चनवारीडांड के चार खसरों के सीमांकन और कथित अतिक्रमण व खरीद-बिक्री की जांच की मांग,11 अप्रैल के जांच आदेश के पालन पर उठा सवाल
आनंद शर्मा ने कलेक्टर जनदर्शन में सौंपा आवेदन, भूमिहीन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की भी मांग
नजूल तहसीलदार के जांच आदेश के छह महीने बाद भी कार्रवाई की स्थिति पर सवाल
आनंद शर्मा ने चार खसरों के सीमांकन, कथित अतिक्रमण और खरीद-बिक्री की निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
-संवाददाता-
एमसीबी,28 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। ग्राम चनवारीडांड की 4.21 हेक्टेयर शासकीय भूमि से जुड़ा मामला अब जिला प्रशासन के जनदर्शन में दूसरी बार पहुंच गया है,कथित अतिक्रमण,निर्माण और खरीद-बिक्री की जांच की मांग को लेकर आनंद शर्मा ने 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया है, शिकायतकर्ता ने चार खसरों की भूमि का संयुक्त सीमांकन कराने,राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान करने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नजूल तहसीलदार न्यायालय,मनेन्द्रगढ़ द्वारा 11 अप्रैल 2026 को संबंधित पटवारी और राजस्व निरीक्षक को स्थल निरीक्षण कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाने का उल्लेख शिकायत में है,तो अब तक जांच की स्थिति क्या है? क्या मौके का निरीक्षण किया गया,क्या प्रतिवेदन प्रस्तुत हुआ और यदि कार्रवाई लंबित है तो इसके पीछे क्या कारण हैं? शिकायतकर्ता ने इन्हीं बिंदुओं पर प्रशासन से स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग की है।
चार खसरों की 4.2100 हेक्टेयर भूमि जांच के दायरे में
आनंद शर्मा द्वारा प्रस्तुत आवेदन में ग्राम चनवारीडांड स्थित चार खसरों की शासकीय भूमि का उल्लेख किया गया है, इनमें खसरा नंबर 263,रकबा 0.7000 हेक्टेयर,खसरा नंबर 261,रकबा 0.2900 हेक्टेयर,खसरा नंबर 250, रकबा 2.6100 हेक्टेयर और खसरा नंबर 252, रकबा 0.6100 हेक्टेयर शामिल हैं। इन चारों खसरों का कुल रकबा 4.2100 हेक्टेयर है,शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित भूमि पर कथित अतिक्रमण,निर्माण और खरीद-बिक्री की आशंका को देखते हुए इसकी विस्तृत जांच जरूरी है,आवेदक ने राजस्व अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर चारों खसरों का निष्पक्ष सीमांकन कराने की मांग की है,ताकि भूमि की वास्तविक स्थिति और उसके वर्तमान उपयोग का पता चल सके,हालांकि,शासकीय भूमि पर अतिक्रमण अथवा अवैध खरीद-बिक्री की पुष्टि अभी जांच का विषय है, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष राजस्व अभिलेखों, सीमांकन और सक्षम अधिकारियों की जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
11 अप्रैल के जांच आदेश के पालन पर उठे सवाल
आवेदन के अनुसार,इस मामले में नजूल तहसीलदार न्यायालय,मनेन्द्रगढ़ द्वारा 11 अप्रैल 2026 को संबंधित पटवारी एवं राजस्व निरीक्षक को स्थल निरीक्षण कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे, शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है,इसी कारण उन्होंने 27 अक्टूबर को दूसरी बार जनदर्शन में आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की, अब प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि पूर्व में जारी निर्देशों का पालन हुआ या नहीं,यदि जांच पूरी हो चुकी है,तो प्रतिवेदन में क्या निष्कर्ष सामने आए? यदि जांच नहीं हुई है,तो देरी के कारण क्या हैं? यह मामला केवल शिकायत दर्ज होने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जांच के आदेश के बाद उसकी प्रगति और निष्कर्ष की जानकारी भी शिकायतकर्ता को मिलनी चाहिए,ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रहे।
निर्माण,कब्जे और खरीद-बिक्री के दस्तावेजों की जांच की मांग
शिकायत में आवेदक ने चारों खसरों की भूमि पर वर्तमान में किए गए निर्माण,कब्जे और उपयोग की स्थिति की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया है,साथ ही कथित खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल कर यह पता लगाने की मांग की गई है कि भूमि के संबंध में कोई लेन-देन हुआ है तो वह किन परिस्थितियों में और किन व्यक्तियों के बीच हुआ,आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि जांच में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाकर भूमि को शासकीय प्रयोजन के लिए सुरक्षित किया जाए,वहीं,यदि कथित खरीद-बिक्री में अनियमितता सामने आती है,तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए,इन मांगों पर निर्णय लेने से पहले राजस्व रिकॉर्ड, मौके की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक होगा।
प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र हितग्राहियों का मुद्दा भी उठाया
आनंद शर्मा ने अपने आवेदन में भूमिहीन और जरूरतमंद गरीब परिवारों का मुद्दा भी उठाया है, उनका कहना है कि जिन परिवारों के पास स्वयं की जमीन नहीं है,उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने में भूमि संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, आवेदन में मांग की गई है कि पात्र एवं भूमिहीन गरीब परिवारों की भूमि संबंधी समस्याओं का नियमानुसार निराकरण किया जाए,ताकि वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहें, हालांकि,इस मामले में कितने परिवार प्रभावित हैं और उनकी समस्याओं की वास्तविक स्थिति क्या है,यह संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दूसरी बार जनदर्शन में आवेदन,अब जवाबदेही की बारी
चनवारीडांड की 4.21 हेक्टेयर शासकीय भूमि से जुड़े इस मामले में अब निगाह जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है, शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन के साथ पूर्व में जारी जांच आदेश और पहले प्रस्तुत शिकायत की प्रतियां संलग्न किए जाने का उल्लेख किया है,इससे प्रशासन के समक्ष पूर्व शिकायत और वर्तमान मांगों की समीक्षा करने का आधार उपलब्ध है, अब अहम सवाल यह है कि संबंधित राजस्व अधिकारियों ने जांच आदेश के बाद क्या कदम उठाए? क्या चारों खसरों का सीमांकन हुआ? क्या मौके पर निर्माण और कब्जे की स्थिति दर्ज की गई? और क्या कथित खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों और जिला प्रशासन के पक्ष से सामने आना बाकी है, फिलहाल आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी व्यक्ति की संलिप्तता को प्रमाणित नहीं माना जा सकता, शासकीय भूमि की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता जनहित से जुड़े विषय हैं, ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच के साथ उसकी प्रगति और निष्कर्ष स्पष्ट करना भी जरूरी है,अब देखना होगा कि दूसरी बार जनदर्शन में पहुंचे इस आवेदन पर प्रशासन कब तक जांच की स्थिति स्पष्ट करता है और नियमानुसार क्या कार्रवाई करता है।
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