अवमानना मामला
नयी दिल्ली,11 जुलाई 2022। सुप्रीमकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को अदालत की अवमानना के मामले मे सोमवार को चार महीने की सजा सुनाई। जस्टिस यू. यू. ललित की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि ‘कानून का शासन बनाए रखने के लिए अवमानना करने वाले को उचित सजा दिया जाना जरूरी है। पीठ ने मामले मे माल्या पर 2000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। माल्या 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के बैक ऋण धोखाधड़ी मामले मे आरोपी है। पीठ ने कहा, ” रिकॉर्ड मे दर्ज तथ्यो एव परिस्थितियो और इस बात पर गौर करने के बाद कि अवमानना करने वाले ने अपने किए पर न कोई पछतावा जताया और ना ही उसके लिए माफी मागी, हम उसे चार महीने की सजा सुनाते है और उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाते है। पीठ ने कहा कि माल्या पर लगाया गया दो हजार रुपये का जुर्माना चार सप्ताह के भीतर शीर्ष अदालत की ‘रजिस्ट्री मे जमा किया जाए और राशि जमा होने के बाद उसे उच्चतम न्यायालय कानूनी सेवा समिति को हस्तातरित कर दिया जाए। पीठ ने कहा, ‘जुर्माना राशि निर्धारित समय मे जमा न करवाने पर, अवमानना करने वाले को अतिरिक्त दो महीने जेल मे बिताने होगे। अदालत ने इस मामले मे सजा की अवधि तय करने सबधी अपना फैसला 10 मार्च को सुरक्षित रख लिया था और टिप्पणी की थी कि माल्या के खिलाफ सुनवाई मे अब कोई प्रगति नही हो सकती। माल्या को अवमानना के लिए 2017 मे दोषी ठहराया गया था। शीर्ष अदालत ने 2017 के फैसले पर पुनर्विचार के लिए माल्या की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका 2020 मे खारिज कर दी थी। न्यायालय ने अदालती आदेशो को धता बताकर अपने बच्चो के खातो मे चार करोड़ डॉलर भेजने को लेकर उन्हे अवमानना का दोषी ठहराया था। माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन मे रह रहे है।
18 अप्रैल 2017 को स्कॉटलैड यार्ड ने प्रत्यर्पण वारट पर उन्हे जमानत दी थी।
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