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रायपुर@डीएमएफ घोटाले में 31 करोड़ की संपत्ति अटैच…17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश,अब तक 4 गिरफ्तार

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रायपुर,31 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के डीएमएफ फंड घोटाले में ईडी ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने आरोपियों की 31.70 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां अटैच की है। इसके लिए 29 अक्टूबर 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया। वहीं, 30 अक्टूबर को कारोबारी सतपाल सिंह चाबड़ा, मंदीप चावला समेत 17 आरोपियों के खिलाफ रायपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पूरक चार्जशीट दाखिल की है। ईडी की जांच में सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों के सिंडिकेट के जरिए डीएमएफ फंड के काम दिलाने के बदले 25 से 50′ तक कमीशन वसूलने का खुलासा हुआ है। एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में अब तक करीब 50 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की जा चुकी है और आईएएस अधिकारी रानू साहू समेत चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।
यह मामला छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के जरिए डीएमएफ फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। ईडी की जांच में सामने आया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के विकास और कल्याण के लिए इस्तेमाल होने वाली राशि का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया।
सरकारी कर्मचारियों और बिचौलियों का सिंडिकेट सक्रिय : ईडी के मुताबिक, इस पूरे मामले में सरकारी कर्मचारी और एजेंट-बिचौलियों का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। इस सिंडिकेट के जरिए डीएमएफ फंड से ऐसे काम मंजूर कराए जाते थे, जिनमें सामान की सप्लाई होनी थी। इन कामों में सामान की कीमत बढ़ाकर दिखाई जाती थी और इसके बदले कंपनियों से मोटा कमीशन लिया जाता था।
जांच में पता चला कि रेट कॉन्ट्रैक्ट होल्डर कंपनियों को जारी किए गए परचेज ऑर्डर की मूल कीमत पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता था। इस कमीशन का बड़ा हिस्सा सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। इसके बदले डीएमएफ फंड से काम आवंटित कराने, परचेज ऑर्डर जारी कराने और भुगतान जारी कराने में मदद की जाती थी। ईडी के अनुसार, कमीशन की रकम नकद और बैंक खातों के जरिए ली जाती थी। बाद में अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के माध्यम से इस पैसे को दूसरी जगह भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि बीज निगम के जरिए डीएमएफ के अलावा दूसरे सरकारी फंड से सामान खरीदने में भी इसी तरह कमीशन लिया जाता था। ईडी की जांच में कारोबारी सतपाल सिंह चाबड़ा की भूमिका मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक के रूप में सामने आई है।


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