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संपादकीय

अम्बिकापुर@खुला पत्र@सरकार किसी भी पार्टी की हो विधायक मंत्री कोई भी रहे पर कमियां लिखना या प्रकाशित करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए बड़ी चुनौती रहेगी

@ अखबार में ना छपे कमियां क्या इस वजह से मंत्री जी ने अखबार का रुकवाया शासकीय विज्ञापन?@ मंत्री जी अपनी कमियो को दूर करने के बजाए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दबाने का क्यों कर रहे प्रयास?@ क्या शासकीय विज्ञापन बिना अखबार नहीं चलेगा मंत्री जी…क्या यही सोच चुके है मंत्री?@ बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां भी …

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संपादकीय@मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पूरे देशके भाजपा नेताओं सहित अन्य दलों के नेताओं लिए बने मिसाल!

मुख्यमंत्री पद न मिलने के बावजूद भी अपने प्रदेश में भाजपा को लोकसभा चुनाव में भी दिलाई बड़ी जीत।जहां बड़ा पद न मिलने पर नेता अपने ही पार्टी को नुकसान पहुंचाते हैं वहीं शिवराज सिंह चौहान ने एक अलग ही मिसाल कायम कर दी।पद से हटाए जाने के बावजूद भी निस्वार्थ भाव से प्रदेश में भाजपा को  जिताया।राजनीति बड़ा रुतबा …

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संपादकीय@देश का चौथा स्तंभ डगमगा रहा है,बचाए कौन?

क्या आगे के तीन स्तंभ भी चौथे स्तंभ के लिए गंभीर नहीं?बचा लो चौथे स्तंभ को अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है,जिम्मेदार लोगों से है अपील!अख़बार और सरकार में से किसी एक को चुनना है, तो मैं कहूंगा कि सरकार चाहे न हो,लेकिन अख़बारों का अस्तित्व अवश्य रहे: थॉमस जेफरसन अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति लेख BY रवि सिंह। ये बात …

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संपादकीय@पत्रकारिता का गिरता स्तर आने वाले समय के लिए चिंताजनक!

गजब की पत्रकारिता,कोई प्रशासनिक अधिकारी के शादी का कार्ड बांट  रहा तो कोई नेता को लड्डू से तौल रहा है तो कोई विधायक का ड्राइवर बना…क्या यही है पत्रकारिता का स्तर?जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारियों की जी हुजूरी करना ही बन चुकी पत्रकारिता? लेख BY रवि सिंह:- पत्रकारिता का स्तर बहुत ज्यादा गिर चुका है या गिर रहा है, इन दिनों व्यापारी …

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ज्वलंत मुद्दे्@ कोचिंग सेंटरों को माफिया करार करके प्रतिबन्ध की जरूरत

-प्रियंका सौरभ-ज्वलंत मुद्दे्@देश भर में नियम विरुद्ध कोचिंग सेंटरों का धड़ल्ले से संचालन हो रहा है। सरकार ने कोचिंग संस्थान चलाने के लिए कोई ठोस बिल या नियम तक नहीं बना रखे हैं, बिना कानून के संचालित अधिकतर कोचिंग क्लासेस मामूली नियमों को ताक में रखकर मनमर्जी से मोटी फीस वसूल कर सेंटरों का संचालन कर रहे हैं। इतना ही …

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संपादकीय@विधायक का विरोध सरेआम न होकर क्या केवल मन में है?

बैकुंठपुर विधानसभा के कांग्रेसी वर्तमान विधायक के विरोध में हैं,लेकिन जब भी विरोध जताने का मौका मिला तो असफल क्यों रहे?वर्तमान विधायक से उपेक्षित  हैं अधिकांश कांग्रेसी नेता फिर भी अपनी उपेक्षा उच्च स्तरीय नेताओं को बता पाने में असमर्थ क्यों? लेख BY रवि सिंह। बैकुंठपुर विधायक को लेकर विधानसभा क्षेत्र की जनता में जितना असंतोष है उससे कहीं ज्यादा …

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संपादकीय@सामाजिक मतदाताओं को साधने के चक्कर में राजनीतिक पार्टियां कई बार औंधेमुँह गिरते दिखी हैं

राजनीति में अधिक जनसंख्या वाले समाज को साधना प्रथा बन चुकी है, ऐसा लगता है, लोकतंत्र में जनता का प्रतिनिधित्व नहीं किसी समाज का प्रतिनिधित्व चुना जा रहालोकतांत्रिक प्रक्रिया में समाज का नहीं जनता का प्रतिनिधित्व चुना जाता है, पर इस समय चुनाव के समीकरण अलग ही लहर में बह रहे हैंलोकतंत्र में जनता का प्रतिनिधित्व चुनने का प्रचलन खत्म …

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संपादकीय@बीजेपी प्रत्याशियों की घोषणा कर रही है और कांग्रेस बी फॉर्म भरा रही है

कांग्रेस में प्रत्याशियों की बढ़ती संख्या कांग्रेस के लिए ही घातक।बीजेपी की केंद्रीय कमेटी सीधे जारी कर रही है बिना फॉर्म भरे प्रत्याशियों की सूची।आखिर बीजेपी कराए गए सर्वे को मानकर तय कर रही है विधायक प्रत्याशियों सूची।बीजेपी में प्रदेश कमेटी को भी नहीं पता है सूची में किसका नाम होगा तय,जारी होने के बाद उन्हें भी चल रहा पता। …

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संपादकीय@चुनाव को बचे महज चार माह,उप मुख्यमंत्री बनने का फैसला आखिर क्यों लिया टी एस सिंहदेव ने?

मुख्यमंत्री का सपना संजोए टी एस सिंहदेव को आखिर किसने किया मजबूर,स्वीकार किया उप मुख्यमंत्री पद. क्या आने वाले चुनाव में टी एस सिंहदेव का चेहरा कांग्रेस छत्तीसगढ़ में रखेगी आगे? टी एस सिंहदेव को सरकार के आखिरी कार्यकाल में उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर प्रदेशवासी भी अचंभित क्या जन घोषणा पत्र के अब तक अधूरे वादों को पूरा करने …

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संपादकीय@कलेक्टर नाराज, एसपी नाराज और नाराज विधायकमंत्री…नाराजगी की वजह सिर्फ अपनी कमियों को ना पचा पाना

क्या पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी कान के कच्चे होते हैं?उच्च अधिकारियों के कान भरने में निचले स्तर के कर्मचारी क्यो होते हैं माहिर।क्या उच्च अधिकारी सही और गलत में फर्क नहीं कर पाते..जिस वजह से निचले स्तर के कर्मचारी उनके कान भरने में सफल हो जाते हैं?लेखा रवि सिंह:- राजनीति के बदलते परिवेश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का …

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