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सूरजपुर@दीपावली में विभाग की नींद खुली,बाकी साल मिलावट पर निगरानी कौन करेगा?

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  • नमूने आज,रिपोर्ट कल…तब तक बिक चुकी होंगी मिठाइयां!
  • खाद्य सुरक्षा का त्योहार स्पेशल अभियान,सालभर की निगरानी पर बड़ा सवाल
  • मिठाइयों की शुद्धता जांचने निकला विभाग,अब रिपोर्ट और कार्रवाई का इम्तिहान
  • सैंपल लेकर जिम्मेदारी पूरी? सूरजपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली कठघरे में…
  • त्योहार में जागता है खाद्य सुरक्षा विभाग, बाकी 11 महीने किसके भरोसे जनता की सेहत?
  • दीपावली आते ही मिठाइयों की शुद्धता याद आई, दुकानों से नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे…
  • रिपोर्ट आने तक त्योहार गुजरने का अंदेशा, कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस और आश्वासन?
  • सूरजपुर में खाद्य सुरक्षा अभियान की औपचारिकता पर सवाल,नियमित जांच और कथित मासिक लेन-देन के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी


-ओंकार पाण्डेय-
सूरजपुर,05 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
त्योहार आया तो खाद्य सुरक्षा विभाग भी जाग गया! दीपावली नजदीक आते ही अचानक अधिकारियों को मिठाइयों की शुद्धता, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और आम नागरिकों की सेहत की चिंता सताने लगी,टीम मैदान में उतरी, दुकानों का निरीक्षण हुआ, मिठाइयों के नमूने लिए गए और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजने की कार्रवाई शुरू हो गई, विभाग की ओर से अभियान की जानकारी भी जारी कर दी गई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल त्योहारों के आसपास निरीक्षण और नमूना संग्रहण तक सीमित रह गई है? साल के बाकी दिनों में आम नागरिक जो मिठाइयां, नाश्ता और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते हैं, उनकी गुणवत्ता की निगरानी कौन करता है? सूरजपुर जिले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की मौजूदा सक्रियता ने एक बार फिर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, हर बार त्योहार के आसपास विशेष जांच अभियान शुरू होता है, कुछ दुकानों का निरीक्षण किया जाता है,नमूने लिए जाते हैं और फिर जांच रिपोर्ट का इंतजार शुरू हो जाता है,लेकिन जब तक प्रयोगशाला से रिपोर्ट आती है, तब तक त्योहार का प्रमुख समय निकल जाने की आशंका रहती है,ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या गंभीर गुणवत्ता संबंधी कमी पाई जाती है,तो उस रिपोर्ट का त्योहार के दौरान खरीदारी कर चुके उपभोक्ताओं के लिए क्या महत्व रह जाएगा?
नमूने लिए, अब रिपोर्ट का इंतजार—तब तक ग्राहक क्या करें?
खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कलेक्टर रेना जमील और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रशांत सिंह के निर्देशन तथा अभिहित अधिकारी श्रीमती पुष्पा राज चौहान के मार्गदर्शन में विशेष अभियान चलाया जा रहा है,खाद्य सुरक्षा अधिकारी रामप्रकाश जायसवाल और दीपा साहू ने बिश्रामपुर क्षेत्र के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर मिठाइयों के नमूने संग्रहित किए,सूरजपुर के पंडित स्वीट्स,बंसल स्वीट्स, गोलू स्वीट्स सहित अन्य प्रतिष्ठानों से भी नमूने लिए गए,भैयाथान क्षेत्र के यादव होटल का निरीक्षण कर मिष्ठानों के नमूने संग्रहित किए गए तथा पाई गई कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए,वहीं सूरजपुर विकासखंड में एक प्रतिष्ठान के किचन में साफ-सफाई की कमी पाए जाने पर सुधार सूचना जारी किए जाने की बात भी विभाग ने कही है,निर्धारित समय-सीमा में सुधार नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, यहां सवाल प्रतिष्ठानों के नाम या नमूने लेने की कार्रवाई पर नहीं,बल्कि उसके परिणाम पर है, जिन नमूनों को जांच के लिए भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट कब आएगी? यदि रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई होगी या फिर मामला नोटिस और जवाबी प्रक्रिया में उलझकर रह जाएगा? उपभोक्ताओं को यह जानकारी कैसे मिलेगी कि उन्होंने जो सामग्री खरीदी थी,वह निर्धारित मानकों के अनुरूप थी या नहीं?
जनता की सेहत से बड़ा कोई त्योहार नहीं…
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अभियान निरंतर जारी रखने की बात कही है,लेकिन जिले के नागरिकों को केवल यह भरोसा दिलाना पर्याप्त नहीं कि नमूने लिए जा रहे हैं, उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी पूरे वर्ष हो रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जा रही है, कलेक्टर और संबंधित विभागीय अधिकारियों को इस अभियान की समीक्षा कर नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए,नमूनों की जांच में अनावश्यक देरी रोकने,रिपोर्ट समय पर प्राप्त करने और परिणाम के आधार पर कार्रवाई करने की समयबद्ध व्यवस्था भी जरूरी है, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सूरजपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता दीपावली की मिठाइयों तक ही सीमित रहेगी? क्या त्योहार खत्म होते ही निरीक्षण और शुद्धता की चिंता भी ठंडे बस्ते में चली जाएगी? आम नागरिकों को त्योहारों में केवल शुद्धता का आश्वासन नहीं, बल्कि साल के 365 दिन सुरक्षित खाद्य सामग्री मिलने का भरोसा चाहिए, विभाग को यह साबित करना होगा कि उसकी जिम्मेदारी सिर्फ नमूने लेने और विज्ञप्ति जारी करने तक नहीं, बल्कि मिलावट पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों को जवाबदेह बनाने तक है।
त्योहारों में ही क्यों याद आती है शुद्धता?
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता कोई मौसमी मुद्दा नहीं है, मिठाई की दुकान हो, होटल हो, रेस्टोरेंट हो या नमकीन और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाला प्रतिष्ठान—हर जगह स्वच्छता और निर्धारित मानकों का पालन पूरे वर्ष जरूरी है,इसके बावजूद विभाग की सक्रियता अक्सर दीपावली,होली और अन्य बड़े त्योहारों के आसपास ही अधिक दिखाई देती है,सवाल यह है कि क्या जिले में सामान्य दिनों में भी इसी गंभीरता से निरीक्षण किया जाता है? कितने खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच होती है? कितने नमूने लिए जाते हैं? कितने मामलों में मिलावट या अमानक खाद्य सामग्री की पुष्टि हुई और कितने संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई की गई? विभाग के पास यदि इन सवालों के जवाब हैं तो उन्हें सार्वजनिक करने में परेशानी क्यों होनी चाहिए? केवल त्योहारों में कुछ दुकानों पर पहुंचकर नमूने लेना और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देना खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं हो सकता।
नमूना संग्रहण ही उपलब्धि है तो कार्रवाई कौन करेगा?
खाद्य सुरक्षा अभियान की सफलता नमूनों की संख्या गिनने से तय नहीं होती, वास्तविक सफलता तब होगी, जब अमानक खाद्य सामग्री की पहचान हो, दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए नियमित निगरानी की व्यवस्था बने,यदि किसी प्रतिष्ठान में साफ-सफाई की कमी मिलती है तो केवल सुधार सूचना जारी कर देना पर्याप्त नहीं होना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि निर्धारित समय में सुधार हुआ या नहीं,इसी तरह नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सामने आना चाहिए,विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले एक वर्ष में कितने नमूने लिए गए,कितने नमूने अमानक पाए गए,कितने मामलों में नोटिस जारी हुए,कितने प्रकरणों में जुर्माना लगाया गया और कितने मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई की गई, इन आंकड़ों से ही पता चलेगा कि विभाग की कार्रवाई वास्तव में कितनी प्रभावी रही।
कथित मासिक लेन-देन की चर्चा, निष्पक्ष जांच से ही खुलेगी सच्चाई…
खाद्य प्रतिष्ठानों और विभागीय अमले के बीच कथित सांठगांठ तथा कुछ प्रतिष्ठानों से मासिक आर्थिक लाभ पहुंचाए जाने जैसी चर्चाएं भी समय-समय पर उठती रही हैं,आरोप यह भी लगाए जाते हैं कि कुछ प्रतिष्ठानों को नियमित निरीक्षण और कार्रवाई से राहत मिलती है,हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए ठोस साक्ष्य और निष्पक्ष जांच आवश्यक है,लेकिन इन चर्चाओं को नजरअंदाज करना भी विभागीय पारदर्शिता के हित में नहीं है,यदि कहीं ऐसी शिकायतें हैं तो जिला प्रशासन को उनकी जांच करानी चाहिए, निरीक्षण की तारीख, संबंधित अधिकारी,लिए गए नमूने, प्रयोगशाला रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई या कथित मिलीभगत की आशंका समाप्त हो सके।


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