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संपादकीय

लेख@ देश में नशे के सौदागरों का बढ़ता जाल

भारत में नशे का संकट अब व्यक्तिगत बुराई नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आपदा बन चुका है। ड्रग माफिया, तस्करी, राजनीतिक संरक्षण और सामाजिक चुप्पी—सब मिलकर युवाओं को अंधकार में ढकेल रहे हैं। स्कूलों से लेकर गांवों तक नशे की जड़ें फैल चुकी हैं। यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, सोच और सभ्यता का संकट है। समाधान केवल कानून से नहीं,बल्कि सामूहिक चेतना, संवाद, …

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लेख@ पर्यावरण पर प्लास्टिक प्रदूषण का कसता शिकंजा

दुनियाभर में जितने भी आविष्कार हुए,वो मानवजाती के विकास में सहयोग हेतु हुए,परंतु मानव ने अपनी आवश्यकताओं की सीमा को तोड़कर मनमानी शुरू कर दी और अपने साथ ही समस्त जीव सृष्टि के लिए विनाश का बिगुल फूंक दिया। ऐसा ही प्लास्टिक प्रदूषण आज हमारे पृथ्वी के लिए बड़ी समस्या बना है। धरती, आकाश,जल,हवा संपूर्ण वातावरण में प्लास्टिक प्रदूषण ने …

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कविता @खुशकिस्मत हो आप

…खुशकिस्मत हो आप अगर आपके मां बापअभी भी जिंदा है और आप उनकी सेवा करते हो!खुशकिस्मत हो आप अगर विद्वान अध्यापकों से पढ़े होउनसे ज्ञान प्राप्त किया हुआ है उनसे अच्छे संस्कार लिए हैं।खुश किस्मत हो आप अगर आपके जान देने वाले मित्र हैंउनके साथ सुख-दुख बांटकरअपने मन का बोझ हल्का करते हो।खुशकिस्मत हो आप अगर आपकास्वास्थ्य बहुत अच्छा हैडॉक्टर …

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लेख@ ग्लोबल हिंसा-युद्ध बड़े शासकों की सनक का परिणामविस्तारवाद की चाहत में लगे विराम

किसी भी विचार या मुद्दों से असहमती के प्रतिफल में हिंसा या क्रूरता नहीं की जा सकती। विचारों से असहमति और हिंसा के विरोध में प्रतिहिंसा समस्या का हल नही हो सकता है। सबसे ताजा क्रूर और हिंसात्मक परिणाम फिलिस्तीन-इजरायल युद्ध के रूप में सामने आया है। जिसमें 20000 लोगों की जान चली गई और 50000 लोगों से ज्यादा घायल …

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लेख@ सुनो दस गुना चाहिए तो अपनाओं-छोटा सा उपाय

सुनो,सुनो,सुनो आखिर लालसा किसके भीतर नहीं होती हर किसी के भीतर दस गुना पाने की लालसा होती ही है। चाहे महिला हो या पुरुष संसार में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं की जिसमें लालसा ना समाई हो चाहे फिर तो कोई तपस्वी हो, साधू हो या आम इंसान हर कोई चाहता कि हम एक लगाएं तो उसके बदले हम दस …

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लेख@ नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं का बदलेगा पैटर्न

डाक्टर या इंजीनियर बनने की दौड़ में शामिल छात्रों की कोचिंग कक्षआओं पर दिनों-दिन बढ़ रही निर्भरता को लेकर शिक्षा मंत्रालय की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। वह बच्चों को रटने-रटाने के इस खेल से बाहर निकाल उन्हें स्कूली माहौल में पढ़ते व बढ़ते देखना चाहता है,जहां उनको पढ़ाई के साथ खेल-कूद जैसी दूसरी गतिविधियों के लिए भी समय मिलता है। …

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@ स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि 4 जुलाई पर विशेष लेख @स्वामी विवेकानंद:विचारों के युगदृष्टा,युवाओं के पथ प्रदर्शक

स्वामी विवेकानंद सदैव युवाओं के प्रेरणास्रोत और आदर्श व्यक्तित्व के धनी माने जाते रहे हैं, जिन्हें उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों के कारण ही जाना जाता है। वे आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि थे और खासकर भारतीय युवाओं के लिए उनसे बढ़कर भारतीय नवजागरण का अग्रदूत अन्य कोई नेता नहीं हो सकता। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे स्वामी …

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कविता @मीडिया वालों को मैने देखा है…

मीडिया वालों को लहंगा उठाकर नाचते हुएतो किसी को घाघरा पहनकरठुमका लगाते हुए सत्ता के दरबारों मेंशासन की नजरिया को पेश करते हुएआगे-आगे चलकरअपने ही बिरादरी वालों से रेस करते हुएकोई इशारों ही इशारों में नाच रहा हैतो कोई उनकी भाव को बढ़-चढ़के बाँच रहा हैकोई मदमस्त होकर झूम रहा हैतो कोई लेटकर चरण को चूम रहा हैकोई सत्यवादी का …

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कविता@तालमेल नहीं कर सकता …

कोठी बंगला झोंपड़ छप्पर से तालमेल नहीं कर सकता।शाने अमीरी प्यार गरीब से तालमेल नहीं कर सकता।पतझड़ में बहार का खिलना तालमेल नहीं कर सकता।बुढ़ापे में जवानी का आना तालमेल नहीं कर सकता।मधुपान जायका कड़वाहट तालमेल नहीं कर सकता।सज्जन से दुर्जन का संगत तालमेल नहीं कर सकता।मेहनती जोश आलस्य से तालमेल नहीं कर सकता।साधक राह बाधा मंजिल से तालमेल नहीं …

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लेख@ शांति से काम लें और असलियत को समझें

आज विज्ञान का युग इतना बढ़ गया है कि हर तरफ विज्ञान का डंका बजाने वाले देश अब विज्ञान से विनाश की ओर जा रहे हैं। आदमी सुबह उठता है रात में आराम करता है। बाद में जब घर आता है तो हर तरफ युद्ध का समाचार सुन-सुन कर बोर होने लगता है। इससे पहले था ब्लैक एंड वाइट टीवी …

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