सुपरमैन रंजीत गुप्ता की अगुवाई में लगातार दो कार्रवाइयां,सवाल यह कि अवैध नशे के कारोबार पर स्थायी अंकुश कब?
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,22 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा में अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई एक बार फिर चर्चा में है। पहले जजगा पुलिया के पास उड़ीसा से जुड़े एक दंपति के कब्जे से 22.600 किलो गांजा जब्त करने और अब मुक्तिपारा में 23 लीटर महुआ शराब के साथ महिला को गिरफ्तार करने की कार्रवाई ने विभाग की सक्रियता सामने रखी है। दोनों कार्रवाइयों में सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता की भूमिका बताई गई है। हालांकि,इन कार्रवाइयों के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या छिटपुट सफलताओं से जिले में अवैध नशे के कारोबार पर स्थायी रोक लग सकेगी?
22 किलो गांजा पकड़ने के बाद महुआ शराब पर कार्रवाई : आबकारी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, 22 अक्टूबर 2026 को संभागीय आबकारी उड़नदस्ता कार्यालय, केदारपुर अंबिकापुर को मुखबिर से सूचना मिली कि मुक्तिपारा निवासी सीता रजवाड़े के घर बिक्री के लिए बड़ी मात्रा में महुआ शराब रखी गई है। सूचना के आधार पर सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में उड़नदस्ता टीम ने घर पर दबिश दी। विभागीय विवरण के मुताबिक,टीम के पहुंचने पर महिला ने शराब से भरी डेकची पलटने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ शराब बह गई, जबकि शेष शराब की माप करने पर कुल 23 लीटर महुआ शराब बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान महिला सैनिक के साथ कथित झूमाझटकी और शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप भी लगाया गया है। आबकारी विभाग ने सीता रजवाड़े के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1), 34(2), 59(क) तथा धारा 40(ए) के तहत कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश कर रिमांड और जेल दाखिले की प्रक्रिया किए जाने की जानकारी दी है।
इससे पहले जजगा में पकड़ा गया था 22.600 किलो गांजा : इससे पहले संभागीय आबकारी उड़नदस्ता टीम ने सीतापुर थाना क्षेत्र के जजगा पुलिया के पास एक दंपति को 22.600 किलो गांजे के साथ पकड़ा था। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब साढ़े चार लाख रुपये बताई गई थी। विभाग के अनुसार,आरोपी उड़ीसा से गांजा लाकर छत्तीसगढ़ में सप्लाई करने के इरादे से पहुंचे थे। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था,जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में सहायक जिला आबकारी अधिकारी सुपरमैन रंजीत गुप्ता के साथ सहायक उपनिरीक्षक रमेश दुबे,प्रधान आरक्षक अशोक सोनी तथा महिला सैनिक राजकुमारी सिंह और चंद्रावती की भूमिका बताई गई थी। दोनों मामलों में कार्रवाई निश्चित रूप से विभागीय अमले की सक्रियता दर्शाती है,लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट करती है कि क्षेत्र में गांजा और अवैध शराब की उपलब्धता पर निगरानी लगातार बनाए रखने की जरूरत है।
कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी जरूरी : अवैध शराब और गांजा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई केवल गिरफ्तारी और जब्ती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भी महत्वपूर्ण है कि नशे का सामान कहां से आ रहा है,इसकी आपूर्ति कौन कर रहा है और स्थानीय स्तर पर इसके खरीदारों तथा वितरण नेटवर्क तक विभाग की पहुंच कितनी है। यदि किसी मामले में व्यापक नेटवर्क के संकेत मिलते हैं,तो उसकी जांच और आगे की कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है। सरगुजा में आबकारी विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ मुखबिर की सूचना पर छापेमारी करना नहीं, बल्कि नियमित गश्त,संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और अवैध कारोबार के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई करना भी है। लगातार अभियान चलने से ही नशे के कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो सकता है।
क्या कार्रवाई अब नियमित अभियान का रूप लेगी?
सुपरमैन रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में सामने आई इन कार्रवाइयों के बाद विभाग की सक्रियता चर्चा में है। लेकिन असली कसौटी यह होगी कि कार्रवाई का सिलसिला आगे भी इसी तरह जारी रहता है या नहीं। सवाल किसी एक अधिकारी की कार्यशैली तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे आबकारी तंत्र की जवाबदेही से जुड़ा है। यदि विभाग नियमित रूप से कार्रवाई करता है,तस्करी के स्रोतों तक पहुंचता है और अवैध शराब की बिक्री वाले क्षेत्रों में प्रभावी निगरानी रखता है,तभी इन कार्रवाइयों का व्यापक असर दिखाई देगा। अन्यथा कुछ मामलों में जब्ती और गिरफ्तारी की खबरें तो सामने आती रहेंगी,लेकिन अवैध नशे के कारोबार पर स्थायी अंकुश लगाने का लक्ष्य अधूरा रह सकता है। अब निगाह इस बात पर है कि आबकारी विभाग इन सफल कार्रवाइयों को नियमित अभियान में बदलकर सरगुजा में अवैध शराब और गांजा कारोबार के नेटवर्क पर कितना प्रभावी प्रहार कर पाता है।
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