले स्थानों पर लाइट की व्यवस्था करतीं थीं वहीं मूर्तियों के विसर्जन के लिए क्रेन की भी व्यवस्था की जाती थी जिससे किसी प्रकार की दुर्घटना मूर्ति विसर्जन के दौरान न होने पाए।
इस वर्ष मूर्ति विसर्जन के दौरान जो स्थिति बैकुंठपुर में देखी गई उसको लेकर सोसल मिडीया में भी लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए लिखा कि, जहां मूर्तियों का विसर्जन किया जा रहा था वहां नगरपालिका प्रशासन द्वारा किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं कि गई थी, लोग जिन जगहों पर विसर्जन कर रहे थे वहां मिट्टी खिसक रही थी और खतरे को भी आमंत्रण दे रही थी वहीं लाइट की व्यवस्था नहीं थी जबकि क्रम का भी ध्यान दिलाने कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी लोग लगातार एक एक कर मूर्ति विसर्जित किये जा रहे थे और ऐसा देखकर लोगो को पूर्व नगरपालिका अधिकारी की याद आ गई जो इन मामलों में गम्भीर थीं वहीं वह पूजा समितियों से पूछकर व्यवस्था हेतु तत्तपर रहा करती थीं।


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