नयी दिल्ली,11 जुलाई 2022। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि केद्र पुर्तगाल के समक्ष जताई गई अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने और 1993 के मुबई बम धमाको के मामले मे गैगस्टर अबू सलेम की 25 साल की सजा पूरी होने पर उसे रिहा करने के लिए बाध्य है।सलेम ने कहा था कि 2002 मे उसके प्रत्यर्पण के लिए भारत द्वारा पुर्तगाल को दिए गए एक आश्वासन के अनुसार उसकी सजा 25 साल से अधिक नही हो सकती है।
न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुदरेश की पीठ ने कहा कि केद्र सरकार सविधान के अनुच्छेद 72 के तहत शक्ति के प्रयोग और सजा पूरी होने को लेकर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के तहत भारत के राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए बाध्य है। पीठ ने कहा, आवश्यक कागजात 25 वर्ष पूरे होने के एक महीने के अदर आगे बढ़ाए जाए। वास्तव मे, सरकार 25 साल पूरे होने पर एक महीने की समयावधि के भीतर सीआरपीसी के तहत छूट के अधिकार का प्रयोग कर सकती है।एक विशेष टाडा अदालत ने 25 फरवरी 2015 को सलेम को, 1995 मे मुबई के बिल्डर प्रदीप जैन की उसके ड्राइवर मेहदी हसन के साथ हत्या करने के एक अन्य मामले मे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
मुबई मे 1993 के श्रृखलाबद्ध बम धमाको के दोषियो मे से एक सलेम को लबी कानूनी लड़ाई के बाद 11 नवबर, 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था।
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