Breaking News

बैकुण्ठपुर@3.5 साल की कमियां 1.0 साल में हो पायेगीं दूर?

Share

  • क्या बचे हुए वर्ष में विधायक कर पाएंगी विधानसभा क्षेत्र में डैमेज कंट्रोल?
  • समय रेत की तरह फिसल रहा है,क्या काका के रास्ते पर चलकर बेहतर होगा बचे हुए वर्ष का कार्यकाल।
  • बीते हुए साढ़े तीन सालों में जनता से सीधा जुड़ाव कायम नहीं कर सकीं बैकुंठपुर विधायक।
  • जनता से दूरी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी से क्या चुनाव में खुद को जीत दिला सकेंगी विधायक।
  • जनता भी अब कहने लगी है विधायक चुनने में हुई गलती,क्या विधायक सुधार सकेंगी अपनी गलती?
  • जनता की उम्मीद 3.5 साल में अपने प्रतिनिधि से पूरी हुई या नहीं,जानने की मशक्कत हाट बाजारों तक?
  • क्या नए व अनुभवहीन लोगों के बीच घिरा महल और चापलूसी की राजनीति ने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया?

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 08 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। नए और अनुभवहीन लोगों के बीच घिरा महल और चापलूसी की राजनीति ने जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। जिसका परिणाम है कि कोरिया जिले में पर समय-समय पर आए विभिन्न संकट बगैर किसी समाधान के नासूर बनते गए। चाहे वह जिला विभाजन की बात रही हो, क्षेत्र के लिए विकास कार्यों की सौगात रही हो, चुनावों में राजनीतिक प्रभाविता की बात रही हो, भौगोलिक, राजनीतिक, सामाजिक और विकासपरक मूल्यों से कोरिया पिछड़ता चला गया। अब जब चुनावी दृष्टिकोण से पानी सर के ऊपर से जाने लगा, आंकड़े और अंदाजे विपरीत आने लगे, रणनीतियां फेल होती दिखाई देने लगीं, तो एक बार फिर आदरणीय कोरिया कुमार की शैली, छवि और उनके तौर-तरीकों को जनता के समक्ष दिखाने का प्रयास प्रारंभ किया जा रहा है। विगत कुछ दिनों से विधायक समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया में किए जा रहे हैं पोस्टों से यह पता चल रहा कि वर्तमान विधायिका हाट बाजारों में लोगों से मुलाकात करने के लिए निकल पड़ी हैं। यह डैमेज कंट्रोल की कवायद मात्र है या वास्तव में आम जनता की चिंता मात्र यह तो वे ही जानें, परंतु संशय इस बात का है की साढ़े 3 साल का कार्यकाल बीतने पर जब आम जनता की याद नहीं आई तो आगामी डेढ़ साल में नुकसान की भरपाई कितने प्रतिशत हो पाएगी? एक ओर जहां सरकार के आंतरिक सर्वे में आधे से अधिक विधायकों का परफॉर्मेंस कमजोर नजर आ रहा, पुनः आगामी चुनावों में उनके जीतने के संभावनाएं कम नजर आ रहीं, ऐसे में कई वर्तमान विधायकों पर टिकट कटने जैसी गाज गिर सकती है। ऐसा ना होने पाए इसके लिए कमजोर परफारमेंस वाले जनप्रतिनिधि एन केन प्रकारेण जनता के बीच अपनी धूमिल छवि को बेहतर करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए बैठे हैं।
कोरिया जिले की इकलौती विधायक जो अगले चुनाव से पहले ही तय हो जाएगा की जिले में एक ही विधानसभा शेष रह जायेगा आने वाले विधानसभा में क्या खुद को जीत दिला सकेंगी यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है? क्योंकि बीते वर्षों में विधायक से जनता और पार्टी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की दूरी खुलकर सामने देखने को मिली और पहली बार बैकुंठपुर विधानसभा के लोगों ने खुद को असहाय पाया, क्योंकि विधायक से संवाद साथ ही अपनी परेशानियों में विधायक का साथ उन्हें नहीं मिला। किसी प्रशासनिक अधिकारी की तरह विधायक का व्यवहार और दूरी कायम कर विधायक का बिता हुआ कार्यकाल यह बताता है कि बैकुंठपुर विधायक के लिए आगामी चुनाव बेहतर नहीं होने वाला है और उनकी स्थिति वर्तमान में बेहद कमजोर है चुनाव जीतने के मद्देनजर स्व डॉ रामचंद्र सिंहदेव के नक्शे कदम पर यदि विधायक चली होतीं तो शायद उनका आगामी विधानसभा में भी जितना सुनिश्चित होता। बैकुंठपुर विधायक अपने बीते हुए कार्यकाल को लेकर चुनाव के हिसाब से बहोत ही कमजोर स्थिति में हैं क्योंकि कई क्षेत्र तो विधानसभा के ऐसे हैं जहां विधायक की पहुंच ही इन साढ़े तीन सालों में नहीं हो सकी है।
बैकुंठपुर भौगोलिक दृष्टि व पहुंच मार्गों के आधार पर सबसे सुगम विधानसभा फिर भी जनता से दूरी क्यों?
बैकुंठपुर विधानसभा वैसे तो भौगोलिक दृष्टि से और पहुंच मार्गों के आधार पर सबसे सुगम विधानसभा है और यहां यदि चाहा जाए तो एकदिन में ही पूरे विधानसभा का चक्कर लगाया जा सकता है लेकिन बैकुंठपुर की वर्तमान विधायक पूरे साढ़े तीन सालों के बाद भी विधानसभा में संपर्क बना पाने में असफल रहीं हैं जो बड़ी समस्या उत्पन्न करने वाला विषय है उनके स्वयं के लिए। जिला विभाजन भी बैकुंठपुर विधायक के लिए एक ऐसा पहलू है जिसका दोष पूरी तरह उनपर जा रहा है और सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र जो बचरा पोड़ी क्षेत्र है उस क्षेत्र के लोगों को सबसे ज्यादा जिला विभाजन और मनेंद्रगढ़ जिले में शामिल होने का दुख हो रहा है और वे आक्रोशित हैं इस मामले को लेकर जो विधायक के खिलाफ ही माहौल को दर्शाता है। बचरा पोड़ी क्षेत्र को जिला मुख्यालय के हिसाब से सबसे सुगम पड़ने वाला मुख्यालय बैकुंठपुर ही था लेकिन अब उन्हें लंबी दूरी तय कर मनेंद्रगढ़ जाना पड़ेगा जिसको लेकर वहां के लोग नाराज हैं। मामले में जिस आदिवासी समुदाय के लोग एकजुट होकर बचरा पोड़ी को कोरिया जिले में शामिल करने का प्रयास कर रहे थे आंदोलन कर रहे थे उन्हें भी मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान उनके ओएसडी के माध्यम से शांत करा दिया गया जो आदिवासी समाज के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान संभव हो सका।
मामला अभी सुलगती हुई अंगीठी जैसा
जिला विभाजन के मुद्दे को मुख्यमंत्री के प्रवास के दौरान बचरा पोड़ी के लोग न उठाएं यह जिम्मेदारी उनके ओएसडी ने सम्हाली थी जो मुख्यमंत्री के आगमन से पहले और उनके प्रस्थान तक जिले में डटे रहे और मामले पर नियंत्रण बनाये रखा लेकिन मामला अभी सुलगती हुई अंगीठी जैसा है और जिसमें चुनावी हवा पड़ेगी तो वह सुलग उठेगी और विधायक को नुकसान जरूर होगा ऐसा माना जा रहा है। विधायक के सिपहसालारों की कारस्तानियों की वजह से भी विधायक को चुनाव में दिक्कतें आएंगी क्योंकि विधायक के साथ चलने और रहने वालों ने किसी से मधुर संबंध स्थापित नहीं किये और ज्यादातर लोग नाराज ही हैं और ऐसे में उनकी दिक्कतें चुनाव में बढ़ेंगी जो उनके लिए परेशानी का सबब बनेंगी।
विधायक क्षेत्र में जनसंपर्क को लेकर बहुत ही पिछड़ड़ चुकी हैं
विधायक क्षेत्र में जनसंपर्क को लेकर बहोत ही पिछड़ चुकी हैं और बचे हुए वर्ष में वह कितना जनसम्पर्क कर पाती हैं और कितने लोगों को अपने पक्ष में कर पाती हैं यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन विधायक के पास गांव गांव में कार्यकर्ताओं की कमी की समस्या जरूर बनी हुई है जो चुनाव में दिक्कत का विषय बनेगा। स्व डॉ रामचंद्र सिंहदेव की विरासत सम्हाल रही विधायक के पास फिलहाल वरिष्ठ कांग्रेसियों की भी कमी महसूस की जा रही है क्योंकि विधायक ने वरिष्ठ कांग्रेसजनों को कभी बेहतर तव्वजो नहीं प्रदान की, बैकुंठपुर विधानसभा में स्व डॉ रामचंद्र सिंहदेव व भइया लाल राजवाड़े का कार्यकाल जनता ने देखा है और उसके बाद वर्तमान विधायक का भी कार्यकाल लोग देख रहें हैं और दबी जबान में सभी का कहना है कि जनप्रतिनिधियों में इनके पहले के दोनों की तरह के जनप्रतिनिधि बेहतर थे और जो जनता से सीधा जुड़ाव कायम रखते थे वर्तमान विधायक का जन सरोकारों से ज्यादा वास्ता नहीं होता यह हमेशा सुनाई देने वाली बात हो चुकी है।
स्व डॉ रामचन्द्र सिंहदेव के कारण क्या दूसरी बार मौका जनता वारिश समझकर देगी?
चुनाव को ज्यादा समय नहीं बचे हैं विधानसभा क्षेत्र में विधायक लगातार पिछड़ रहीं हैं और जनता से दूर हो रहीं हैं अब देखना है कि विधायक बचे हुए समय मे कितना मेहनत कर पाती हैं और कितने लोगों को अपने साथ जोड़ पाती हैं क्योंकि लोगों की राय विपरीत ही सुनाई दे रही है। स्व डॉ रामचन्द्र सिंहदेव के कारण क्या उन्हें दूसरी बार मौका जनता वारिश समझकर देगी या नहीं देगी यह तो जनता तय करेगी और सामने आएगा लेकिन अभी से विधायक होशियार नहीं हुईं तो वह दौड़ से ही बाहर न हो जाएं इसबात का अंदेशा सबसे ज्यादा है।
स्वर्गीय रामचंद्र सिंहदेव कभी भी अपनी राजनीति महल से संचालित नहीं की
कोरिया कुमार अर्थात स्वर्गीय रामचंद्र सिंहदेव किसी पहचान के मोहताज नहीं थे। पूरा कोरिया इन्हें भाग्य विधाता के रूप में जानता समझता रहा था। राजा होने के बावजूद इनकी सादगी, सरलता, मनमोहक छवि, जीवन शैली, रहन-सहन और पहनावा सदा से इन्हें आम जनता से जोड़े रखा। क्षेत्र की जनता ने सदैव इन में अपना राजा देखा, परंतु इन्होंने क्षेत्र की जनता को कभी प्रजा ना समझकर अपना साथी ही समझा। लोगों के सुख दुख में शामिल होना, उनकी समस्याएं सुनना, निराकरण का प्रयास करना, जनता से रूबरू मुलाकात करना, कोरिया कुमार के जीवन शैली का अभिन्न हिस्सा रहा। उन्होंने कभी भी अपनी राजनीति महल से संचालित नहीं की, अपितु सदैव लोगों के बीच में उपस्थित रहे। गांव गांव भ्रमण करना, हाट बाजारों में लोगों से मिलना, बातचीत के माध्यम से, डांट और दुलार दोनों माध्यम से जनता के बीच संवाद स्थापित करना कोरिया कुमार की राजनीतिक शैली की विशिष्टता रही, जिसके कारण उन्हें अलग पहचान मिली।
स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से संन्यास
स्वास्थ्य कारणों से राजनीति से संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपनी भतीजी को क्षेत्र की सेवा करने का अवसर दिया। विगत विधानसभा चुनाव में यह बात भी बार-बार लोगों के द्वारा दोहराई गई की वर्तमान विधायिका काका साहब की परछाई हैं। क्षेत्र की जनता ने इसी उम्मीद में अपने जनसेवी‌ हरवाहे को छोड़कर कोरिया कुमार की छवि पर मुहर भी लगाई। परंतु राजनीति और सेवा की जो शैली कुमार साहब के भीतर थी, वह विगत 3.5 वर्षों में जनता को नजर नहीं आया। ऐसा इसलिए कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि का पूरे कार्यकाल में ना तो जनता से सीधा जुड़ाव हुआ ना वे जनता के बीच गईं। सत्ता, शासन और राजनीति का केंद्र महल के कमरे बन गए। जो आम लोगों की पहुंच के बाहर होता गया। जनता तो जनता, सत्ता पक्ष के सीनियर पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी दरकिनार कर दिए गए।


Share

Check Also

बलरामपुर@ बलरामपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

Share 12 घंटे में 22 स्थायी वारंटी गिरफ्तार,वर्षों से फरार आरोपी भी पकड़ेबलरामपुर,01 जून 2026 …

Leave a Reply