- पंजीयन प्रमाणपत्र का क्यूआर कोड स्कैन करने पर दूसरे व्यक्ति का निकला दस्तावेज
- डॉक्टर के साथ सीपाका कंपनी के खिलाफ भी एफआईआर की मांग
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,31 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शहर के गांधीनगर स्थित श्री महावीर हॉस्पिटल में कार्यरत एक डॉक्टर की शैक्षणिक योग्यता और पंजीयन प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में डॉक्टर नुरैल आलम का पंजीयन प्रमाणपत्र संदिग्ध पाया गया है। प्रमाण-पत्र पर अंकित क्यूआर कोड स्कैन करने पर वह झारखंड निवासी किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिला। मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने डॉक्टर और उसे अस्पताल में उपलब्ध कराने वाली कंपनी सीपाका हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस को पत्र लिखा है। सीएमएचओ डॉ. जगसाय राम सरोता ने 28 अक्टूबर को गांधीनगर थाना प्रभारी को इस संबंध में पत्र भेजा है। पत्र में बताया गया है कि 16 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने साईं मंदिर के पास स्थित महावीर हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने वहां कार्यरत चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता और पंजीयन से संबंधित दस्तावेज निरीक्षण दल को उपलब्ध कराए थे।
क्यूआर कोड स्कैन करने पर सामने आई गड़बड़ी : स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की तो अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर नुरैल आलम के पंजीयन प्रमाणपत्र में गड़बड़ी सामने आई। प्रमाणपत्र पर अंकित क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह झारखंड के रांची जिले के निवासी अमरेश कुमार, पिता अभिनंदन कुमार के नाम पर दर्ज मिला। विभागीय जांच में सामने आए इस अंतर के आधार पर आशंका जताई गई है कि डॉक्टर नुरैल आलम ने अमरेश कुमार के पंजीयन प्रमाणपत्र में कूटरचना कर उसका उपयोग किया है। हालांकि,इस संबंध में अंतिम पुष्टि पुलिस की जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।
आउटसोर्स कंपनी की भूमिका भी जांच के दायरे में : सीएमएचओ ने अपने पत्र में बताया है कि डॉक्टर नुरैल आलम को सीपाका हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने आउटसोर्स के माध्यम से महावीर हॉस्पिटल में कार्य करने के लिए उपलब्ध कराया था। ऐसे में विभाग ने डॉक्टर के साथ संबंधित कंपनी के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। सीएमएचओ कार्यालय के पत्र पर कलेक्टर सरगुजा का अनुमोदन भी दर्ज है। अब पुलिस की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी पंजीयन प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कैसे किया गया।
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