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बैकुण्ठपुर@ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति पर गंभीर सवाल,कलेक्टर से कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग

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गरीबी रेखा प्रमाण-पत्र,राशन कार्ड और अनुभव प्रमाण-पत्र की वैधता पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल,नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

  • रवि सिंह-
    बैकुण्ठपुर,31 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
    कोरिया जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति को लेकर कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है,इस संबंध में जिला कलेक्टर को शिकायत सौंपकर नियुक्ति में प्रस्तुत दस्तावेजों की वैधता की जांच कराने और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है,शिकायत में गरीबी रेखा प्रमाणपत्र, राशन कार्ड और अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठाए गए हैं,मामला सामने आने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता की जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
    शिकायतकर्ता रेखा सिंह,पति रामाशंकर सिंह, निवासी ग्राम जमनीपारा,खेरवट वार्ड क्रमांक 18,थाना चरचा, तहसील बैकुंठपुर,जिला कोरिया ने कलेक्टर को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों में कथित अनियमितताएं हैं, शिकायत के अनुसार,परियोजना अधिकारी,एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना बैकुंठपुर द्वारा 7 जुलाई 2026 को जारी नियुक्ति आदेश के संबंध में दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है।
    गरीबी रेखा प्रमाण-पत्र और राशन कार्ड पर उठाए सवाल…
    शिकायत में धनश्वरी राजवाड़े के गरीबी रेखा प्रमाण-पत्र और राशन कार्ड से संबंधित विवरण पर सवाल उठाए गए हैं, आवेदन के अनुसार,गरीबी रेखा प्रमाण-पत्र के संबंध में वर्ष 2002 की सर्वे सूची में दर्ज सरल क्रमांक 17020 का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ता ने इसकी पात्रता और सत्यता की जांच कराने की मांग की है,शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति की पात्रता निर्धारित करने से पहले संबंधित अभिलेखों का मिलान किया जाना आवश्यक है,आवेदन में राशन कार्ड, गरीबी रेखा प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के जारी होने की प्रक्रिया की जांच कराने का आग्रह किया गया है,हालांकि,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों से नहीं होती, इसलिए प्रमाण-पत्रों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागों के मूल अभिलेखों और आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    अनुभव प्रमाण-पत्र की वैधता भी जांच के दायरे में…
    शिकायत में अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं,आवेदन में दावा किया गया है कि धनश्वरी राजवाड़े द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र की वैधता संदिग्ध है, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रमाण-पत्र में दर्ज अनुभव और संबंधित कार्यालय में पदस्थापना के विवरण का सत्यापन किया जाना चाहिए,आवेदन में बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड के अंतर्गत एक घर में एक अप्रैल 2009 से 30 मई 2011 तक कार्य करने के अनुभव का उल्लेख किए जाने की बात भी कही गई है, शिकायतकर्ता ने इस अनुभव के संबंध में जारी प्रमाण-पत्र की वैधता तथा उसे जारी करने वाले कार्यालय के अधिकार और अभिलेखों की जांच की मांग की है,शिकायत में यह भी कहा गया है कि अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने वाले कार्यालय की आधिकारिक अभिलेख व्यवस्था में संबंधित पदस्थापना का उल्लेख उपलब्ध है या नहीं, इसकी पुष्टि की जानी चाहिए, यदि प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया अथवा उसमें दर्ज विवरण में कोई विसंगति पाई जाती है,तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
    कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग…

    शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से अनुरोध किया है कि नियुक्ति में प्रस्तुत गरीबी रेखा प्रमाणपत्र,राशन कार्ड और अनुभव प्रमाण-पत्र की संबंधित विभागों से जांच कराई जाए, साथ ही, दस्तावेजों की सत्यता और नियुक्ति के लिए निर्धारित पात्रता की पुष्टि की जाए, आवेदन में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त किए जाने की आशंका जताते हुए संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने और जांच में अनियमितता प्रमाणित होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।
    जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति से जुड़े इस मामले में अब प्रमुख सवाल यह है कि नियुक्ति के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और क्या सभी प्रमाणपत्र संबंधित विभागों के मूल अभिलेखों से मिलान के बाद स्वीकार किए गए थे,यदि शिकायत में उठाए गए सवालों की पुष्टि होती है, तो नियुक्ति प्रक्रिया में दस्तावेजों के सत्यापन और पात्रता निर्धारण की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आ सकती है, वहीं, आरोपों की पुष्टि होने से पहले किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा,फिलहाल शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से दस्तावेजों की जांच कराकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है,संबंधित प्रशासनिक विभाग की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।

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