परमात्मा की भक्ति का मतलब है परमात्मा का सिमरन, चिंतन, मनन आदि में इतना लीन हो जाना कि व्यक्ति को दुनिया की सुध ही ना रहे। धर्म ,अर्थ ,काम… यह तीनों मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग है इनके बिना जीवन असंभव तो नहीं, कठिन जरूर है। हम सब जानते हैं कि हम सब यहां परमात्मा की मर्जी से आए …
Read More »संपादकीय
@मानवाधिकार दिवस पर आज विशेष @मानवता के लिए सार्थक बने मानवाधिकार दिवस
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 10 दिसम्बर 1948 को विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर प्रथम बार मानवाधिकार व मानव की बुनियादी मुक्ति पर घोषणा की थी। वर्ष 1950 में संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष की 10 दिसम्बर को विश्व मानवाधिकार दिवस मनाना तय किया था। 73 वर्ष पहले पारित हुआ विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र एक मील का पत्थर हैं। जिसने …
Read More »लेख@ बैन ड्रग्स के लिए युवाओं में बढती तलब
हाल ही में, एक जांच से पता चला है कि नशीली दवाओं की लत की महामारी, जो ज्यादातर युवा पुरुषों को प्रभावित कर रही है, पूरे भारत में फैल रही है। नशीली दवाओं का दुरुपयोग भारत में एक महत्त्वपूर्ण सामाजिक और स्वास्थ्य मुद्दा है। भारत की विविध आबादी, बड़ी युवा जनसांख्यिकी और आर्थिक असमानताएँ देश में नशीली दवाओं के दुरुपयोग …
Read More »@अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस आज विशेष@भ्रष्टाचार का दंश झेल कर संघर्षमय जीवन जीने को मजबूर
भ्रष्टाचार एक ऐसा अभिशाप है, जो देश के विकास में बाधा डालता है और विषमता, अन्याय, अशांति, गरीबी, बेरोजगारी, अपराध, कमजोर शासन प्रणाली आदि जैसी अनेक समस्याओं को बढ़ावा देता है। इससे सबसे बड़ा नुकसान गरीब तबके और काबिल लोगों को होता है, क्योंकि उन्हें बेहतर जीवनमान तक पहुंचने का अवसर नहीं मिलता, उनके हिस्से का लाभ किसी अन्य को …
Read More »@बलिदान दिवस विशेष@छत्तीसगढ़ का सपूत शहीद वीर नारायण सिंह
छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे भारत देश के मध्य प्रांत की धरा विरासत, रियासत, सियासत की रही है। मुगलों से लेकर ब्रिटिश शासन काल तक इस वीरता की धरा ने विदेशियों को खदेड़ते हुए, ईट का जवाब पत्थर से देने में कामयाब हुआ हैं। इतिहास सदैव वर्तमान का बाप होता है जब अपना खुद का पता ना हो तो बाप की …
Read More »लेख@ खतरनाक होता बायोमेडिकल वेस्ट
स्वास्थ्य सेवा गतिविधियों द्वारा उत्पन्न कुल अपशिष्ट में से लगभग 85त्न सामान्य, गैर-खतरनाक अपशिष्ट है। शेष 15 प्रतिशत को खतरनाक सामग्री माना जाता है जो संक्रामक, विषाक्त, कैंसरकारी, ज्वलन शील, संक्षारक, प्रतिक्रिया शील, विस्फोटक या रेडियोधर्मी हो सकता है। हर साल दुनिया भर में अनुमानित 16 बिलियन इंजेक्शन लगाए जाते हैं, लेकिन सभी सुइयों और सिरिंजों का उचित तरीके से …
Read More »लेख@ विपक्ष संभल पर आक्रमक तो बांग्लादेश पर खामोश क्यों
उत्तर प्रदेश के जिला संभल में जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसकी आहट सुप्रीम अदालत से नेताओं के विवादित बयानों से लेकर राजनैतिक गलियारों तक में सुनाई दे रही है। बीजेपी को छोड़कर सभी राजनैतिक दलों के नेता जामा मस्जिद और पत्थरबाजों के पैरोकार बनकर खड़े हो गये हैं। हाथ में पत्थर …
Read More »लेख@ वाहनों की पार्किं ग के संकट से जूझते शहर
यह ज़रूरी नहीं है कि अच्छा सार्वजनिक परिवहन यातायात की भीड़ को काफ़ी कम कर दे। भीड़भाड़ की स्थिति में सुधार करने के लिए, शहरों को निजी कारों के स्वामित्व और उपयोग के कार्यात्मक,मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक मूल्यों को लक्षित करने वाली गतिविधियों के साथ ही अपनी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को बेहतर बनाने के प्रयासों को मिलाकर काम करना होगा। वाहनों …
Read More »@लेख@ नन्हें बच्चों का कुपोषण देश का अभिशाप इस दिशा में गंभीर कब होंगे हम
बच्चे देश के भविष्य होते है। यदि देश का भविष्य ही कुपोषित रहेगा, कमजोर रहेगा तो सशक्त राष्ट्र की कल्पना करना बेमानी होगा। भारत में बच्चों के भुखमरी तथा कुपोषण एक बड़े अभिशाप की तरह सामने आ रहे हैं यह देश की एक प्रमुख समस्या भी है। देश में कुपोषण से बच्चे यानी आने वाले कल के जिम्मेदार नागरिकों की …
Read More »@भारत माँ के महान सपूत@शहीद खुदीराम बोस
शहीद खुदीराम बोस सबसे कम उम्र के क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने भारत में ब्रिटिश राज का विरोध किया था। शहीद खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर, 1889 को मोहोबनी, बंगाल में त्रैलोक्यनाथ बोस और लक्ष्मीप्रिया देवी के घर हुआ था। उनके पिता नेराजोल में तहसीलदार थे। खुदीराम अपने माता-पिता की चौथी संतान थे। उनका खुदीराम नाम सांस्कृतिक रीति-रिवाज खुद …
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