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अम्बिकापुर@ ट्रेनों की लेटलतीफी पर कांग्रेस ने रेलवे को घेरा,जनसंवाद में सौंपा ज्ञापन

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मालगाडि़यों के दबाव का हवाला देकर अधिकारियों ने जताई असमर्थता! यात्रियों को कब मिलेगी समय पर सफर की सुविधा?
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
सरगुजा में यात्री ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अंबिकापुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने ट्रेनों के विलंब से परिचालन की समस्या उठाते हुए ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ट्रेनों की अनियमितता से यात्रियों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है,लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित पहल दिखाई नहीं दे रही है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अंबिकापुर शहर के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह धंजल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में राजेन्द्र बहादुर सिंह,अनूप मेहता सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। उन्होंने रेलवे अधिकारियों के समक्ष विलंब से चल रही ट्रेनों का मुद्दा उठाते हुए यात्रियों को समयबद्ध रेल सेवा उपलब्ध कराने की मांग की।
मालगाडि़यों के दबाव का हवाला,समाधान पर सवाल : कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जनसंवाद के दौरान जब ट्रेनों की लेटलतीफी और यात्रियों को हो रही परेशानी के संबंध में अधिकारियों से जवाब मांगा गया,तो वे संतोषजनक समाधान प्रस्तुत नहीं कर सके। प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि अनौपचारिक चर्चा में अधिकारियों ने माल ढुलाई के कारण उत्पन्न परिचालन संबंधी परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति को सुधारना उनके अधिकार क्षेत्र या क्षमता से बाहर है। यदि अधिकारियों की ओर से वास्तव में ऐसी बात कही गई है,तो यह रेलवे की परिचालन व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। माल ढुलाई रेलवे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है,लेकिन यात्री ट्रेनों के समय पालन और आम लोगों की सुविधा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। यात्रियों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी ट्रेनें लगातार विलंब से क्यों चल रही हैं और इस समस्या के समाधान के लिए रेलवे के पास क्या कार्ययोजना है।
मरीज, विद्यार्थी और नौकरीपेशा यात्री परेशान : अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस सहित अन्य यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी का असर सरगुजा के उन लोगों पर पड़ता है,जो इलाज,पढ़ाई,रोजगार और जरूरी कामों के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करते हैं। पूर्व में भी स्थानीय स्तर पर ट्रेनों के दो से तीन घंटे विलंब से चलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इससे आगे की यात्रा के लिए कनेक्टिंग ट्रेन पकड़ने में परेशानी होती है और यात्रियों का समय तथा पैसा दोनों खर्च होते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि मालगाडि़यों के परिचालन के कारण यात्री ट्रेनें समय पर नहीं चल पा रही हैं, तो रेलवे इस स्थिति से निपटने के लिए क्या व्यवस्था कर रहा है? क्या ट्रेनों के परिचालन की समीक्षा कर समय-सारिणी में व्यावहारिक सुधार किया जाएगा या यात्रियों को इसी तरह घंटों इंतजार करना पड़ेगा?
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रेलवे से मांग की है कि ट्रेनों के विलंब के कारणों की समीक्षा कर समयबद्ध परिचालन सुनिश्चित किया जाए और यात्रियों को वास्तविक स्थिति की सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। जनसंवाद में उठाए गए इस मुद्दे के बाद अब रेलवे प्रबंधन की प्रतिक्रिया और समस्या के समाधान के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर नजर रहेगी। यात्रियों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिसमें माल ढुलाई और यात्री सेवाओं के बीच संतुलन बनाते हुए निर्धारित समय पर यात्रा की सुविधा सुनिश्चित हो सके।


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