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बैकुंठपुर@बैकुंठपुर में मैदान की लड़ाई ने पकड़ा जोर, दैनिक घटती-घटना की खबर के बाद कांग्रेस-भाजपा नेताओं ने खोले विकल्प

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  • बैकुंठपुर को अपना स्टेडियम देने की पहल? बंद हैचरी की जमीन पर प्रशांत गुप्ता का प्रस्ताव,एसईसीएल मैदान पर भी मंथन
  • मिनी स्टेडियम पर आयोजनों का दबाव,अब हैचरी की जमीन पर स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव!
  • नगरपालिका चुनाव में गरमाया खेल मैदान का मुद्दा, कांग्रेस ने एसईसीएल तो भाजपा नेता ने हैचरी की जमीन पर जताई संभावना
  • आयोजनों से घिरा मिनी स्टेडियम,स्थायी खेल मैदान के लिए एसईसीएल ग्राउंड और हैचरी की जमीन पर नजर
  • जब शहर में जमीन है,तो स्टेडियम क्यों नहीं? बैकुंठपुर में एसईसीएल मैदान और बंद हैचरी पर उठी चर्चा
  • मिनी स्टेडियम में आयोजनों के दबाव के बीच राजीव गुप्ता ने एसईसीएल मैदान को आम लोगों के लिए खोलने की उठाई मांग
  • हैचरी की जमीन पर समतलीकरण कर स्टेडियम बनाने और कई दिशाओं से पहुंच मार्ग विकसित करने का सुझाव
  • कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने एसईसीएल मैदान आम लोगों के लिए खोलने की रखी मांग, भाजपा के सीए प्रशांत गुप्ता ने भी इसी मैदान को बताया आयोजन का विकल्प
  • 30 हजार की आबादी वाले जिला मुख्यालय में स्थायी खेल मैदान की जरूरत पर सवाल, बंद पड़ी हैचरी की जमीन पर भी हो सकता है विचार


-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,28 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
शहर के बच्चों और युवाओं को खेलने के लिए पर्याप्त मैदान मिले, नागरिकों को सुबह-शाम टहलने की सुविधा हो और बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए स्कूल परिसर पर निर्भरता कम हो बैकुंठपुर में अब यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है, रामानुज मिनी स्टेडियम में लगातार होने वाले आयोजनों और विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर दैनिक घटती घटना में खबर प्रकाशित होने के बाद मैदान की समस्या पर बहस तेज हुई है, कांग्रेस से लेकर भाजपा तक,नेताओं के सामने अब सवाल है कि शहर के लिए वैकल्पिक मैदान कहां हो और उसे आम जनता के उपयोग के योग्य कैसे बनाया जाए।
इस बहस में कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने एसईसीएल ऑफिसर्स कॉलोनी के भीतर स्थित मैदान को विकसित कर शहरवासियों के लिए खोलने का सुझाव दिया है, वहीं,भाजपा से नगर पालिका अध्यक्ष पद के दावेदार बताए जा रहे सीए प्रशांत गुप्ता ने भी एसईसीएल मैदान को विभिन्न शासकीय,अशासकीय और निजी आयोजनों के लिए संभावित विकल्प बताया है, इसके अलावा बंद पड़ी हैचरी की जमीन को भी एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है,अब मुद्दा केवल मैदान की कमी का नहीं, बल्कि शहर के सार्वजनिक स्थलों की उपलब्धता,उनके रखरखाव,इस्तेमाल की अनुमति और भविष्य की योजना का भी है,सवाल यह है कि क्या आगामी नगर पालिका चुनाव में खेल मैदान का मुद्दा केवल बयानों तक सीमित रहेगा,या प्रत्याशी इसके लिए ठोस कार्ययोजना भी सामने रखेंगे?
स्कूल का मैदान आयोजन स्थल बना तो उठे सवाल
बैकुंठपुर के रामानुज मिनी स्टेडियम में राष्ट्रीय पर्वों,राजनीतिक कार्यक्रमों,राज्योत्सव,जिला गठन उत्सव, गरबा और रावण दहन जैसे आयोजनों के लिए मैदान का इस्तेमाल होता रहा है,बड़े कार्यक्रमों के लिए मंच,पंडाल और अन्य व्यवस्थाएं तैयार करने में समय लगता है,इस दौरान मैदान के कुछ हिस्सों का सामान्य उपयोग सीमित हो सकता है,इसी स्थिति को लेकर सवाल उठे कि जिस परिसर का उपयोग विद्यार्थी खेलकूद और अन्य गतिविधियों के लिए करते हैं,वहां बार-बार आयोजन होने पर उनकी जरूरतों का ध्यान कैसे रखा जाता है,मुद्दा कार्यक्रमों के आयोजन का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसा संतुलन बनाने का है जिसमें सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम भी हों और विद्यार्थियों के लिए खेल का स्थान भी सुरक्षित रहे,दैनिक घटती-घटना में इस विषय को उठाए जाने के बाद चर्चा का दायरा बढ़कर पूरे शहर में खेल मैदानों की उपलब्धता तक पहुंच गया है,यदि वैकल्पिक मैदान उपलब्ध हो, तो बड़े आयोजनों का दबाव मिनी स्टेडियम से कम किया जा सकता है, इससे स्कूल परिसर के नियमित उपयोग और सार्वजनिक आयोजनों के बीच बेहतर संतुलनबनाने कीसंभावना बनेगी।
राजीव गुप्ता का प्रस्ताव-एसईसीएल मैदान को आम लोगों के लिए खोलें
कांग्रेस नेता राजीव गुप्ता ने बैकुंठपुर और आसपास की ग्राम पंचायतों में खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त तथा व्यवस्थित मैदानों की कमी का मुद्दा उठाया है, उनका कहना है कि शहर के बीच स्थित रामानुज मिनी स्टेडियम साल के कई अवसरों पर आयोजनों और उनकी तैयारियों के कारण नियमित खेल गतिविधियों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाता,ऐसे में एसईसीएल ऑफिसर्स कॉलोनी के भीतर स्थित मैदान को शहरवासियों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है, राजीव गुप्ता के विचार में इस मैदान को केवल आयोजन स्थल के रूप में नहीं,बल्कि खेलकूद,दौड़ने,टहलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए विकसित किया जाना चाहिए,उन्होंने सुझाव दिया है कि मुख्य मार्ग से एक अलग प्रवेश द्वार बनाया जाए,जिसे सुबह से रात तक निर्धारित समय में खुला रखा जा सके और रात में बंद किया जाए,उनका मानना है कि मुख्य मार्ग से सीधा प्रवेश मिलने पर आम नागरिकों को कॉलोनी के भीतर से होकर जाने की असुविधा नहीं होगी,साथ ही,कॉलोनी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बाउंड्री और फेंसिंग की व्यवस्था की जा सकती है,इससे मैदान का उपयोग आम लोगों के लिए आसान बनाने और कॉलोनी की सुरक्षा के बीच संतुलन कायम करने का रास्ता निकल सकता है।
हाईमास्ट लाइट,सार्वजनिक जिम और पार्किंग का सुझाव
राजीव गुप्ता ने मैदान को उपयोगी बनाने के लिए कुछ बुनियादी सुविधाओं का सुझाव भी दिया है,इनमें हाईमास्ट लाइट,दौड़ने और टहलने के लिए उपयुक्त व्यवस्था तथा मैदान के एक किनारे सार्वजनिक जिम विकसित करना शामिल है,उनके अनुसार, मैदान में पर्याप्त खुली जगह और पार्किंग की संभावना होने से इसे शहर की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा सकता है,उन्होंने यह विचार भी रखा है कि बंद पड़ी हैचरी के विस्थापन के बाद उसके सामने की जमीन के किसी हिस्से में शहर की जरूरत के अनुरूप ऑडिटोरियम बनाया जा सके,ऐसी स्थिति में बड़े कार्यक्रमों के दौरान एसईसीएल मैदान का उपयोग पार्किंग सहित अन्य सहायक व्यवस्थाओं के लिए भी किया जा सकता है,हालांकि,ये सभी प्रस्ताव फिलहाल विचार और सुझाव के स्तर पर हैं,इनके क्रियान्वयन के लिए संबंधित जमीन की स्थिति, स्वामित्व,उपलब्धता,विकास लागत और संबंधित विभागों की अनुमति की जानकारी जरूरी होगी, केवल मैदान उपलब्ध होने से परियोजना अपने आप पूरी नहीं हो जाती, उसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
सीए प्रशांत गुप्ता ने भी एसईसीएल मैदान को बताया विकल्प
दूसरी ओर,भाजपा से नगर पालिका अध्यक्ष पद के दावेदार बताए जा रहे सीए प्रशांत गुप्ता ने भी एसईसीएल मैदान को शहर में विभिन्न आयोजनों के लिए संभावित विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है,उनका कहना है कि यह मैदान शहर के भीतर स्थित है,लेकिन शैक्षणिक संस्थानों से दूर होने के कारण बड़े कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकता है,उन्होंने इसे दो तरफ से प्रवेश द्वार के साथ बहुउपयोगी मैदान के रूप में विकसित करने की कल्पना रखी है,प्रशांत गुप्ता की सोच में मैदान को शासकीय,अशासकीय और निजी आयोजनों के लिए उपयोगी बनाने का पहलू प्रमुख है,वहीं,राजीव गुप्ता ने मैदान को आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से खोलने,खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया है,दोनों नेताओं के विचारों में एसईसीएल मैदान का उपयोग बढ़ाने की बात सामने आती है, लेकिन इसके इस्तेमाल का उद्देश्य और संचालन की रूपरेखा स्पष्ट करना जरूरी होगा, क्या मैदान मुख्य रूप से खेल गतिविधियों के लिए होगा? क्या वहां बड़े आयोजन भी होंगे? यदि दोनों तरह की गतिविधियां होंगी, तो उनके लिए समय और स्थान कैसे निर्धारित किया जाएगा? इन सवालों का जवाब विस्तृत योजना से ही मिल सकेगा।
एसईसीएल मैदान की मौजूदा स्थिति भी बड़ी चुनौती
एसईसीएल मैदान को विकल्प के रूप में विकसित करने की चर्चा के साथ उसकी वर्तमान स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है,उपलब्ध विवरण और साझा तस्वीरों में मैदान के कुछ हिस्सों में रखरखाव की कमी दिखाई देती है,ऐसे में इसे नियमित खेलकूद या बड़े आयोजनों के लिए उपयोगी बनाने से पहले सफाई, समतलीकरण, सुरक्षा,प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं का आकलन करना होगा, मैदान ऑफिसर्स कॉलोनी के भीतर स्थित होने के कारण आम नागरिकों की नियमित पहुंच भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है,यदि मुख्य मार्ग से अलग प्रवेश द्वार बनाया जाता है,तो उसके लिए एसईसीएल प्रबंधन की सहमति,सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश के नियम तय करने होंगे,यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि मैदान का रखरखाव कौन करेगा और विकास पर होने वाला खर्च किस मद से आएगा,राजीव गुप्ता ने अपने सुझाव में कॉलोनी की सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा दोनों को ध्यान में रखने की बात कही है, उनके प्रस्ताव के अनुसार,उचित फेंसिंग और अलग प्रवेश व्यवस्था के जरिए मैदान को आम नागरिकों के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है, हालांकि, इसकी व्यवहारिकता एसईसीएल प्रबंधन के निर्णय और तकनीकी आकलन पर निर्भर करेगी।
नगर पालिका चुनाव में प्रत्याशियों से मांगी जा सकती है ठोस कार्ययोजना
आगामी नगर पालिका चुनाव के संदर्भ में खेल मैदान का मुद्दा शहर के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकता है,नागरिकों के सामने अब यह अवसर है कि वे प्रत्याशियों से केवल सामान्य आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट योजना के बारे में भी सवाल पूछें, क्या एसईसीएल प्रबंधन से औपचारिक बातचीत की जाएगी? क्या मैदान के लिए प्रवेश द्वार बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा? क्या बंद पड़ी हैचरी की जमीन की उपलब्धता का परीक्षण कराया जाएगा? विकास और रखरखाव का खर्च कौन उठाएगा? क्या मैदान को नियमित खेल गतिविधियों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा? और प्रस्ताव को लागू करने की समयसीमा क्या होगी? इन सवालों पर सभी प्रत्याशियों के विचार सामने आने से नागरिकों को अलग-अलग प्रस्तावों और उनकी व्यावहारिकता को समझने का अवसर मिलेगा। खेल मैदान का मुद्दा किसी एक दल तक सीमित नहीं है, यह शहर के बच्चों, युवाओं, खिलाडि़यों और आम नागरिकों की जरूरत से जुड़ा है।
अब बयानों से आगे बढ़कर जमीन पर काम की जरूरत
बैकुंठपुर में खेल मैदान को लेकर उठी चर्चा ने शहर की एक बुनियादी जरूरत को सामने रखा है। रामानुज मिनी स्टेडियम में सार्वजनिक आयोजनों और विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है,इसके साथ ही,एसईसीएल मैदान और बंद पड़ी हैचरी की जमीन जैसे संभावित विकल्पों की व्यवहारिकता का आकलन भी जरूरी है, राजीव गुप्ता और सीए प्रशांत गुप्ता के विचारों के बाद अब संबंधित प्रशासन,नगर निकाय और एसईसीएल प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी,किसी भी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए जमीन की स्थिति,स्वामित्व,अनुमति,लागत,सुरक्षा और संचालन संबंधी पहलुओं पर स्पष्टता आवश्यक है, दैनिक घटती-घटना में मिनी स्टेडियम के मुद्दे को उठाए जाने के बाद शुरू हुई यह चर्चा तभी सार्थक परिणाम दे सकेगी,जब वैकल्पिक मैदान के लिए ठोस प्रस्ताव,जिम्मेदार एजेंसी और समयसीमा तय हो,शहर को केवल आयोजन कराने की जगह नहीं, बल्कि ऐसी सार्वजनिक सुविधा चाहिए जिसका उपयोग सालभर बच्चे, युवा, खिलाड़ी और आम नागरिक कर सकें,अब बैकुंठपुर के सामने सवाल साफ है—क्या शहर को एक व्यवस्थित खेल मैदान और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस पहल होगी, या यह मुद्दा चुनावी चर्चा तक ही सीमित रह जाएगा?हैचरी की जमीन पर शहर के बीचोंबीच स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव,सीए प्रशांत गुप्ता ने गिनाए फायदे
बैकुंठपुर में बंद पड़ी सरकारी हैचरी की जमीन को लेकर भी सीए प्रशांत गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण विकल्प सामने रखा है,उनका कहना है कि यदि हैचरी को भविष्य में दोबारा शुरू नहीं किया जाना है या इसे किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग पर विचार होता है,तो इस जमीन का उपयोग बैकुंठपुर के लिए एक बेहतर स्टेडियम विकसित करने में किया जा सकता है,उनके अनुसार,यह स्थान शहर के भीतर और मुख्य मार्ग के नजदीक होने के कारण खेल सुविधाओं के विकास के लिए उपयुक्त साबित हो सकता है,प्रशांत गुप्ता के मुताबिक, जमीन का कुछ हिस्सा निचले स्तर पर है,लेकिन समतलीकरण कराकर यहां व्यवस्थित स्टेडियम तैयार किया जा सकता है, इस स्थान की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहां से पुलिस लाइन,नगर पालिका और शहर के प्रमुख हिस्सों तक पहुंच आसान हो सकती है, इसके अलावा,एसईसीएल मैदान के सामने तथा प्रेमबाग कॉलोनी के पीछे स्थित होने के कारण यह क्षेत्र शहर के खेल और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है,उन्होंने इस स्थान की पहुंच को भी इसकी बड़ी उपयोगिता बताया,प्रस्ताव के अनुसार, स्टेडियम तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग की ओर से प्रवेश द्वार बनाया जा सकता है, इसके अलावा हैचरी के मुख्य मार्ग वाले रास्ते और प्रेमबाग कॉलोनी के पीछे मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग से भी आवागमन की व्यवस्था विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है, इससे अलग-अलग दिशाओं से स्टेडियम तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा और बड़े आयोजनों के दौरान यातायात का दबाव भी व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है,सीए प्रशांत गुप्ता का मानना है कि पर्याप्त योजना के साथ यहां दर्शकों के बैठने,पार्किंग,खेल गतिविधियों और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा सकती है। यदि जमीन की उपलब्धता, स्वामित्व, तकनीकी व्यवहार्यता और प्रशासनिक अनुमति अनुकूल रहती है,तो यह स्थान बैकुंठपुर को एक व्यवस्थित स्टेडियम देने का विकल्प बन सकता है,उनका सुझाव है कि शहर के बीचोंबीच उपलब्ध इस जमीन की उपयोगिता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि,हैचरी को बंद रखने अथवा दूसरी जगह स्थानांतरित करने और उसकी जमीन पर स्टेडियम निर्माण का निर्णय संबंधित विभागों की नीति,भूमि की स्थिति और तकनीकी जांच के बाद ही संभव होगा, फिलहाल,यह प्रस्ताव बैकुंठपुर में स्थायी खेल मैदान की जरूरत को लेकर चल रही चर्चा में एक नया विकल्प प्रस्तुत करता है।
कॉलेज और अन्य परिसरों की स्थिति ने बढ़ाई जरूरत
राजीव गुप्ता ने अपने विचार में कॉलेज परिसर और अन्य उपलब्ध जमीनों के इस्तेमाल से जुड़ी परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है, उनके अनुसार, कॉलेज कैंपस में एसपी कार्यालय संचालित होने और पीजी कॉलेज के लिए आवंटित जमीन पर जिला शिक्षा कार्यालय चलने से कुछ स्थानों की उपलब्धता प्रभावित हुई है,यदि शहर के अन्य सार्वजनिक और शैक्षणिक परिसरों में भी खेल गतिविधियों के लिए जगह सीमित है,तो यह स्थिति नगर नियोजन के स्तर पर समीक्षा की मांग करती है,शहर में कितने मैदान उपलब्ध हैं, उनमें से कितने नियमित खेल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं और किन स्थानों को बेहतर बनाकर आम नागरिकों के लिए खोला जा सकता है—इन सवालों पर प्रशासन और संबंधित संस्थानों को तथ्यात्मक जानकारी सामने रखनी चाहिए, खेल मैदान केवल खिलाडि़यों के अभ्यास का स्थान नहीं होता। बच्चों के शारीरिक विकास, युवाओं की खेल प्रतिभा, बुजुर्गों की सैर और नागरिकों की दैनिक गतिविधियों के लिए भी सार्वजनिक खुली जगह जरूरी है, इसलिए इस विषय का समाधान केवल किसी एक मैदान को उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शहर की दीर्घकालीन जरूरतों को ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए।


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