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नई दिल्ली@रिटायर्ड शिक्षक ने सविधान के लिए बनवाया मदिर,हमेशा जलता रहता है तेल का दिया,बाटा जाता है प्रसाद

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नई दिल्ली, 07 जुलाई 2022। आप लोग अपने आसपास या फिर घरो मे देवी-देवताओ की पूजा करते हुए बहुतो को देखा होगा लेकिन, शायद ही किसी को देश की सविधान की पूजा करते हुए देखा हो। केरल की राजधानी तिरुवनतपुरम के रहने वाले शिवदासन पिल्लई सविधान की पूजा के लिए न केवल एक छोटा सा मदिर बनवाया है बल्कि हमेशा एक तेल का दिया भी जलाते है। पिल्लई ठीक वैसे ही सविधान की पूजा करते है जैसे लोग अपने घरो मे देवी-देवाताओ की पूजा करते है। 71 साल के पिल्लई शिक्षक थे और छात्रो को सामाजिक विज्ञान पढ़ते थे। बुधवार को केरल के मत्री साजी चेरियन को सविधान के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर इस्तीफा देना पड़ा है।
पिल्लई से जब सवाल किया गया तो उन्होने कहा, ‘मेरे लिए देश का सविधान भगवान है और मै इसकी पूजा करता हू। यह हमारे देश, हमारे भाईचारे, विविधता और भविष्य का आधार है। मै अपने भगवान के आदर्शो का पालन-पोषण करना चाहता हू इसलिए मैने मदिर का निर्माण कराया है।’ पिल्लई ने कहा कि एक साल पहले उन्होने घर के सविधान नाम के मदिर का निर्माण किया।
मदिर मे पहुचने वाले को प्रसाद भी देते है
यही नही, मदिर मे पहुचने वाले को पिल्लई प्रसाद भी देते है। मदिर पर एक पोस्टर चिपका हुआ है जिसपर मलयालम मे लिखा है कि सविधान भगवान है और यह इस घर की समृद्धि है। मदिर का आकार बहुत बड़ा नही है। मदिर मे राष्ट्रपिता महात्मा गाधी, विवेकानद, बी आर अबेडकर और नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई की तस्वीरे लगी हुी है। वही, मदिर की दीवार पर सविधान की प्रस्तावना उकेरी गई है। प्रस्तावना के अलावा, एक बड़ा बोर्ड भी लगाया गया है जो बताता है कि इस मदिर को क्यो बनाया गया था।
पिल्लई कहते है कि नई पीढ़ी को हमारे सविधान के बारे मे कोई जानकारी नही है। उनके लिए स्वतत्रता दिवस और गणतत्र दिवस केवल छुट्टिया है। मेरा छोटा सा प्रयास सविधान की भावना को जगाना और उन्हे सशक्त बनाना है। मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि अगर हम इसे लेकर चले तो देश मे कभी कोई सघर्ष या समस्या नही हो सकती है।
देश मे शिक्षा कैरियर ओरिएटेड हो गया
उन्होने कहा कि इन दिनो देश मे शिक्षा कैरियर ओरिएटेड हो गया है जिसकी वजह से अक्सर मूल्य पीछे हट जाते है। मै आधुनिक शिक्षा के खिलाफ नही हू लेकिन, एक व्यक्ति एक बेहतर नागरिक कैसे हो सकता है, इसके सबक आजकल गायब है। हमे आधुनिकता और मूल्यो के उचित मिश्रण की जरूरत है। पिल्लई ने बताया कि वो और उनकी पत्नी जो एक सेवानिवृा सरकारी कर्मचारी भी है, अपनी पेशन का एक बड़ा हिस्सा बच्चो को मुफ्त मे पढ़ाने पर खर्च करते है।
बच्चो मे जानने
का स्वभाग गायब हो गया है
पिल्लई ने आगे कहा, मुझे लगता है कि हमारे बच्चो मे किसी चीज को जानन वाला स्वभाव वास्तव मे गायब हो गया है। वे सवाल पूछने से डरते है और शिक्षक जो कहते है उसी के साथ समझौता कर लेते है। हमे बेहतर नागरिक तैयार करने है। मुझे लगता है कि हमारा सविधान बाइबिल है। यह दुनिया के सबसे अच्छे सविधानो मे से एक है।


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