विश्व शांति का अर्ध सत्य एक आदर्श

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स्थिति की मनोकामना


विश्व शांति की अवधारणा, इच्छा और उस स्थिति को स्थापित करने के प्रयास सुखद अनुभूति देते हैं। विश्व शांति सदैव मानव की एक ऐसी आदर्श स्थिति की मनोकामना है, जिसमें वह अपनी संपूर्ण स्वतंत्रता, रचनात्मकता और प्रफुल्लता के साथ जीवन यापन कर सके। विश्व शांति एक विचार है, जिसमें समाहित हैं अहिंसा, सभी देशों में आपसी सहयोग, दुनिया के सभी लोगों का सम्मान और सभी को जीवन की मूलभूत सुविधाओं की प्राप्ति।
विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों, दर्शनों और विचारों की आदर्श राज्य निर्माण की अलग-अलग अवधारणाएं हो सकती हैं, लेकिन शांति का मार्ग वही है, जो मानव को उसकी गहरी मानवीयता का भान कराए। मानव अधिकारों, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, चिकित्सा अथवा कूटनीति को संबोधित करके विश्व शांति स्थापित करने का उद्देश्य सार्वभौमिक रूप से घोषित है। वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने युद्ध अथवा युद्ध की घोषणा के बिना देशों के आपसी संघर्षों को हल करने के उद्देश्य को स्पष्ट किया।
लेकिन तब से सैकड़ों हजारों युद्ध दुनिया में हो चुके हैं, लाखों लोगों का खून बह चुका है। हमारे आधुनिक काल में तो युद्ध विराम ही विश्व शांति का संकेतक बन गया है। किन्हीं दो देशों में जब तक तनाव भीषण युद्ध में परिवर्तित न हो जाए, तब तक यह माना जाता है कि शांति की स्थिति बनी हुई है। दूसरे शब्दों में कहें, तो शांति का अर्थ बहुत संकीर्ण कर दिया गया है। विश्व शांति के मुद्दे बड़े लचकदार हैं। शांति का अभी कोई दर्शन शास्त्र सृजित नहीं हुआ है।
जिंदगी का एक इतना महत्वपूर्ण पहलू राजनीतिक उलटबांसियों और युद्ध के कुरुक्षेत्रों में फंसा है। देशों, धर्मों और विचारों में भले ही ईर्ष्या, द्वेष और वैमनस्य के ज्वालामुखी फटते रहें, सीमा पर लड़ाई जारी नहीं, तो शांति ही शांति! बिना रक्तपात के तख्ता पलट दिया गया तो शांति! तालिबान ने भी बिना युद्ध के सत्ता प्राप्त कर ली, वह भी स्थिति का लाभ उठाने वालों के लिए शांति का एक उदाहरण! आतंकवाद भी विश्व शांति का कदाचित ही उल्लंघन माना जाता है।
भयानक गरीबी, कुपोषण, भुखमरी, हत्याएं, बलात्कार, मानवाधिकारों का हनन आदि भी शायद ही शांति उल्लंघन के सूचक माने जाते हैं। और वनों का विनाश, वन्यजीवों की हत्याएं, पालतू पशुओं को भोजन, दवाइयों, सौंदर्य प्रसाधनों और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए हत्या तो शांति की परिधि में ही रखा जाता है। यह अपरिभाषित शांति, शांति का अर्ध सत्य है, जो अशांति से भी अधिक भयावह है। विश्व शांति की अवधारणा में निहित एक अधकचरा पहलू यह भी है कि इस पर मात्र मानव जाति का ही अधिकार है। मानव की, मानव के लिए, मानव द्वारा शांति। पृथ्वी के सभी अन्य प्राणियों को भी शांति की इतनी ही आवश्यकता है, जितनी मानव को। धरती पर लगभग 85 लाख जीवों में मानव एक है, और केवल एक की शांति के लिए अन्य सभी को शांतिपूर्ण दुनिया में सब दुख-संकट झेलने के लिए छोड़ दिया जाए, यह घोर अनैतिक है!


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