अम्बिकापुर ,10 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)।. चंद्रमा जब अपनी पूर्ण कलाओं के साथ अवतरित होता है तो उस दिन को शरद पूर्णिमा कहा जाता है पृथ्वी पर चारों और चंद्रमा की उजियारी फैली होती है पूरी धरा रोशनी में नहा रही प्रतीत होती है आज वही दिन है जब चंद्रमा की किरणों से अमृत की बरसात होती है स्वास्थ्य और अमृत्व की चाह में एक बार फिर खीर आदि को शरद चंद्र की चांदनी में रखकर उसे प्रसाद स्वरूप सेवन किया जाता है इसी क्रम में आज के इस पवित्र दिवस को महत्वपूर्ण बनाने की दृष्टि से संस्कार सेवा समिति अंबिकापुर द्वारा शरद पूर्णिमा के अवसर पर नगर में तीन स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किये गये. जिसमें जिले व नगर से सपरिवार आकर सैकड़ों लोग विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक व खेलों के कार्यक्रम में सहभागी बने देवीगंज रोड स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सह विभाग प्रचारक श्री खेमलाल जी ने कहा की इन कार्यक्रमो में सहभागिता से संस्कार व परिवार भाव पुष्ट होता है. प्रणव भवन सुभाषनगर में मुख्यवक्ता विभाग प्रचारक श्री हेमंत नाग जी ने शरद पूर्णिमा के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक कारणों का उल्लेख करते हुए उसके महत्व को रेखांकित किया. मुख्य अतिथि डॉ पुष्पेंद्र पटेल जी ने ऐसे कार्यक्रमो के माध्यम से बच्चों में होने विकास के प्रकारों का विश्लेषण कर अभिवावको को समझाईश भी दी.परशुराम मंदिर में मुख्य वक्ता के रूप में श्री राजेश तिवारी जी रहे एवं अध्यक्षता श्री गोविन्द ध्रुव ने की द्य इसे संयोग कहें या इंद्र देव भगवान की कृपा आज शरद पूर्णिमा के चांद में बादलों ने कोई अवरोध पैदा नहीं किया रात्रि पर्यंत खुले आसमान में शरद पूर्णिमा का चांद अपने पूरे यौवन के साथ देदीप्यमान हो रहा था इस अवसर पर तीनों स्थानों पर आयोजित सांस्कृतिक और खेल कार्यक्रमों के विजेता प्रतिभागियों को मंच से अतिथियों द्वारा पुरस्कार वितरण किया गया तथा उपस्थित सभी माता भाई-बहनों बच्चों ने भोजन व खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया !
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