- निजी व सरकारी अस्पताल फॉयर एंड सेफ्टी व्यवस्था प्रति क्यों है लापरवाह?
- अस्पताल में लोग अपनी जान बचाने के लिए जाते हैं पर वहीं पर जान का खतरा हो तो क्या करें?
- अस्पतालों में मरीजों का इलाज तो होता है पर उसी अस्पताल में यदि कोई दुर्घटना हो गई तो उसका जिम्मेदार कौन?
- क्या अस्पतालों में फॉयर एंड सेफ्टी की अच्छी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए,इससे पहले भी कई अस्पतालों में हो चुकी आगजनी जा चुकी जाने?
- फॉयर सेफ्टी ब्यवस्था पर ध्यान नहीं दुर्घटना की बनी रहती है आशंका।
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 08 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। अस्पताल निजी हो या सरकारी सभी जगह पर लोग स्वस्थ होने या अपनी जान बचाने के लिए जाते हैं पर क्या आप जानते हैं कि इन अस्पतालों में भी दुर्घटना हो सकती है और वह दुर्घटना क्या होगी यह सभी को पता है, कई बार ऐसी दुर्घटना हो चुकी है जब निजी व सरकारी अस्पतालों में आग लगी हो, पर फॉयर एंड सेफ्टी लेकर अस्पताल कितने सजग हैं यह तो वहां पर दिखने वाली व्यवस्था ही बताती है जिले में कोई भी अस्पताल फॉयर एंड सेफ्टी व्यवस्था पर खरा नहीं उतरता, यदि इसकी जांच हो जाए तो इस नियम पर कोई भी अस्पताल पूरी तरह फिट नहीं है, क्या अस्पताल को इस व्यवस्था को सुधारना नहीं चाहिए या इस व्यवस्था पर उनका ध्यान नहीं है, यह व्यवस्था आज के समय में काफी जरूरी है क्योंकि अस्पतालों में आगजनी जैसे मामले हो चुके हैं जिसे लेकर सचेत रहने की आवश्यकता है पर सचेत कैसे होंगे व्यवस्था को सुधार कर या फिर उस पर लापरवाही कर कर?
अक्सर देखा गया है की जब भी आम आदमी के जान की सुरक्षा की बात आती है तो वो चाहे निजी संस्था हो या फिर सरकारी, हर जगह बदहाली और लापरवाही ही नजर आती है। उसी से जुड़ी सुरक्षा के लिहाज से आग से बचाव को भी देखा जाताहै। फायर सेफ्टी सिस्टम, फैक्टि्रयों, अस्पतालों, सहित कई बड़े बड़े कर्म शालाओं पर विभिन्न कारणों से लगने वाली आग से बचाव का अपातकालीन विकल्प माना जाता है और जिसको लेकर सभी संस्थानों में आग से बचाव के लिए फायर सेफ्टी इक्यूपमेंट की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी होती है।
कोरिया में संचालित सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिस्टम है गायब
आपको बता दें की कोविड 19 कोरोना काल के दौरान राजधानी के एक निजी अस्पताल में आगजनी के कारण कई लोगों की जान चली गई थी। जिसके बाद शासन द्वारा पूरे प्रदेश में फॉयर सेफ्टी सिस्टम को अस्पतालों सहित सभी ऐसे संस्थानों में जहां इंसानों के समूह बड़े पैमाने पर कार्य करते हैं आग से बचाव के लिए व्यवस्था दुरुस्त करने कहा गया था। परंतु कोरिया जिले में संचालित लगभग निजी अस्पताल जहां पर मरीजों को भर्ती कर इलाज सहित कई गंभीर बीमारियों और प्रसव संबंधी ऑपरेशन तक किए जाते हैं। उनके सब के अपने बड़े बड़े बिल्डिंग सहित हाई वोल्टेज से चलने वाले चिकित्सा उपकरण भी होते हैं। खुद की लेबोर्ट्री भी होती है जहां पर कई जांचों में आग के लिए एलपीजी सिलेंडर का भी उपयोग किया जाता है, जिससे आग लगने सहित बड़ी बिल्डिंग में हमेशा शॉर्ट सर्किट से आग का खतरा बना रहता है। लेकिन मरीजों की जान से खेलवाड़ पर जहां प्रशासन भी इन निजी अस्पताल संचालकों को ढील दे रखा है तो वहीं ये अस्पताल संचालक भी फॉयर सेफ्टी सिस्टम की ब्यवस्था को लेकर बेहद लापरवाह बने हुए हैं।
आगजनी की बनी रहती है संभावना
पटना, जनकपुर, मनेंद्रगढ़, खड़गवां सहित जिला अस्पताल बैकुंठपुर जैसे सौ डेढ़ सौ बिस्तरीय अस्पताल जहां पर मरीजों से पूरे बेड भरे रहते हैं साथ ही जिला अस्पताल का सभी फ्लोर 24 घंटे आवाजाही से व्यस्त रहता है। आपको बता दें की उसी अस्पताल की ही बिल्डिंग में एक बहुत बड़ा मेस भी है जहां पर मरीजों का खाना बनता है और वहां पर भी बड़े पैमाने पर एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग होता है। यहां पर भी बिजली से चलने वाले चिकित्सा उपकरण का भंडार है। जिस पर भारी भरकम वोल्टेज लोड बराबर बना रहता है ऐसे में कभी भी शॉर्ट सर्किट की आग से बड़ी दुर्घटना हो सकती है।जिससे बचाव के लिए अस्पताल प्रबंधन द्वारा फॉयर सेफ्टी सिस्टम का विस्तार नहीं किया गया है। जबकि अगर कल्पना मात्र ही किसी वजह से ऐसे अस्पतालों में आग लग जाए तो अस्पताल की गहमा गहमी के बीच उन मरीजों की जान कैसे बचेगी जो अन्य कई बीमारियों के इलाज व प्रसव हेतु नियमित रूप से भर्ती रहते हैं और जिन्हे उठाने बैठाने के लिए सहारे की जरूरत पड़ती है बड़ा सवाल है।
क्या कहते हैं सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा
हम समय समय पर निजी अस्पताल, नर्सिंग होम के संचालकों को ऐसी सुरक्षा नियमों के परिपालन हेतु नोटिस देते रहते हैं। रही बात सरकारी अस्पतालों में तो जल्द ही फायर सेफ्टी सिस्टम को अपडेट किया जाएगा।
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